Updated: Monday, August 31, 2026, 21:04 [IST]
PM Modi Putin Meeting: एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के\ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 50 मिनट की इस मुलाकात में भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खास बात यह है कि पुतिन अगले महीने भारत के दौरे पर आने वाले हैं।
ऐसे समय में हुई इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, जब रूस के साथ रिश्तों को लेकर भारत पर लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही।
पुतिन से मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
पीएम मोदी और पुतिन की बैठक में भारत-रूस संबंधों के लगभग सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष, उर्वरक और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच साझेदारी को नई दिशा देने और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत हुई। पुतिन की अगले महीने प्रस्तावित भारत यात्रा को देखते हुए यह मुलाकात और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूक्रेन युद्ध पर मोदी ने पुतिन के सामने क्या कहा?
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने साफ किया कि भारत युद्ध के समाधान के लिए शांतिपूर्ण प्रयासों का समर्थन करता है। भारत लंबे समय से बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने की बात करता रहा है। ऐसे में पुतिन के सामने पीएम मोदी का यह संदेश महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब रूस के साथ भारत के रिश्तों को लेकर पश्चिमी देशों की तरफ से लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है।
तेल, गैस और उर्वरक पर रूस के साथ क्या बात हुई?
रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा अहम रही। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं ने तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर सहयोग बनाए रखने पर बात की। भारत के लिए रूस से ऊर्जा आयात महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जा सकता है।
रक्षा क्षेत्र में रूस से और मजबूत होगी दोस्ती?
रक्षा भारत और रूस के रिश्तों का सबसे पुराना और महत्वपूर्ण आधार रहा है। भारतीय सैन्य बल आज भी बड़ी संख्या में रूसी मूल के हथियारों और सैन्य प्रणालियों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बैठक में सैन्य उपकरणों की सप्लाई, स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। दोनों देश अब केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इससे भारत-रूस रक्षा साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है।
व्यापार बढ़ा, लेकिन भारत की चिंता क्या है?
भारत और रूस के बीच कारोबार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। हालांकि इस व्यापार में असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। रूस से भारत की खरीद काफी अधिक है, जबकि भारतीय उत्पादों का रूस को निर्यात अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित बनाने पर चर्चा महत्वपूर्ण है। भारतीय उत्पादों के रूस में निर्यात को बढ़ाने, निवेश बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई है।
पुतिन के बाद ईरान के राष्ट्रपति से भी मोदी की मुलाकात
पुतिन से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-ईरान की पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ व्यापार का दायरा बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहता है। पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन जारी रखने की बात कही।