फरीदाबाद में ₹5.84 करोड़ की लाइब्रेरी पर ताला: BJP की गुटबाजी का अनोखा रिबन ड्रामा, ढाई घंटे में 2 बार उद्घाटन; सुविधाएं नहीं - Faridabad News
फरीदाबाद13 घंटे पहले
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फरीदाबाद में 5.84 करोड़ की अटल लाइब्रेरी उद्घाटन के बाद भी लगा ताला।
फरीदाबाद शहर के सेक्टर-12 टाउन पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में करीब 5.84 करोड़ रुपए खर्च कर बनाई गई हाईटेक लाइब्रेरी इन दिनों खुद ही इंतजार कर रही है—कब उसके दरवाजे खुलेंगे और कब विद्यार्थी यहां बैठकर पढ़ सकेंगे। दिसंबर 2025 में बड़े राजनीतिक तामझाम के बीच इसका उद्घाटन हुआ था।
खास बात यह रही कि एक ही दिन करीब 2 घंटे के अंतराल में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में दो बार इसका रिबन काटा गया, लेकिन उद्घाटन के बाद से लाइब्रेरी के दरवाजे पर ताला ही लटका है। लाइब्रेरी शुरू नहीं होने को लेकर जब डीसी आयुष सिन्हा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले की जानकारी ले रहे हैं।
पूरी जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और लाइब्रेरी शुरू नहीं होने के कारणों का भी पता लगाया जाएगा। लाइब्रेरी को लेकर कैबिनेट मंत्री विपुय गोयल और केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर से फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों से संपर्क नही हो सका।
हाईटेक लाइब्रेरी का उद्घाटन बोर्ड।
कंप्यूटर लगे, लेकिन ऑपरेटर नहीं; रैक हैं, किताबें नहीं
लाइब्रेरी को आधुनिक स्टडी सेंटर के तौर पर तैयार किया गया है। यहां करीब 200 विद्यार्थी एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। भवन में कंप्यूटर लगाए गए हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए अभी स्टाफ नहीं है। किताबें रखने के लिए रैक तैयार हैं, लेकिन रैक में किताबें नजर नहीं आतीं।
लाइब्रेरी में ई-लाइब्रेरी, हाई-स्पीड इंटरनेट, रीडिंग हॉल, ग्रुप डिस्कशन चैंबर, ऑडियो-विजुअल और मल्टीमीडिया रूम जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। डिजिटल कंटेंट और ई-बुक्स के साथ फायर फाइटिंग सिस्टम भी लगाया गया है। ऑडिटोरियम, मेजेनाइन फ्लोर और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं भी तैयार की गई हैं। यानी भवन में पढ़ाई के लिए इंतजाम तो पूरे हैं, लेकिन पढ़ाने-पढ़ने वालों का इंतजाम अधूरा है।
भवन तैयार, जिम्मेदारी का बंटवारा अधूरा
लाइब्रेरी भवन की देखरेख की जिम्मेदारी एचएसवीपी को दी गई है। एचएसवीपी के एसई संदीप दहिया के अनुसार उनके पास फिलहाल भवन की देखभाल की जिम्मेदारी है। लाइब्रेरियन, किताबों और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को करनी है। उनका कहना है कि अभी लाइब्रेरी में काम करने के लिए स्टाफ नहीं मिला है। इसके लिए प्रशासन की ओर से कई विश्वविद्यालयों से संपर्क किया जा रहा है।
फिलहाल भवन और उसमें रखे सामान की सुरक्षा के लिए एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात है।
लाइब्रेरी में रखा फर्नीचर और दूसरा सामान।
25 दिसंबर 2018 को रखा गया था नींव का पत्थर
इस लाइब्रेरी की कहानी करीब आठ साल पुरानी है। 25 दिसंबर 2018 को तत्कालीन उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने इसका शिलान्यास किया था। उस समय निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 1.58 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद सितंबर 2019 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। समय के साथ भवन की लागत बढ़कर करीब 3.85 करोड़ रुपए हो गई।
