Updated On: Jul 26, 2026 | 10:06 AM IST
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सार
Melghat Food Poisoning: मेलघाट की टीटंबा सरकारी आश्रमशाला में दूषित खाना खाने से 60 से अधिक छात्र फूड पॉइजनिंग के शिकार हो गए। बच्चों को धारणी उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मेलघाट फूडपॉइजनिंग केस (सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
Melghat Ashramshala Food Poisoning: महाराष्ट्र के अमरावती जिले का दुर्गम क्षेत्र मेलघाट एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह इसकी प्राकृतिक सुंदरता नहीं, बल्कि एक डराने वाली घटना है। धारणी तहसील के टीटंबा शासकीय आदिवासी आश्रमशाला में एक भीषण घटना घटी है, जहां 60 से अधिक विद्यार्थी कथित तौर पर अन्न विषाक्तता का शिकार हो गए हैं। इस खबर के सामने आते ही पूरे मेलघाट क्षेत्र और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों को दिए गए भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब होने का संदेह जताया जा रहा है। भोजन करने के कुछ ही समय बाद, एक के बाद एक कई विद्यार्थियों ने बेचैनी और स्वास्थ्य बिगड़ने की शिकायत की। देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या 60 के पार पहुंच गई। स्कूल प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए सभी प्रभावित विद्यार्थियों को धारणी उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के गलियारों में बच्चों की भीड़ और उनके चिंतित चेहरों ने स्थिति की गंभीरता को बयां किया। राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी विद्यार्थियों का उपचार जारी है और डॉक्टरों ने उनकी प्रकृति स्थिर बताई है।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा
जैसे ही यह खबर फैली, स्कूल परिसर और अस्पताल में अभिभावकों की भीड़ जमा हो गई। अपने बच्चों की जान जोखिम में देख पालकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस घटना ने आश्रमशालाओं में लागू सेंट्रल किचन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की लगातार अनदेखी की जा रही है। क्या यह महज एक लापरवाही है या बच्चों के भविष्य के साथ जानबूझकर किया गया खिलवाड़? इस सवाल ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।
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जांच के घेरे में लापरवाही
प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भोजन के सैंपल एकत्र कर उन्हें लैब में परीक्षण के लिए भेज दिया है। स्थानीय नागरिकों और पालकों की ओर से यह पुरजोर मांग की जा रही है कि विद्यार्थियों के भोजन में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
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मेलघाट की यह घटना केवल 60 बच्चों के बीमार होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी क्षेत्रों में दी जा रही बुनियादी सुविधाओं और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब पूरे मेलघाट सहित राज्य की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी या अगली किसी बड़ी अनहोनी तक इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
