September 13, 2026

ग्रेटर ब्रिक्स का मास्टर प्लान लेकर आए चिनफिंग, अमेरिका और यूरोप को खरी-खरी सुनाकर किए 5 बड़े एलान

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' का प्रस्ताव रखा. उन्होंने पश्चिमी ताकतों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब 'जिसकी लाठी, उसकी भैंस' का नियम नहीं चलेगा.

BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' का प्रस्ताव रखा. उन्होंने पश्चिमी ताकतों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब 'जिसकी लाठी, उसकी भैंस' का नियम नहीं चलेगा.

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BRICS 2026

BRICS 2026 Photograph: (PM Modi X Post)

BRICS Summit 2026: वैश्विक मंच पर शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और विकासशील देश अब अपनी आवाज खुलकर उठाने लगे हैं. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दुनिया की पुरानी व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अब मनमानी और ताकत के दम पर नियम थोपने का दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है. पश्चिमी देशों की नीतियों की ओर सीधा इशारा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में किसी भी देश को छोटा या कमजोर समझकर दबाया नहीं जा सकता है. चिनफिंग ने दुनिया के सामने ग्रेटर ब्रिक्स का नया विचार रखा, जिसका मकसद विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मजबूत मंच प्रदान करना है.

ताकत के बल पर नियम थोपने की नीति का विरोध

अपने संबोधन के दौरान चीनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अब ताकत ही सब कुछ है वाली पुरानी सोच की कोई जगह नहीं बची है. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी बड़ी शक्तियों ने कमजोर देशों पर अपनी मर्जी थोपने की कोशिश की है, दुनिया में अशांति ही फैली है. अब समय आ गया है कि इस संकीर्ण मानसिकता को हमेशा के लिए त्याग दिया जाए. दुनिया का कोई भी देश चाहे क्षेत्रफल में कितना भी छोटा हो, उसकी सेना कितनी भी सीमित हो या उसकी अर्थव्यवस्था का आकार कुछ भी हो, वैश्विक बिरादरी में उसे पूरी संप्रभु समानता मिलनी ही चाहिए. किसी भी मुल्क के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी बंद होनी चाहिए और सभी आपसी विवादों को केवल बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए.

उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ताकत और बदलता परिदृश्य

चिनफिंग ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को बेहद नाजुक, अस्थिर और अनिश्चितताओं से भरा हुआ करार दिया. उनका मानना है कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है जहां पुराने नियम टूट रहे हैं और नए नियम गढ़े जा रहे हैं. ऐसे मुश्किल वक्त में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों का उभार पूरी दुनिया को बहुध्रुवीय बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो रहा है. उन्होंने ब्रिक्स देशों का आह्वान किया कि वे दुनिया में अमन, शांति और स्थिरता लाने के लिए आगे आएं. जब विकासशील देश कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे, तभी वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे और पूरी मानव जाति के भले के लिए एक न्यायपूर्ण व्यवस्था का निर्माण कर पाएंगे.

दोहरे मापदंडों पर चलाए तीखे तीर

अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उपयोग को लेकर भी चीनी राष्ट्रपति ने पश्चिमी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि नियम कायदे सभी देशों पर एक समान रूप से लागू होने चाहिए. जब बात अपने हितों की आती है तो बड़े देश अलग रुख अपनाते हैं और दूसरों के लिए अलग पैमाना तय करते हैं. यह दोहरा मापदंड अब चलने वाला नहीं है. ग्लोबल साउथ के देशों को एकजुट होकर एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनानी होगी जहां कानून का राज सबके लिए बराबर हो. अंतरराष्ट्रीय नियम किसी एक समूह या देश की जागीर नहीं हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया की साझी संपत्ति हैं जिनका सम्मान हर हाल में किया जाना जरूरी है.

तकनीक और उद्योग के लिए पांच ऐतिहासिक पहल

ग्लोबल साउथ को केवल राजनीतिक रूप से ही नहीं बल्कि तकनीकी और आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए चिनफिंग ने पांच बड़ी पहलों का एलान किया. इन योजनाओं के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच आपसी तालमेल को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है. इसमें सबसे बड़ा कदम ब्रिक्स एआई ओपन-सोर्स कम्युनिटी की शुरुआत करना है, जिसकी अगुवाई चीन करेगा. इसके जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बड़े मॉडल्स के विकास और नई तकनीकों के प्रशिक्षण को सभी साझेदार देशों के लिए सुलभ बनाया जाएगा, जिससे आधुनिक तकनीक पर किसी एक देश का एकाधिकार खत्म हो सके.

डिजिटल कौशल और आधुनिक फैक्ट्रियों का निर्माण

इसके साथ ही व्यापार और उद्योग को नई गति देने के लिए ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी की शुरुआत की जा रही है. इस कदम से सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं दूर होंगी और नया निवेश आकर्षित करना आसान हो जाएगा. डिजिटल दुनिया में अपनी धाक जमाने के लिए ब्रिक्स डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म भी तैयार किया जाएगा, ताकि युवाओं के हुनर को निखारा जा सके. इसके अलावा पारंपरिक कारखानों को बदलकर स्मार्ट फैक्ट्रियों में बदलने और उद्योगों के आधुनिकीकरण में चीन सहयोग देगा. वहीं कुशल कामगारों के लिए ब्रिक्स इंजीनियर प्रशिक्षण गठबंधन बनेगा, जिससे सदस्य देशों के इंजीनियरों की योग्यता को दुनिया भर में सम्मान और नई पहचान मिल सकेगी. चिनफिंग का यह पूरा विजन ब्रिक्स को एक आर्थिक ताकत के साथ तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में बढ़ाया गया कदम है.

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