September 24, 2026

लोन चुकाने के बाद भी बैंक ने नहीं दिए कागज? हर दिन मिलेंगे 5000 रुपये, जानिए पूरा प्रोसेस

नई दिल्ली(उत्तम हिन्दू न्यूज)- होम लोन की आखिरी EMI चुकाने के बाद हर ग्राहक राहत महसूस करता है। लेकिन लोन पूरी तरह खत्म होने के बाद भी एक जरूरी काम बाकी रहता है—बैंक से प्रॉपर्टी के ओरिजिनल दस्तावेज वापस लेना और उस पर दर्ज बैंक का चार्ज हटवाना। इस प्रक्रिया में देरी न हो, इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और संबंधित वित्तीय संस्थानों के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की है।

30 दिन के भीतर लौटाने होंगे ओरिजिनल कागज

RBI के सितंबर 2023 के निर्देशों के मुताबिक, लोन का पूरा भुगतान या सेटलमेंट होने के बाद संबंधित रेगुलेटेड संस्था को 30 दिनों के भीतर ग्राहक के सभी मूल चल-अचल संपत्ति दस्तावेज वापस करने होंगे। साथ ही, जहां लागू हो, संबंधित रजिस्ट्री में दर्ज चार्ज को भी हटाना होगा। ये निर्देश उन मामलों पर लागू हैं जिनमें दस्तावेज लौटाने की तारीख 1 दिसंबर 2023 या उसके बाद आती है।

इन नियमों के दायरे में बैंक और कई तरह की विनियमित संस्थाएं आती हैं, जिनमें कमर्शियल बैंक, सहकारी बैंक और NBFC/HFC शामिल हैं।

ग्राहक अपनी सुविधा से ले सकता है दस्तावेज

RBI के अनुसार, ग्राहक को यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वह अपने मूल दस्तावेज उसी बैंक शाखा या आउटलेट से प्राप्त करे जहां उसका लोन अकाउंट संचालित हुआ था या उस संस्था के किसी दूसरे तय कार्यालय से, जहां दस्तावेज उपलब्ध हैं।

लोन की मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों में यह भी बताया जाना चाहिए कि लोन पूरा होने के बाद ओरिजिनल कागजात कहां और किस समय सीमा में वापस किए जाएंगे।

30 दिन से ज्यादा देरी हुई तो ₹5,000 रोज का मुआवजा

RBI के नियमों में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान मुआवजे को लेकर है। अगर लोन पूरी तरह चुकाने के बाद 30 दिन की तय अवधि से आगे दस्तावेज लौटाने में देरी होती है और देरी के लिए बैंक या संबंधित संस्था जिम्मेदार है, तो उसे ग्राहक को हर दिन ₹5,000 का मुआवजा देना होगा। संस्था को देरी का कारण भी ग्राहक को बताना होगा।

मसलन, अगर जिम्मेदार संस्था ने दस्तावेज लौटाने में 10 दिन की अतिरिक्त देरी की, तो नियम के अनुसार मुआवजा ₹50,000 बन सकता है।

बैंक की कस्टडी में कागज खो गए तो क्या होगा?

अगर बैंक या संबंधित संस्था की कस्टडी में रखे मूल दस्तावेज खो जाते हैं या उन्हें नुकसान पहुंचता है, तो जिम्मेदारी भी संस्था की होगी। RBI के निर्देशों के अनुसार, उसे ग्राहक को डुप्लीकेट या प्रमाणित दस्तावेज हासिल करने में मदद करनी होगी और इससे जुड़े खर्च को खुद वहन करना होगा।

ऐसे मामले में संस्था को दस्तावेज हासिल करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त 30 दिन मिलते हैं। यानी कुल 60 दिन की अवधि के बाद ही देरी का ₹5,000 प्रतिदिन वाला मुआवजा लागू होगा।

लोन खत्म होते ही ग्राहक क्या करे?

लोन की आखिरी EMI जमा होने के बाद केवल बैंक से ‘लोन क्लोजर’ की जानकारी लेना पर्याप्त नहीं है। ग्राहक को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि:

  • सभी ओरिजिनल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट वापस मिल गए हैं।
  • प्रॉपर्टी पर बैंक का चार्ज हट गया है।
  • लोन अकाउंट बंद होने का प्रमाण सुरक्षित है।
  • बैंक से मिले सभी पत्र और रसीदें संभालकर रखी गई हैं।

बैंक दस्तावेज न लौटाए तो शिकायत कैसे करें?

अगर तय अवधि के बाद भी दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो सबसे पहले बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था में लिखित शिकायत दर्ज करनी चाहिए। शिकायत की कॉपी, लोन क्लोजर से जुड़े दस्तावेज और बैंक के साथ हुए पत्राचार को सुरक्षित रखना उपयोगी रहेगा।

अगर संस्था के स्तर पर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो ग्राहक RBI की शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत आगे शिकायत कर सकता है। RBI की यह व्यवस्था ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध कराती है।

यानी होम लोन की आखिरी EMI भरना कहानी का अंत नहीं है। असली राहत तब मिलेगी, जब आपके प्रॉपर्टी के मूल कागज सुरक्षित रूप से वापस मिल जाएं और बैंक का संबंधित चार्ज भी हटा दिया जाए।

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