इसके बाद ई-लाइब्रेरी और आधुनिक सुविधाओं पर CSR के तहत करीब 1.99 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस तरह भवन और ई-लाइब्रेरी पर कुल खर्च करीब 5.84 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
करोड़ों की लाइब्रेरी, उद्घाटन के बाद भी लगा ताला
28 दिसंबर 2025 को आखिरकार वह दिन आया, जिसका कई साल से इंतजार था। लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ, लेकिन यह उद्घाटन खुद लाइब्रेरी से ज्यादा फरीदाबाद की भाजपा राजनीति को लेकर चर्चा में आ गया। एक ही दिन करीब ढाई घंटे के अंतराल में दो कार्यक्रम हुए और दोनों में लाइब्रेरी का रिबन काटा गया।
28 दिसबंर को पहले राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने मंत्री विपुल और राजेश के साथ रिबन काटा था।
पहले विपुल गोयल गुट ने काटा रिबन
28 दिसंबर को राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर फरीदाबाद पहुंचे थे। उन्होंने सेक्टर-16 स्थित मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय पर उनके और राज्य मंत्री राजेश नागर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का आखिरी एपिसोड सुना। इसके बाद करीब साढ़े 12 बजे सुरेंद्र नागर, विपुल गोयल और राजेश नागर सेक्टर-12 टाउन पार्क पहुंचे और लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। यहां तक सब सामान्य था, लेकिन कहानी इसके बाद बदली।
2 घंटे बाद मंत्री गुर्जर पहुंचे, फिर कटा रिबन
पहले उद्घाटन के करीब 2 घंटे बाद केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपने समर्थकों के साथ टाउन पार्क पहुंचे। उनके साथ बड़खल विधायक धनेश अदलखा, एनआईटी विधायक सतीश फागना, मेयर प्रवीण बत्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल समेत कई नेता मौजूद थे। कृष्णपाल गुर्जर के पहुंचने से पहले दोबारा रिबन लगाया गया और उन्होंने भी लाइब्रेरी का उद्घाटन कर दिया।
ढाई घंटे बाद केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपने समर्थकों के साथ रिबन काटा।
यानी एक लाइब्रेरी, एक दिन और दो उद्घाटन।
इतना ही नहीं, उद्घाटन के बाद कृष्णपाल गुर्जर ने अपने गुट के नेताओं के साथ बोर्ड के सामने फोटो सेशन भी कराया। बोर्ड पर ऊपर कृष्णपाल गुर्जर का नाम और नीचे विपुल गोयल तथा सुरेंद्र नागर का नाम लिखा गया।
पुरानी गुटबाजी की नई परछाई
फरीदाबाद भाजपा में कृष्णपाल गुर्जर और विपुल गोयल के बीच राजनीतिक खींचतान कोई नई बात नहीं है। मनोहर लाल खट्टर सरकार के समय 20 अक्टूबर 2018 को एनआईटी मैदान में दशहरा उत्सव के दौरान दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक विवाद भी सामने आया था। इसके बाद दोनों के बीच राजनीतिक दूरियां बढ़ती गईं। 2019 में विपुल गोयल का विधानसभा टिकट कटने के बाद यह खाई और गहरी होने की चर्चा होती रही।
बाद के वर्षों में तिगांव विधानसभा सीट को लेकर भी कृष्णपाल गुर्जर और राजेश नागर खेमे के बीच राजनीतिक खींचतान चर्चा में रही। कृष्णपाल गुर्जर अपने बेटे देवेंद्र को तिगांव से चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन 2014, 2019 और 2024 में भाजपा ने राजेश नागर को ही टिकट दिया। यही वजह है कि दिसंबर 2025 में अटल लाइब्रेरी के दो बार उद्घाटन को भी फरीदाबाद की अंदरूनी भाजपा राजनीति से जोड़कर देखा गया।
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