August 28, 2026

नेपाल में 538 पहुंचा मौत का आंकड़ा, 93 हजार लोग खतरे के मुहाने पर; 290 भारतीयों का सुराग नहीं

काठमांडू (उत्तम हिन्दू न्यूज): कुदरत के भयानक कहर से पड़ोसी देश नेपाल में हाहाकार मचा हुआ है। विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे देश में तबाही की ऐसी खौफनाक दास्तान लिखी है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस महाप्रलय में अब तक 538 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग मलबे और सैलाब के बीच लापता हैं। भारत के लिए भी यह संकट बेहद चिंताजनक हो चला है, क्योंकि नेपाल में मौजूद 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है और उनकी सलामती के लिए युद्धस्तर पर तलाश जारी है।

त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसी थीं 350 सांसें, सेना का सफल ऑपरेशन
इस भयानक त्रासदी के बीच नेपाली सेना ने एक हैरतअंगेज और जांबाज रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देकर 350 जिंदगियां बचा ली हैं। त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल में जलस्तर बढ़ने के बाद 350 मजदूर और कर्मचारी अंदर ही फंस गए थे, जिनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल थे। सेना के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर टनल के भीतर घंटों तक चले जोखिम भरे अभियान के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

93 हजार लोगों पर आफत, ‘सेकेंडरी फ्लड’ की डरावनी चेतावनी
बाढ़ के बाद पैदा हुए मानवीय संकट से हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। रेड क्रॉस की रिपोर्ट के अनुसार, 93,000 से अधिक लोग इस आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल भोजन, दवाइयों और शेल्टर की दरकार है। इसके साथ ही रेड क्रॉस ने एक और दिल दहला देने वाला अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में ‘सेकेंडरी फ्लड’ (दूसरी बार बाढ़) आने का प्रचंड खतरा मंडरा रहा है, जिसको लेकर ग्राउंड पर मौजूद एजेंसियों को अत्यधिक चौकस रहने की हिदायत दी गई है।

सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई धड़कनें, नदी रुकने से बन गई ‘मौत की झील’
नेपाल पर अभी आफत के बादल छंटे नहीं हैं। ‘प्लेनेट लैब्स’ और ‘लैंडसैट’ की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण ने आपदा प्रबंधन टीमों की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर लेंडे नदी का प्राकृतिक बहाव भारी मलबे की वजह से पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। नदी का रास्ता रुकने से उस क्षेत्र में एक विशालकाय अस्थाई झील बन गई है। नेपाल सरकार ने हाई अलर्ट जारी करते हुए आगाह किया है कि अगर यह प्राकृतिक बैरियर टूटा, तो निचले इलाकों में पानी का ऐसा सैलाब आएगा जो भारी तबाही मचा सकता है।

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