ब्रिटिश मौलाना से जुड़ी संस्था की जमीन का बैनामा निरस्त: संतकबीर नगर में 640 वर्गमीटर भूमि सरकार में निहित होगी; निर्माण भी सरकारी संपत्ति घोषित - Sant Kabir Nagar News
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Khalilabad SDM Court Order | Land Seizure From British National Case
देवीलाल गुप्ता | संतकबीर नगर37 मिनट पहले
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यूपी के संतकबीरनगर में ब्रिटिश नागरिकता वाले मौलाना शमसुलहुदा खान की शैक्षिक संस्था के नाम खरीदी गई 640 वर्गमीटर कृषि भूमि का बैनामा निरस्त कर दिया गया है। एसडीएम कोर्ट ने इस जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया है। जमीन पर किए गए निर्माण को भी सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। अब राजस्व अभिलेखों से संस्था का नाम हटाकर राज्य सरकार का नाम दर्ज किया जाएगा।
मामला 2 सितंबर 2014 को कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के नाम कराए गए जमीन के बैनामे से जुड़ा है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान संस्था की ओर से बैनामे से पहले उत्तर प्रदेश सरकार से आवश्यक लिखित अनुमति लिए जाने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। न्यायालय ने इसे उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 90 के प्रावधानों का उल्लंघन माना और कानून के विपरीत हुए हस्तांतरण को शून्य कर दिया।
बता दें कि मौलाना शमसुलहुदा खान पर ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी करीब 10 साल तक कुल 16 लाख रुपए फर्जी वेतन लेने, वीआरएस और जीपीएस लाभ लेने का आरोप था। मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तत्कालीन 4 अधिकारियों को भी निलंबित किया गया था। वहीं एटीएस जांच में मौलाना शमसुलहदा खान के पाकिस्तान से कनेक्शन होने की बात भी सामने आई थी।
विदेशी फंडिंग से रामपुर में मौलाना ने 640 वर्गमीटर कृषि भूमि पर मदरसा बनवाया था।
ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद संस्था के नाम कराया बैनामा
शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, शमसुलहुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटेन की नागरिकता हासिल की थी। ब्रिटिश पासपोर्ट और देशीकरण प्रमाण पत्र से इसकी पुष्टि हुई। इसके करीब नौ महीने बाद 2 सितंबर 2014 को उनकी सरपरस्ती वाली संस्था के नाम कृषि भूमि का बैनामा कराया गया। संस्था का नाम कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी, रजानगर, गोश्त मंडी रोड, खलीलाबाद है। सुनवाई में संस्था के प्रबंधक तौसीफ रजा खान और सरपरस्त शमसुलहुदा खान की ओर से सरकार से पूर्व अनुमति लेने का कोई दस्तावेज नहीं दिया जा सका।
इस जमीन को लेकर पहले भी प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी थी। जिलाधिकारी ने 12 फरवरी 2024 को भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। बाद में मंडलायुक्त बस्ती के स्तर से मामला रिमांड किए जाने के बाद डीएम ने 14 नवंबर 2025 को राजस्व संहिता की धारा 104 के तहत बैनामे को शून्य मानते हुए जमीन सरकार में निहित कर दी थी। इसके बाद निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हुई। संस्था ने इन आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को संबंधित आदेशों को क्षेत्राधिकार के आधार पर निरस्त करते हुए मामले के निस्तारण के लिए एसडीएम खलीलाबाद को सक्षम प्राधिकारी माना था। इसके बाद धारा 104/105 के तहत एसडीएम कोर्ट में मामले की दोबारा सुनवाई हुई।
तस्वीर अप्रैल 2026 की है, जब मौलाना के अवैध मदरसे को प्रशासन ने धवस्त कर दिया।
640 वर्गमीटर जमीन और निर्माण अब सरकार में निहित होगा
सुनवाई के दौरान संस्था या विक्रेता की ओर से बैनामे से पहले राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति लेने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। न्यायालय ने हल्का लेखपाल की 26 मई 2026 की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए खतौनी फसली 1427-1432 में दर्ज संस्था का नाम हटाने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, गाटा संख्या 154 मि. की 640 वर्गमीटर जमीन और उस पर किया गया निर्माण, यदि कोई है, 2 सितंबर 2014 की क्रय तिथि से सभी भारों से मुक्त होकर राज्य सरकार में निहित होगा। राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियों के लिए आदेश की प्रति तहसीलदार खलीलाबाद को भेजी जाएगी।
