August 5, 2026

भारत ने होर्मुज से कैसे निकाले अपने 60 जहाज, ऑपरेशन की एक-एक डिटेल आई सामने

Aug 05, 2026 08:19 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि भयंकर तनाव के बीच भी भारत का सामान लेकर जा रहे 60 मालवाहक जहाज होर्मुज की खाड़ी से पूरी तरह सुरक्षित गुजरने में सफल रहे। इसके अलावा संकटग्रस्त खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सकुशल वतन वापस लाया गया।

Hormuz Strait Ships

फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ता है।

हालिया खाड़ी संकट के दौरान जब 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था, तब भारत ने अपने मुस्तैद नौसैनिक और कूटनीतिक तंत्र के जरिए देश की सप्लाई चेन को टूटने से बचा लिया। सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि भयंकर तनाव के बीच भी भारत का सामान लेकर जा रहे 60 मालवाहक जहाज होर्मुज की खाड़ी से पूरी तरह सुरक्षित गुजरने में सफल रहे।

इसके अलावा संकटग्रस्त खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सकुशल वतन वापस लाया गया। संसद में दिए गए इस जवाब से पहली बार यह आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है कि इस बड़े क्षेत्रीय संकट से निपटने के लिए भारत ने पर्दे के पीछे कितना बड़ा ऑपरेशन चलाया।

भारत के लिए क्यों बेहद अहम है होर्मुज का रास्ता?

फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ता है। दुनिया भर में कच्चे तेल के कुल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

भारत के दृष्टिकोण से यहां थोड़ी सी भी हलचल बेहद संवेदनशील साबित होती है:

क्रूड ऑयल पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता है।

अर्थव्यवस्था पर सीधा असर: अगर होर्मुज रूट लंबे समय के लिए बंद होता, तो जहाजों का भाड़ा और बीमा प्रीमियम काफी बढ़ जाता, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों के दाम तेजी से उछल सकते थे।

ऐसे में 60 मर्चेंट जहाजों का सुरक्षित निकलना यह साबित करता है कि भारी तनाव के बावजूद भारत की तेल और सामान की आपूर्ति में कोई बड़ी रुकावट नहीं आई।

24 घंटे खुला रहा कंट्रोल रूम; आए 52,000 से ज्यादा कॉल और ईमेल

सुरक्षा के मोर्चे पर राहत के साथ-साथ इस अभियान का मानवीय पहलू भी काफी बड़ा था। कमर्शियल जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया।

एक समर्पित 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) लगातार सक्रिय रहा।

जोखिम वाले क्षेत्र में तैनात जहाजों को निर्देश दिया गया था कि वे वीएचएफ चैनल 16 (VHF Channel 16) के जरिये भारतीय नौसेना या मित्र देशों के युद्धपोतों से सीधा संपर्क बनाए रखें। इसके अलावा 'सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र' (IFC-IOR) और यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) को तुरंत सूचना देने का नियम बनाया गया था।

इस दौरान कंट्रोल रूम ने नाविकों, उनके परिजनों और शिपिंग कंपनियों के 15,771 फोन कॉल अटेंड किए और 36,499 ईमेल का जवाब देकर स्थिति को संभाला।

3,972 भारतीय नाविकों की घर वापसी

इंटरनेशनल मर्चेंट नेवी के बेड़े में भारतीय नाविकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा मानी जाती है। क्षेत्रीय संघर्ष के समय गैर-सैन्य वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात ये नाविक अक्सर अप्रत्यक्ष रूप से सीधे खतरे की जद में आ जाते हैं।

गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार ने विशेष अभियानों के जरिए 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला और भारत पहुंचाया। इस दौरान नाविकों के परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया और जहां जरूरत पड़ी, वहां उनके लिए विशेष काउंसलर्स की मदद भी दी गई।