Updated On: Aug 01, 2026 | 09:06 AM IST
विज्ञापन
सार
Junk Food Ban: महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री, विज्ञापन और मुफ्त वितरण पर रोक लगा दी है। यह नियम राज्य के करीब 2 करोड़ छात्रों पर लागू होगा।

महाराष्ट्र, जंक फूड,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
विस्तार
Maharashtra School Food Policy: बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने स्कूल परिसर के 50 मीटर दायरे में वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले प्रक्रियागत या पैक्ड खाद्य पदार्थों की बिक्री, विज्ञापन और मुफ्त वितरण पर प्रतिबंध लगाने का उचित निर्णय लिया है। खाद्य व औषधि प्रशासन द्वारा जारी यह आदेश राज्य के 1.08 लाख सरकारी, अनुदान प्राप्त व निजी सकूलों के लगभग 2 करोड़ छात्रों पर लागू होगा।
स्कूल कैंटीन, छात्रावास के भोजनालय, मिड डे मील किचन तथा खाद्य प्रदाता भी इसके अधीन आएंगे। ऐसे समय जब बच्चों में खानपान की गलत आदतों की वजह से मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़, रही हैं तब यह नीति स्कूलों को पोषक आहार तथा स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देती है।
स्कूलों के पास जंक फूड पर रोक, बच्चों की सेहत पर फोकस
आम तौर पर बच्चे चटपटे खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों से भी प्रभावित होते हैं और स्कूल के निकट बिकनेवाले चिप्स, मैगी, चॉकलेट और मीठे पेय पदार्थों सहित जंक फूड सेवन के आदी हो जाते हैं। उनका मन इन चीजों को खरीदने व खाने के लिए प्रेरित करता है। इस तरह की रोक से शिक्षकों व पालकों को भी मदद मिलेगी जो बच्चों को फास्ट फूड से दूर रखना चाहते हैं।
सम्बंधित ख़बरें
स्कूल की कैन्टीन को भी सतर्कता बरतनी पड़ेगी। सरकार की यह नीति खान-पान को लेकर सुरक्षित व पोषक वातावरण बनाने को लेकर है। दुनिया भर के बच्चों में जीवनशैली से जुड़े रोग बढ़ रहे हैं।
पोषण विशेषज्ञों ने बार-बार चेतावनी दी है कि अधिक नमक, शक्कर, वसा वाले खाद्य पदार्थों से स्थूलता, हृदय रोग व असाध्य बीमारियां बढ़ती हैं। यद्यपि सरकार ने यह आदेश तो जारी कर दिया है लेकिन घनी आबादी के क्षेत्र में 50 मीटर वाला प्रतिबंध लगाना कठिन होगा।
जंक फूड पर रोक के साथ बच्चों में पौष्टिक आहार की आदत जरूरी
ऐसी अनेक दूकानों और विक्रेताओं पर निगरानी रखनी पड़ेगी। इनके लिए अधिक प्रशासकीय संसाधनों तथा स्थानिक प्रशासन से सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी। स्कूलों से भी सहयोग लेना होगा। तभी उचित बदलाव लाया जा सकेगा। अभी भी कई स्कूलों में घर से सब्जी, दाल-चावल, चपाती वाला टिफिन लाने की बच्चों पर बाध्यता है ताकि वे समोसा, पिज्जा आदि न खाएं।
यह भी पढ़ें:-नवभारत विशेष: होर्मुज का विकल्प भारत के लिए कितना खास ? बदल रही खाड़ी की ऊर्जा रणनीति
जंक फूड से स्वास्थ्य को होनेवाले नुकसान के प्रति भी बच्चों को जागरूक करना शिक्षकों का कर्तव्य है। पोषणयुक्त खाद्यपदार्थ शरीर में ऊर्जा के साथ जरूरी विटामिन व खनिज भी देते हैं जबकि शीतपेय और फास्टफूड सिर्फ कैलोरी बढ़ाने का काम करते हैं।
हरी सब्जियां, दूध, दही, पनीर, चना, मूंगफली, मेवा, मिलेट्स आदि के सेवन को बचपन से ही प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बच्चों में उचित खाद्य सेवन की आदतें डालने के लिए शिक्षकों व पालकों दोनों के सहयोग की आवश्यकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