प्रशासन के मुताबिक, इसी 640 वर्गमीटर जमीन पर करीब तीन मंजिला मदरसा भवन बनाया गया था। इसमें करीब 25 कमरे हैं और निर्माण की लागत करीब 5 करोड़ रुपए बताई गई है। प्रशासन ने निर्माण में विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल की आशंका भी जताई है। 'कुलियातुल बनातिर रजबिया' नाम से संचालित गर्ल्स मदरसे को वर्ष 2024 में सील किया गया था। इसके बाद पास की बाउंड्री में इसी नाम से दूसरा मदरसा संचालित किए जाने की बात सामने आई, जिसे 3 नवंबर 2025 को फिर सील कर दिया गया। यहां एक मकान में गर्ल्स हॉस्टल भी संचालित होने की जानकारी सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, उस समय मदरसे में करीब 400 बच्चे पढ़ते थे।
अब ब्रिटिश मौलाना का आलीशान मदरसा खंडहर हो चुका है।
अब जानिए क्या है ब्रिटिश मौलाना पर आरोप–
ब्रिटेन जाने के बाद भी मदरसे से मिलता रहा वेतन: शमसुलहुदा खान की 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ के दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2007 में ब्रिटेन जाने और 2013 में वहां की नागरिकता लेने के बाद भी रिकॉर्ड में 31 जुलाई 2017 तक मदरसे से वेतन मिलता रहा।
करीब 16 लाख रुपए वेतन लेने का आरोप: आरोप है कि ब्रिटेन में रहने के दौरान शमसुलहुदा को विभागीय स्तर पर अनियमित चिकित्सा अवकाश भी स्वीकृत किए जाते रहे। इस अवधि में करीब 16 लाख रुपए वेतन लेने की बात सामने आई है।
VRS के साथ GPF और पेंशन का भी लाभ: वर्ष 2017 में शमसुलहुदा को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दिया गया। आरोप है कि इसके बाद उन्हें GPF और पेंशन का लाभ भी मिला।
चार अधिकारियों पर कार्रवाई: मामला सामने आने के करीब पांच महीने पहले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इनमें संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, गाजियाबाद के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार शामिल हैं। आरोप है कि आजमगढ़ में तैनाती के दौरान इन अधिकारियों ने शमसुलहुदा को नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाया। मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई के साथ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी की जा रही है।
यूपी विधानसभा चुनाव में वोट डालने का आरोप: जांच में यह आरोप भी सामने आया कि ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद शमसुलहुदा 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मतदान करने भारत आए थे। इसको लेकर उनकी नागरिकता और मतदान की वैधता पर सवाल उठे।
विदेशों से फंडिंग और करीब 100 करोड़ की संपत्ति का आरोप: जांच एजेंसियों के अनुसार, विदेशों से उनके खातों में बड़ी रकम आई और इस धन से शमसुलहुदा, उनके बेटे तौसीफ रजा खान और बहू नसरीन जहां के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
ब्रिटिश मौलाना के मामले में अल्पसंख्यक विभाग के 4 अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है।
ATS जांच में पाकिस्तान कनेक्शन का दावा, तीन मुकदमे दर्ज
शमसुलहुदा के खिलाफ एटीएस भी जांच कर चुकी है। जांच में उसके वर्ष 2007 से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का दावा किया गया था। आरोप है कि वह इस्लामी प्रचार के नाम पर पाकिस्तान के कई शहरों में जाता था और वहां के मौलवियों व धार्मिक संगठनों के संपर्क में था। भारत में उसके जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और कुछ संदिग्ध लोगों से संपर्क में रहने की बात भी जांच में सामने आई थी। एटीएस के अनुसार, उस पर 'दावते इस्लाम' नाम की प्रतिबंधित गतिविधि चलाने और विदेशी फंडिंग के स्रोत व इस्तेमाल को छिपाने के आरोप भी लगे थे। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
शमसुलहुदा के खिलाफ अब तक तीन मुकदमे दर्ज होने की जानकारी है। इनमें विदेशी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा मामला, संतकबीर नगर में धोखाधड़ी व आर्थिक अनियमितता से संबंधित केस और 2 नवंबर 2024 को खलीलाबाद कोतवाली में दर्ज मुकदमा शामिल है। तीसरे मामले में धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन और अवैध आर्थिक लाभ समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। पहले दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
शमसुलहुदा खान फिलहाल ब्रिटेन में रह रहा है। उसकी पत्नी सकलैन खातून, बेटा तौसीफ रजा और बहू नसरीन खलीलाबाद में रहते हैं। एसडीएम खलीलाबाद हृदयराम तिवारी ने बताया कि आदेश से हाईकोर्ट को अवगत कराया जाएगा। रिट याचिका संख्या 17032/2026 में हाईकोर्ट के निर्देशों और वहां से मिलने वाले अग्रिम आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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