August 29, 2026

5 हजार रुपये का Damage, Insurance Claim करना सही या खुद भरें पैसा?

अब सड़कों पर पहले के मुकाबले गाड़ियों की भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई है जिसके चलते अब लोगों के कारों में छोटे-मोटे स्क्रैच पड़ ही जाते हैं. अक्सर, सामने वाली की गलती के चलते आपकी कार टक्कर खा जाती है और डेंट आ जाता है. हमारे देश में कारों पर छोटे-मोटे डेंट और स्क्रैच आना बेहद ही आम बात है. जैसे ही लोगों के कार में कोई डेंट या स्क्रैच आता है जो काफी छोटे अमाउंट तक 5000 रुपये में रहता है तो लोग उसे इंश्योरेंस से ठीक कराना पसंद करते हैं.

लेकिन आपको बता दें कि, इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स और जानकारों की मानें तो हर छोटे-मोटे नुकसान पर क्लेम फाइल करना एक समझदारी भरा फैसला नहीं होता. क्लेम करने से पहले आपको कंपल्सरी डिडक्टिबल और नो क्लेम बोनस के गणित को समझना बेहद जरूरी है. अगर आप भी 5,000 रुपये के नुकसान का हिसाब-किताब ध्यान से लगाएंगे तो पाएंगे कि क्लेम लेने के बजाय अपनी जेब से पैसे भरकर मरम्मत कराना ही आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित होगा. चलिए जानतें हैं कैसे?

नो क्लेम बोनस का समझें गणित

आपको बता दें कि, अगर आप पूरे साल अपनी गाड़ी का कोई भी इंश्योरेंस क्लेम नहीं लेते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी आपको नो क्लेम बोनस के रूप में अगले साल प्रीमियम पर भारी डिस्काउंट देती है. यह डिस्काउंट 20% से शुरू होकर लगातार 5 साल तक क्लेम न लेने पर सीधे 50% तक पहुंच जाता है.

उदाहरण देकर आपको बताएं तो अगर आपका सालाना ओन-डैमेज प्रीमियम 15,000 रुपये आता है और आपको 50% NCB मिल रहा है तो आपकी सीधी बचत 7,500 रुपये की होती है. अगर आप 5,000 रुपये का छोटा क्लेम ले लेते हैं तो आपका NCB तुरंत जीरो हो जाएगा और अगले साल आपको पूरा प्रीमियम भरना पड़ेगा. यानी 5,000 रुपये पाने के चक्कर में आप 7,500 रुपये का डिस्काउंट गंवा बैठेंगे.


5 हजार रुपये का Damage, Insurance Claim करना सही या खुद भरें पैसा?

Image Credit- AI Generated

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कंपल्सरी डिडक्टिबल का झंझट

जानकारी के लिए बता दें कि, कार इंश्योरेंस में IRDAI के नियमानुसार एक कंपल्सरी डिडक्टिबल की शर्त होती है. 1500cc तक की कारों के लिए हर क्लेम पर आपको अपनी जेब से कम से कम 1,000 रुपये खुद देने ही पड़ते हैं चाहे आपके पास जीरो डेप पॉलिसी ही क्यों न हो.

वहीं, अगर कुल मरम्मत का खर्च 5,000 रुपये है तो उसमें से 1,000 रुपये डिडक्टिबल कट जाएंगे और फाइलिंग चार्ज जैसे कुछ अन्य खर्चे मिलाकर बीमा कंपनी आपको सिर्फ 3,500 से 4,000 रुपये का ही भुगतान करेगी. इतने कम पैसे के लिए अपना बड़ा NCB दांव पर लगाना सही फैसला नहीं माना जाता.

क्या पड़ता है प्रीमियम पर असर?

बता दें कि, बार-बार या छोटे-छोटे क्लेम फाइल करने से आपकी इंश्योरेंस हिस्ट्री पर भी नेगेटिव असर पड़ता है. बीमा कंपनियां ऐसे ग्राहकों को हाई रिस्क की कैटेगरी में डाल देती हैं जो छोटी-छोटी बातों पर क्लेम फाइल करते हैं.

जिसकी वजह से अगले साल पॉलिसी रिन्यू कराते समय कंपनी आपसे ज्यादा प्रीमियम वसूल सकती है या फिर आपको मिलने वाले दूसरे एड-ऑन कवर्स पर मिलने वाली छूट खत्म कर सकती है. इसलिए एक समझदार कार मालिक हमेशा अपनी क्लेम हिस्ट्री को साफ-सुथरा रखने की कोशिश करता है ताकि जरूरत पड़ने पर बड़े हादसों में पूरा फायदा मिल सके.


5 हजार रुपये का Damage, Insurance Claim करना सही या खुद भरें पैसा?

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कब जेब से दें पैसा?

आपको बता दें कि, अगर आपकी गाड़ी के नुकसान की रिपेयरिंग का खर्च 5,000 से 8,000 रुपये के बीच है और आपका NCB डिस्काउंट बचा हुआ है तो क्लेम न फाइल करके खुद जेब से भुगतान करना ही समझदारी है. लोकल गैरेज से छोटा-मोटा डेंट-पेंट का काम सस्ते में हो जाता है.

लेकिन अगर नुकसान बड़ा है जैसे रिपेयरिंग का बिल 15,000 से 20,000 रुपये या उससे ज्यादा बन रहा है या फिर गाड़ी का इंजन, बोनट या बड़ा हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है तभी इंश्योरेंस क्लेम फाइल करने का कदम उठाना चाहिए. छोटा नुकसान खुद भुगतें और बड़ा क्लेम भविष्य के लिए संभालकर रखें.

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