August 13, 2026

बठिंडा पुलिस का कारनामा- 6 साल पहले मृत पर मुकदमा: इसी माह मिली थी जमीन विवाद की शिकायत, गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान खुली पोल - Bathinda News

पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन बठिंडा जिले के थाना भगत भाई का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने पूरी जांच व्यवस्था पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यहां की पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर

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अब इस अजीबोगरीब मामले को लेकर हर तरफ पुलिस विभाग की किरकिरी हो रही है और लोग पूछ रहे हैं कि क्या पुलिस अब 'परलोक' जाकर आरोपी को गिरफ्तार करेगी?

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, बठिंडा जिले के मेहराज गांव के रहने वाले बलविंदर सिंह ने अगस्त 2026 की शुरुआत में एसएसपी बठिंडा को जमीन विवाद से जुड़ी एक शिकायत सौंपी थी। इस शिकायत में सुखचैन सिंह, गुरमेज सिंह, चन्ना सिंह, बब्बा सिंह, चिंदा सिंह, जांगीर सिंह और गुरदेव सिंह सहित कुल सात लोगों को नामजद किया गया था। एसएसपी दफ्तर से यह शिकायत जांच के लिए डीएसपी रामपुरा फूल के पास भेजी गई।

'कागजी' जांच की खुली पोल: बिना तस्दीक किए दर्ज कर दिया केस

नियमों के मुताबिक, किसी भी शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से पहले पुलिस को प्रारंभिक जांच करनी होती है। थाना भगत भाई के एसएचओ सब-इंस्पेक्टर पर्वत सिंह का कहना है कि डीएसपी ने जांच के दौरान सातों नामजद व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने अपनी 'तेजतर्रार' बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई की और शिकायत को एफआईआर दर्ज करने के लिए थाने भेज दिया।

थाना प्रभारी ने भी बिना समय गंवाए डीएसपी की रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। लेकिन तमाशा तब शुरू हुआ, जब एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई (यानी गिरफ्तारी और बयान दर्ज करने) के लिए बढ़ी। तब जाकर पुलिस को पता चला कि लिस्ट में शामिल आरोपी जांगीर सिंह (पिता जगत सिंह) की मौत तो 6 साल पहले ही हो चुकी है!

पुलिसिया सिस्टम पर उठते सवाल: इस तीन पॉइंट से समझिए

  • कैसी 'उच्च स्तरीय' जांच थी? जब एसएचओ यह कह रहे हैं कि मामले की जांच उच्च स्तर (डीएसपी) से हुई थी, तो सवाल उठता है कि क्या डीएसपी साहब की टीम को इलाके में जाकर इतनी छोटी सी बात का भी पता नहीं चला कि जिस व्यक्ति को वे समन भेज रहे हैं, वह दुनिया में है ही नहीं?
  • क्या समन भूतों को तामील कराया जा रहा था? पुलिस का कहना है कि आरोपी जांच में शामिल नहीं हुए। अब सवाल यह है कि जो व्यक्ति 6 साल पहले स्वर्ग सिधार चुका है, वह पुलिस स्टेशन आकर अपनी हाजिरी कैसे लगाता?
  • क्या सिर्फ शिकायतकर्ता की कहानी पर आंखें बंद कर ली गईं? जमीन विवाद में अक्सर रंजशन पूरे परिवार या पूर्वजों के नाम लिखवा दिए जाते हैं। लेकिन पुलिस ने बिना किसी जमीनी वेरिफिकेशन या पंचायत से तस्दीक किए सीधे मृत व्यक्ति पर धाराएं लगा दीं।

अधिकारी का पल्ला झाड़ू रवैया

जब इस भारी लापरवाही को लेकर थाना भगत भाई के एसएचओ पर्वत सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बेहद सहजता से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि जांच तो उच्च अधिकारियों द्वारा की गई थी, उन्होंने तो बस आदेश मिलने पर केस दर्ज किया है।फिलहाल, इस 'अनोखी' एफआईआर की चर्चा पूरे बठिंडा और पंजाब में है। लोग कह रहे हैं कि आज के डिजिटल दौर में, जहां एक क्लिक पर इंसान का पूरा ब्योरा सामने आ जाता है, वहां बठिंडा पुलिस की यह कागजी और लापरवाह जांच पूरी कानून व्यवस्था का मजाक उड़ा रही है। अब देखना यह होगा कि इस घोर लापरवाही के लिए किस अधिकारी या कर्मचारी पर गाज गिरती है।