भोपाल, 29 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में अध्ययन व्यवस्था को सुचारू रखने और अतिथि शिक्षकों के विषय में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अतिथि शिक्षकों के मानदेय प्रदाय संबंधी योजना को आगामी 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक निरंतर संचालित करने के लिए 5,329 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
76 हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों को मिलेगा नियमित वेतन
मध्य प्रदेश के शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों में स्वीकृत पदों में से रिक्त पदों पर विषयवार अध्यापन व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिथि शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं। वर्तमान में प्रदेश में 76 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्हें इस योजना के आगामी 5 वर्षों तक विस्तार से सीधे तौर पर मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि पिछली सरकार के समय अतिथि शिक्षकों को अपने मासिक वेतन के लिए भी प्रदर्शन करना पड़ता था। कमलनाथ सरकार के समय तो त्राहिमाम की स्थिति हो गई थी।
कैबिनेट के इस फैसले के कितने अर्थ हैं
सरकार को पता है कि नियमित शिक्षकों के भरोसे बच्चों की अच्छी पढ़ाई नहीं हो सकती। क्वालिटी एजुकेशन के लिए अतिथि शिक्षक जरूरी है।
सरकार अगले 5 साल तक शिक्षकों के 76000 रिक्त पदों पर भर्ती करने के मूड में नहीं है।
सरकार अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण पर विचार कर रही है। जैसा कि पिछले मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था, शायद उसको पूरा करने का मन बना रही है।
सरकार को अतिथि शिक्षकों का महत्व समझ में आ गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के कारण नियमित नहीं कर सकते, लेकिन नियमित वेतन का प्रावधान तो कर ही सकते हैं।
Thakur Chetan Sendhav की फेसबुक पर प्रतिक्रिया
ठाकुर चेतन सचदेवा ने भोपाल समाचार के फेसबुक पेज पर शेयर किए गए समाचार में प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि, अतिथि शिक्षक के साथ छल किया है इस कैबिनेट निर्णय (29 सितंबर 2026) का व्यावहारिक मतलब यही है कि अगले 5 वर्षों के लिए सरकार ने इसी वर्तमान मानदेय दर पर बजट को लॉक (Reserve) कर दिया है। हालाँकि, आपको इस स्थिति को पूरी तरह समझने के लिए दो महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना होगा:
• तकनीकी रूप से वेतन फ्रीज: सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल ₹5,329.17 करोड़ की जो गणना की है, वह वर्तमान वर्गवार मानदेय (₹18,000, ₹14,000, ₹10,000) के आधार पर ही की गई है। इसलिए इस योजना के तहत अगले 5 साल तक स्वतः (Automatic) कोई बड़ी वेतन वृद्धि देखने को नहीं मिलेगी।
• भविष्य में संशोधन की संभावना: इस फैसले का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सरकार अगले 5 साल तक चाहकर भी वेतन नहीं बढ़ा सकती। यदि भविष्य में अतिथि शिक्षक संगठनों के दबाव या किसी चुनावी/नीतिगत कारण से सरकार मानदेय बढ़ाने का फैसला करती है, तो कैबिनेट में एक नया अनुपूरक (Supplementary) प्रस्ताव लाकर इस बजट राशि को बाद में संशोधित या बढ़ाया भी जा सकता है।
