July 20, 2026

संसद के मॉनसून सत्र में लाए जा रहे 6 में से दो विधेयक हैं ‘बवाल’

सबसे ज्यादा चर्चा तो ये है कि मोदी सरकार मॉनसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल लेकर आएगी, जिसके लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का इंतजाम उसने कर लिया है. लेकिन, आधिकारिक दस्तावेजों में सोमवार से शुरू हुए संसद सत्र में 6 विधेयकों को पेश किए जाने का ही जिक्र है. यदि परिसीमन बिल आता है, तब तो घमासान तय है, लेकिन जिन छह बिलों को सरकार ने पेश करने की घोषणा की है, वो भी कम विवादित नहीं हैं.

सबसे ज्यादा विवादित और तकरार की आशंका वाले दो विधेयक ये हैं:

1. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill, 2026)

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यह विधेयक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाले विदेशी फंड की निगरानी को बेहद सख्त बनाने के लिए लाया जा रहा है.

कंट्रोवर्सी क्या है?

इस विधेयक के तहत यदि किसी NGO का FCRA (विदेशी फंडिंग) लाइसेंस खत्म होता है, नवीनीकरण नहीं होता या रद्द होता है, तो उसकी विदेशी फंड से बनी संपत्तियों को सरकार द्वारा नियुक्त एक 'डेजिग्नेटेड अथॉरिटी' (Designated Authority) जब्त कर सकेगी. इसके लिए किसी न्यायिक आदेश या अदालत की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.

तकरार की आशंका क्यों है?

विपक्ष और सिविल सोसायटी का आरोप है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल उन NGO और धार्मिक या सामाजिक संस्थाओं (विशेषकर अल्पसंख्यक संगठनों) को निशाना बनाने के लिए कर रही है जो सरकार की नीतियों से असहमत हैं. विपक्ष इसे संस्थाओं को आर्थिक रूप से पंगु बनाने और मौलिक अधिकारों का हनन करने वाला कदम बताकर संसद में तीखा विरोध करेगा.

2. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 (Prevention of Insults to National Honour Amendment Bill, 2026)

यह विधेयक राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान या इसे गाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने के लिए लाया जा रहा है.

कंट्रोवर्सी क्या है?

इस कानून के पास होने के बाद वंदे मातरम को भी राष्ट्रगान (जन गण मन) और तिरंगे की तरह कानूनी संरक्षण मिल जाएगा और इसका अपमान करने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है. राजनीति और इतिहास को लेकर इस पर विवाद है. बीजेपी का आरोप है कि पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने तुष्टिकरण के कारण वंदे मातरम को उसका उचित स्थान नहीं दिया, जबकि इसके कुछ हिस्सों (धार्मिक प्रतीकों) को लेकर अल्पसंख्यक समुदायों के एक वर्ग को आपत्ति रही है.

तकरार की आशंका क्यों है?

विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति और देशभक्ति का सर्टिफिकेट थोपने का प्रयास बता रहा है. संसद में 'अपमान' की परिभाषा को लेकर तीखी बहस होना तय है, क्योंकि विपक्ष का मानना है कि इस कानून का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है.

अन्य विधेयकों पर क्या बहस है:

3. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: यह अध्यादेश की जगह लेगा. हालांकि, यह सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करने के लिए है, लेकिन विपक्ष वैश्विक आर्थिक मंदी और सरकार की राजकोषीय नीतियों को लेकर घेरेगा.

4. उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने वाले अध्यादेश को मंजूरी देने के लिए है. इस पर जजों की नियुक्ति (कोलेजियम बनाम सरकार) और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ सकती है.

5. जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: 2 साल से अधिक देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. विपक्ष इसे आम जनता के लिए कागजी कार्रवाई और परेशानी बढ़ाने वाला बताकर विरोध कर सकता है.

6. MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: यह छोटे उद्योगों के भुगतान में देरी के निवारण के लिए है. इस पर तकरार कम, लेकिन देश में छोटे व्यापारियों की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर बहस होने की उम्मीद है.

कुलमिलाकर, इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा टकराव FCRA (NGO फंडिंग) और वंदे मातरम (राष्ट्रीय सम्मान) विधेयकों को लेकर ही देखने को मिलेगा.

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