राज्यपाल हरिभाऊ बागडे बोले- राजस्थान देश के कुल दूध उत्पादन में करीब 14.51% योगदान दे रहा है। उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर है। पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए नए-नए रिसर्च करने की जरूरत है। राज्यपाल ब
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पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
राज्यपाल ने कहा - पशुपालन देश और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण लोगों को लंबे समय तक रोजगार व आजीविका देने में पशुपालन की अहम भूमिका है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। इसमें गिर, थारपारकर, साहिवाल और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि देश के कुल दूध उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब 14.51% है। उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान दूसरे नंबर पर है। यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
डेयरी व्यवसाय से पशुपालकों को आर्थिक मजबूती
राज्यपाल ने कहा - डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना आज की बड़ी जरूरत है। इससे पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलती है। उन्होंने खेती और पशुपालन को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि किसान खेती के साथ दूध उत्पादन करके अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।
बेटियों से रिसर्च के क्षेत्र में आगे आने की अपील
राज्यपाल ने पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान और कृषि क्षेत्र में पढ़ाई कर रही बेटियों से शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। पशु चिकित्सा और कृषि के क्षेत्र में भी उन्हें अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है। अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों की बड़ी कंपनियां भारतीय युवा चला रहे हैं। यह देश की असली ताकत है।
2.55 करोड़ रुपए से बने कन्या छात्रावास का लोकार्पण
समारोह के दौरान राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी परिसर में 2.55 करोड़ रुपए की लागत से बने कन्या छात्रावास का लोकार्पण किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर के वर्चुअल टूर, पुस्तिका 'राजुवास अवलोकन', विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 और राजुवास न्यूजलेटर के नए अंक का भी लोकार्पण किया।
कृषि और पशुपालन में नई खोजों की अपार संभावनाएं
राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि और पशुपालन में पारंपरिक ज्ञान का बड़ा भंडार है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में नई खोजों की भी अपार संभावनाएं हैं।
देशी नस्लों के संरक्षण के लिए रिसर्च सेंटर
कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि राजुवास देश का ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसके पास राजस्थान में पाई जाने वाली लगभग सभी देशी नस्लों की गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अनुसंधान केंद्र हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत विश्वविद्यालय के संगठक महाविद्यालयों की ओर से विभिन्न गांवों में किए गए सामाजिक सरोकारों के कार्यों की जानकारी भी दी।
623 विद्यार्थियों को डिग्री, 42 को मिले मेडल
समारोह में कुल 623 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 462 विद्यार्थियों को स्नातक, 141 को स्नातकोत्तर और 20 को विद्या-वाचस्पति की उपाधि दी गई। वहीं, कुल 42 पदक प्रदान किए गए। इनमें 2 विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 36 को स्वर्ण पदक, 2 को रजत पदक और 2 को कांस्य पदक मिले। कुलसचिव पंकज शर्मा ने आभार जताया।
समारोह में ये भी रहे मौजूद
समारोह में खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र बाबू दुबे, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग, आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु डॉ. गोविंद सहाय शुक्ला और पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला सहित अन्य लोग मौजूद रहे।