ग्रेन एटीएम के जरिए राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा. सत्यापन पूरा होने के बाद मशीन से निर्धारित मात्रा में अनाज सीधे थैले में निकलेगा.
ग्रेन एटीएम के जरिए राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा. सत्यापन पूरा होने के बाद मशीन से निर्धारित मात्रा में अनाज सीधे थैले में निकलेगा.
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Grain ATM
झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. जमशेदपुर में स्थापित ग्रेन एटीएम यानी ‘अन्नपूर्ति मशीन’ का ट्रायल सफल रहा है. इस आधुनिक तकनीक से राशन कार्डधारकों को निर्धारित कोटे के अनुसार गेहूं और चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है. मशीन की मदद से महज पांच मिनट में 50 किलोग्राम तक अनाज प्राप्त किया जा सकेगा.
तकनीक से मजबूत होगी राशन व्यवस्था
जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थापित इस मशीन का शुक्रवार को परीक्षण किया गया. इस दौरान अनाज निकालने और उसके वजन की सटीकता की जांच की गई. ट्रायल सफल होने के बाद अब मशीन के औपचारिक उद्घाटन और नियमित संचालन की तैयारियां की जा रही हैं.
सरकार की पहल से लाभुकों को मिलेगी राहत
झारखंड सरकार की इस पहल का उद्देश्य राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और लाभुकों को होने वाली परेशानियों को कम करना है. पारंपरिक राशन दुकानों पर लंबी कतारों, समय की बर्बादी और तौल में गड़बड़ी जैसी शिकायतों से राहत मिलने की उम्मीद है. स्वचालित मशीन से अनाज मिलने पर निर्धारित मात्रा में राशन वितरण सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी.
बायोमेट्रिक सत्यापन से मिलेगा राशन
ग्रेन एटीएम के जरिए राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा. सत्यापन पूरा होने के बाद मशीन से निर्धारित मात्रा में अनाज सीधे थैले में निकलेगा. इससे वितरण प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और व्यवस्था की जवाबदेही बढ़ सकती है.
रांची और धनबाद तक विस्तार की योजना
झारखंड में ग्रेन एटीएम परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसके लिए जमशेदपुर के साथ रांची और धनबाद को भी चुना गया है. जमशेदपुर में सफल परीक्षण राज्य में डिजिटल और तकनीक आधारित राशन वितरण व्यवस्था को विस्तार देने की दिशा में अहम कदम है. भविष्य में इस मॉडल की सफलता के आधार पर अन्य क्षेत्रों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है.
इस पहल से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को तकनीक से जोड़ने, राशन वितरण को अधिक प्रभावी बनाने और पात्र लाभार्थियों तक अनाज पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
