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दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर3 घंटे पहले
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बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी का असर अब लोगों की प्रजनन क्षमता पर भी पड़ रहा है। इनफर्टिलिटी की समस्या को लेकर अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. रेनू गुप्ता के मुताबिक, भारत में करीब 10 से 15 प्रतिशत कपल इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा करीब 8 से 12 प्रतिशत है।
डॉ. रेनू गुप्ता के मुताबिक, समाज में यह धारणा आम है कि बच्चे न होने के लिए सिर्फ महिला जिम्मेदार होती है। जबकि इनफर्टिलिटी महिला और पुरुष, दोनों से जुड़ी हो सकती है। इसलिए समस्या होने पर दोनों की जांच जरूरी है।
लंबे समय तक बैठकर काम करने से स्पर्म काउंट कम
केस-1: कल्याणपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर
कल्याणपुर के रहने वाले 30 वर्षीय युवक रोजाना 10 से 12 घंटे तक लगातार बैठकर काम करते थे। मोबाइल फोन भी अक्सर पैंट की जेब में रखते थे। शादी के तीन साल बाद भी गर्भधारण नहीं होने पर दोनों ने डॉक्टर से संपर्क किया। जांच में युवक का स्पर्म काउंट कम पाया गया।
डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने अपनी दिनचर्या में बदलाव किया। शारीरिक गतिविधि बढ़ाई और मोबाइल फोन को जेब में रखना भी कम किया। इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
जंक फूड और बढ़ते वजन से PCOS की समस्या
केस-2: गोविंद नगर की 28 वर्षीय महिला
गोविंद नगर निवासी 28 वर्षीय कामकाजी महिला का स्क्रीन टाइम काफी ज्यादा था। खानपान में जंक फूड भी अधिक शामिल था। अनियमित दिनचर्या और बढ़ते वजन के बाद उन्हें PCOS की समस्या हुई। इसके चलते उन्हें गर्भधारण करने में परेशानी होने लगी।
फिलहाल महिला का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ दिनचर्या फर्टिलिटी को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।
इनफर्टिलिटी के कारणों के आंकड़े भी चौंकाने वाले
इनफर्टिलिटी के कारणों की बात करें तो पुरुष और महिला दोनों इससे प्रभावित हो सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत मामलों में पुरुषों से जुड़े कारण सामने आते हैं। वहीं करीब 40 प्रतिशत मामलों में महिलाओं से जुड़ी शारीरिक समस्याएं जिम्मेदार होती हैं।
इसके अलावा 10 से 20 प्रतिशत मामलों में पति-पत्नी दोनों में कुछ न कुछ समस्या पाई जाती है। करीब 10 से 15 प्रतिशत मामलों में पूरी जांच के बाद भी इनफर्टिलिटी का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आता। इसे अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी कहा जाता है।
टीनएज में मोटापा, स्क्रीन टाइम और जंक फूड बन रहे विलेन
डॉक्टरों के मुताबिक, खराब लाइफस्टाइल भी फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है। आजकल लोगों की दिनचर्या काफी हद तक सेडेंटरी हो गई है। घंटों तक बैठकर काम करना, मोबाइल और दूसरे गैजेट पर ज्यादा समय बिताना और शारीरिक गतिविधि कम होना आम हो गया है।
टीनएज लड़कियों में भी मोटापा और स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। इसके साथ ही जंक फूड का अधिक सेवन और व्यायाम की कमी समस्या बढ़ा रही है। इन कारणों से हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है। महिलाओं में PCOS जैसी बीमारियां फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस और कुछ संक्रमण भी गर्भधारण में परेशानी का कारण बन सकते हैं। प्रदूषण और कुछ पर्यावरणीय कारकों को लेकर भी विशेषज्ञ चिंता जताते हैं।
पैंट की जेब में मोबाइल और ज्यादा गर्मी से बचें
डॉ. रेनू गुप्ता ने प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि पुरुष मोबाइल फोन को लगातार पैंट की जेब में रखने से बचें। लंबे समय तक अत्यधिक गर्म वातावरण में काम करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि अधिक तापमान स्पर्म की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
लड़के और लड़कियां बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से भी बचें। नियमित व्यायाम करें और शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
30 के बाद कम होने लगती है महिलाओं की फर्टिलिटी
फैमिली प्लानिंग में उम्र भी अहम भूमिका निभाती है। महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ फर्टिलिटी धीरे-धीरे कम होती है। 30 के बाद इसमें गिरावट शुरू हो सकती है और 35 के बाद यह ज्यादा तेजी से प्रभावित हो सकती है। 40 की उम्र के बाद गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है।
इसलिए करियर के साथ फैमिली प्लानिंग को लेकर भी समय रहते फैसला लेना जरूरी है।
प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें, धूप भी जरूरी
डॉ. रेनू ने प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की भी सलाह दी। प्लास्टिक की बोतलों में लंबे समय तक पानी रखने से बचना चाहिए। शरीर में विटामिन-D की कमी न हो, इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त धूप लेना भी फायदेमंद हो सकता है।
एक साल तक कोशिश के बाद भी प्रेग्नेंसी न हो तो कराएं जांच
अगर कोई कपल बिना किसी प्रोटेक्शन के नियमित रूप से एक साल तक गर्भधारण की कोशिश कर रहा है और प्रेग्नेंसी नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। महिला की उम्र 35 साल या उससे अधिक है तो छह महीने की कोशिश के बाद ही विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत हो सकती है।
इनफर्टिलिटी की जांच सिर्फ महिला की नहीं, बल्कि पति और पत्नी दोनों की होनी चाहिए। कपल इवैल्यूएशन से समस्या का सही कारण पता लगाने में मदद मिलती है। इसके बाद डॉक्टर कारण के अनुसार इलाज की सलाह देते हैं।
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