September 15, 2026

66 साल पहले ब्रज भाषा से बना था Madhubala का आइकॉनिक सॉन्ग, 'स्वर कोकिला' ने गाया था ठेठ देहाती गीत - madhubala mohe panghat pe nandlal song from mughal e azam made by rustic braj bhasha 66 years ago

वेटरन एक्ट्रेस रहीं मधुबाला का एक आइकॉनिक सॉन्ग ब्रज भाषा के जरिए 66 साल पहले बना था।

मधुबाला का गाना (फोटो क्रेडिट- स्क्रीन शॉट)

मधुबाला का गाना (फोटो क्रेडिट- स्क्रीन शॉट)

HighLights

  1. मधुबाला का पुराना गाना आज भी कल्ट

  2. ब्रज भाषा की शैली से बना था ये गीत

  3. लता मंगेशकर की आवाज में है अमर

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की वेटरन एक्ट्रेस के तौर पर मधुबाला (Madhubala) को आज भी याद किया जाता है। अपनी बेबाक खूबसूरती और फिल्मों में कमाल की अदाकारी के लिए मधुबाला को जाना जाता था। सुनहरे एक्टिंग करियर के दौरान उन्होंने कई सफल मूवीज में काम किया और उनमें कई शानदार गीत भी शामिल रहे। 

मधुबाला के उनमें से एक कल्ट क्लासिक गाने का बारे में इस लेख में हम आपको बताने जा रहे, जो ब्रज भाषा की मदद से 66 साल पहले बना था। आइए जानते हैं कि वह आइकॉनिक सॉन्ग कौन सा है। 

मधुबाला का कल्ट गीत

सिनेमा जगत के इतिहास में कई बार देखा गया है कि ग्रामीण और क्षेत्रीय भाषा की मदद से फिल्मों के गीत और संगीत को तैयार किया जाता है। ऐसा ही कमाल साल 1960 में रिलीज हुई अभिनेत्री मधुबाला और अभिनेता दिलीप कुमार की कालजयी फिल्म मुगल-ए-आजम के एक गाने में देखने को मिला था, जिसके बोले थे- मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे... (Mohe Panghat Pe Nandlal Chhed Gayo Re)।

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Mohe Panghat Pe song

मुगल-ए-आजम के इस गीत के लिरिक्स को सुनने और पढ़ने के बाद ये साफ जाहिर होता है कि इसे ब्रज भाषा की मदद से तैयार किया है। महान गीतकार शकील बदायूंनी की कलम द्वारा मधुबाला पर फिल्माए गए मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे... गाने के लिरिक्स को लिखा गया था। 

आज भी रिलीज के 66 साल बाद भी इस गाने को खूब सुना जाता है। जिसका कारण स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की मधुर आवाज है, उन्होंने अपनी करश्माई आवाज के दम पर इस गाने को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया था।

आपको बता दें कि मुगल-ए-आजम मधुबाला के करियर की सबसे सफल फिल्म थी और उसका मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे... उनका सबसे आइकॉनिक गाना साबित हुआ था। 

इस संगीतकार ने दिया था संगीत

मुगल-ए-आजम के मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे...  गाने के संगीतकार की जिम्मेदारी नौशाद के हाथों में रही और उन्होंने अपनी शानदार धुनों के दम पर इस ठेठ देहाती गीत को एक कल्ट क्लासिक बनाने में अहम योगदान दिया। लता मंगेशकर की गायिका, शकील बदायूंनी के लिरिक्स और नौशाद के म्यूजिक की बदौलत अभिनेत्री मधुबाला का ये सदाबहार गीत बनकर तैयार हुआ था।