September 16, 2026

50 साल में कैसे बदली देश के पीएम की कारें? देखें पूरी लिस्ट

हमारे देश में सभी प्रधानमंत्री का काफिला हमेशा से ही चर्चे में रहा है. क्योंकि, जब भी कोई प्रधानमंत्री किसी दौरे पर निकलते हैं लोगों की निगाहें काफिले में कौन-कौन गाड़ियां रहती हैं इस पर भी नजर बनी रहती है. अगर बात करें पिछले 50 वर्षों की तो देश के प्रधानमंत्री की गाड़ियों का सफर बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक रहा है. 1970 और 80 के दशक की साधारण दिखने वाली स्वदेशी एम्बेसडर से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया की सबसे सुरक्षित, हाई-टेक और आर्मर्ड गाड़ियों तक पहुंच चुका है.

क्योंकि, समय के साथ बदलती सुरक्षा चुनौतियों, वीआईपी प्रोटोकॉल और एडवांस ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी ने पीएम के काफ़िले की रूपरेखा पूरी तरह बदल दी है. पहले के दौर की सादगी से लेकर आज के आधुनिक युग में बुलेटप्रूफ और ब्लास्ट-प्रूफ फीचर्स से लैस लग्जरी गाड़ियों का यह बदलाव बताता है कि भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को कितना मजबूत किया है. तो चलिए आइए जानते हैं 50 सालों में भारतीय प्रधानमंत्रियों की गाड़ियों की पूरी लिस्ट के बारे में.

एम्बेसडर का रहा है ऐतिहासिक दौर

आपको जानकारी दें दे कि, 1970 और 80 के दशक में हिंदुस्तान मोटर्स की एम्बेसडर कार भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी पहचान हुआ करती थी. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के शुरुआती कार्यकाल में सफेद रंग की एम्बेसडर ही आधिकारिक सवारी थी.

उस दौर में यह गाड़ी न सिर्फ पावर के लिए जानी जाती थी बल्कि इसमें भारतीयता की झलक भी मिलती थी. हालांकि, शुरुआती दिनों में ये गाड़ियां बहुत ज्यादा हाई-टेक या बुलेटप्रूफ नहीं होती थीं. सुरक्षा के लिहाज से इनमें सिर्फ बुनियादी बदलाव ही किए जाते थे लेकिन इसकी मजबूती और विशाल केबिन के कारण इसे काफी पसंद किया जाता था.


50 साल में कैसे बदली देश के पीएम की कारें? देखें पूरी लिस्ट

AI Generated Image

यह भी पढ़ें: ये हैं सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली टॉप-5 एसयूवी कारें, देख लें लिस्ट

सुरक्षा की चिंता ने बदला ट्रेंड

जिसके बाद 90 के दशक की शुरुआत में देश में आतंकवाद और सुरक्षा खतरों के बढ़ने के बाद पीएम की गाड़ियों की सुरक्षा पर गंभीरता से ध्यान दिया जाने लगा. राजीव गांधी के बाद और पी.वी. नरसिम्हा राव व अटल बिहारी वाजपेयी के शुरुआती दौर में एम्बेसडर कारों को खास तौर पर आर्मर्ड यानी बुलेटप्रूफ बनाया गया.

जिसमें कार के शीशों और बॉडी पैनल को मजबूत स्टील से लैस किया गया ताकि किसी भी हमले का सामना किया जा सके. यह वह दौर था जब विदेशी गाड़ियों के बजाय स्वदेशी एम्बेसडर को ही अपडेट करके इस्तेमाल किया जाता रहा.

2000 के बाद बदल गया गाड़ियों का दौर

वहीं, 2000 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान काफ़िले में बड़ा बदलाव आया. सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर पुरानी एम्बेसडर को हटाकर जर्मन तकनीक वाली बीएमडब्ल्यू 7-सीरीज और मर्सिडीज-बेंज गाड़ियों को शामिल किया गया.

इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह के 10 साल के कार्यकाल में बीएमडब्ल्यू 7-सीरीज ही पीएम की आधिकारिक कार रही. ये गाड़ियां न सिर्फ तेज रफ्तार पकड़ सकती थीं बल्कि इनमें आधुनिक बुलेटप्रूफ ग्लास, रन-फ्लैट टायर्स और ग्रेनेड हमले से बचाने वाले फीचर्स भी मौजूद थे.


50 साल में कैसे बदली देश के पीएम की कारें? देखें पूरी लिस्ट

AI Generated Image

अब है मॉडर्न हाई-टेक सुरक्षा का युग

लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में पीएम के काफ़िले को सुरक्षा के मामले में दुनिया के सबसे ऊचें स्तर पर पहुंचा दिया गया. शुरुआत में बीएमडब्ल्यू और महिंद्रा स्कॉर्पियो/रेंज रोवर का इस्तेमाल करने के बाद काफ़िले में मर्सिडीज-मायबैक S650 गार्ड शामिल की गई.

आपको बता दें कि, ये सभी गाड़ियां VR10 लेवल की सुरक्षा के साथ आती है जो एके-47 की गोलियों, बड़े धमाकों और यहां तक कि गैस हमलों से भी बचा सकती है. हमारे देश में हुए इन बदलावों ने बताया है कि, कैसे साधारण एम्बेसडर से शुरू हुई यात्रा आज दुनिया की सबसे सुरक्षित कार तक पहुंच चुकी है.

यह भी पढ़ें: Mahindra की SUV खरीदनी है, ये हैं सबसे सस्ते Options