
घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुकिंग में गिरावट
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते एक बार फिर दुनिया भर में LPG की आपूर्ति दबाव में है. दरअसल, भारत के लिए यह स्थिति फिर से एक बार चुनौती लेकर आई है. दरअसल, देश अपनी करीब 60% एलपीजी की जरूरत आयात से पूरी करता है. इसमें भी अधिकांश हिस्सा पश्चिम एशिया से होकर होर्मुज स्ट्रेट से आता है. लेकिन इस बीच एक दिलचस्प खबर यह है कि भारत में घरेलू एलपीजी की रीफिल बुकिंग में रिकॉर्ड गिरावट आई है.
राज्यसभा में 27 जुलाई 2026 को मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम और नेचुरल गैस ने एक सवाल के जवाब में बताया कि इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को मिलाकर जनवरी में कुल 18.19 करोड़ घरेलू एलपीजी रीफिल बुकिंग मिली थीं. लेकिन जून तक यह आंकड़ा घटकर 12.80 करोड़ रह गया. जनवरी के मुकाबले जून में करीब 5.39 करोड़ कम बुकिंग हुई. प्रतिशत के हिसाब से देखें तो लगभग 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा गिरावट मार्च और अप्रैल के बीच देखने को मिली.
जनवरी 2026 में एलपीजी गैस की बुकिंग 18.19 करोड़ थी. फरवरी में यह गिरकर 16.65 करोड़ पर आ गया. हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत होते ही मार्च में यह बढ़कर फिर 18 करोड़ हो गया. लेकिन अप्रैल में इसमें रिकॉर्ड स्तर पर गिरावट देखी गई है. अप्रैल में यह गिरकर 13.24 करोड़ हो गया. फिर मई में 12.98 करोड़ तक पहुंच गया. जून में यह और गिरकर 12.80 करोड़ बुकिंग तक पहुंच गई.

क्या उज्ज्वला लाभार्थियों की रीफिल बुकिंग में भी आई गिरावट?
- जनवरी : 4.37 करोड़
- फरवरी : 4.05 करोड़
- मार्च : 3.69 करोड़
- अप्रैल : 3.04 करोड़
- मई : 2.84 करोड़
- जून : 2.90 करोड़
उज्जवला लाभार्थियों द्वारा बुकिंग में भी गिरावट आई है. जनवरी की तुलना में जून में करीब 1.47 करोड़ कम बुकिंग दर्ज हुई. इसका अर्थ यह हुआ, यानी लगभग 34 फीसदी की कमी आई. हालांकि जून में मई के मुकाबले हल्का सुधार जरूर देखने को मिला.
क्या इन वजहों से लोग घरेलू एलपीजी नहीं भर रहे हैं?
- अगर एलपीजी की कीमतों को देखे तो एक नजर में यह लग सकता है गैस महंगी होने से लोग कम सिलेंडर भरवा रहे हैं. लेकिन ना सरकारी आंकड़ों में और न ही सरकार की तरफ से ऐसी कोई वजह बताई गई है.हालांकि इतना जरूर है कि इसी बुकिंग की गिरावट अवधि के दौरान घरेलू एलपीजी की कीमतें बढ़ी हैं. 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये थी, जिसे 1 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 942 रुपये हो गई.वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये की लक्षित सब्सिडी के बाद 613 रुपये में एलपीजी गैस मिलती थी, जो अब 642 रुपये पड़ती है.
- फरवरी के अंतिम महीने में ईरान-अमेरिका युद्ध के शुरुआत के साथ ही भारत में एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर संकट की स्थिति सामने आई थी. ऐसे में इस संकट से बचने में ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी के साथ लकड़ी, गोबर के उपले. बायोगैस या अन्य पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसीलिए एलपीजी सिलेंडर लंबे समय तक चल रहे हैं. जल्द एलपीजी भरने की नौबत भी नहीं आ रही है.
- एलपीजी संकट के बीच शहरी क्षेत्रों में इंडक्शन कुकटॉप, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और इलेक्ट्रिक कुकिं का इस्तेमाल बढ़ा है. शहरी क्षेत्रों में पहले ही धीरे-धीरे लोग कुकिंग के लिए वैकल्पिक साधनों का उपयोग कर रहे थे. लेकिन एलपीजी संकट के बाद इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. अब गांवों में भी इसका चलन शुरू हो गया है. यह भी एक बड़ी वजह है कि एलपीजी की बुकिंग में गिरावट आई है.
- उज्जवला लाभार्थी को लेकर कहा जा रहा है, वे अपनी आजीविका ही किसी तरह से चला पा रहे हैं. ऐसी स्थिति में उनके लिए हर महीने एलपीजी रिफिल कराना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है. ऐसे में वे लकड़ी जैसे पारंपरिक साधनों का ही इस्तेमाल खाना पकाने के लिए कर रहे हैं.
सरकार ने क्या कहा?
भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी में कमी आने के लिए किसी भी संभावनाओं की पुष्टि करने वाला कोई सरकारी विश्लेषण संसद में पेश नहीं किया गया है. इसलिए इन्हें संभावित कारणों के रूप में ही देखा जाना चाहिए. सरकार का यह भी कहना है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है, भारतीय उपभोक्ता दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती रसोई गैस खरीद रहे हैं. सरकार ने यह भी कहा है किसार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये तक का अंडर-रिकवरी वहन कर रही हैं. वहीं, उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी भी दी जा रही है.

सचिन धर दुबे
सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.
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