August 26, 2026

45 मिनट पहले मिलती जानकारी तो बच जातीं जानें? नेपाल बाढ़ में चीन पर क्यों उठे सवाल

Time Published: Wednesday, August 26, 2026, 20:03 [IST]

Nepal Flood: नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी की अचानक आई भीषण बाढ़ ने तबाही मचा दी है। बाजार, सड़कें और पुल बह गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इस आपदा के पीछे हिमनदी झील टूटने या हिमस्खलन की आशंका जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल अब चीन से जुड़ा है क्या सीमा पार संभावित घटना की जानकारी नेपाल को समय पर दी गई थी?

विशेषज्ञों का दावा है कि अगर संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की सूचना मिलती, तो लोगों को करीब 30 से 45 मिनट पहले चेतावनी दी जा सकती थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सूचना साझा करने में देरी क्यों हुई और क्या इससे नुकसान बढ़ा?

Nepal Flood

चीन से जानकारी में देरी क्यों?

नेपाल के विशेषज्ञों के मुताबिक, संभावित बाढ़ का स्रोत नेपाल-चीन सीमा के पार हो सकता है। लेकिन नेपाल के पास उस इलाके की ताजा सैटेलाइट तस्वीरें और पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं था। ऐसे में नेपाली एजेंसियों को चीन से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर रहना पड़ा। सवाल यह है कि अगर चीन की तरफ घटना की निगरानी हो रही थी, तो नेपाल को इसकी सूचना कितनी जल्दी दी गई? यही देरी अब जांच का अहम हिस्सा बन गई है।

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45 मिनट पहले चेतावनी मिलती तो क्या होता?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि संभावित घटना स्थल से नीचे बसे इलाकों तक बाढ़ का पानी पहुंचने में करीब 30 से 45 मिनट लग सकते थे। अगर झील टूटने या हिमस्खलन की जानकारी तत्काल साझा की जाती, तो प्रशासन बाजार और नदी किनारे बसे लोगों को अलर्ट कर सकता था। लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने, सड़कें बंद करने और रेस्क्यू टीमों को तैयार करने का समय मिल जाता। इससे नुकसान कम होने की संभावना थी।

क्या चीन की तरफ टूटी ग्लेशियल झील?

भोटेकोशी में आई बाढ़ में पानी की मात्रा और उसकी रफ्तार सामान्य बाढ़ से कहीं ज्यादा बताई जा रही है। इसी वजह से विशेषज्ञों को शक है कि लेंडे नदी के ऊपरी हिस्से में मौजूद तीन झीलों में से कोई एक टूट सकती है। भूस्खलन या हिमस्खलन से झील पर दबाव बढ़ने के बाद अचानक पानी नीचे आया हो सकता है। हालांकि अभी यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि कौन-सी झील टूटी।

पिछले साल भी हुई थी ऐसी तबाही

भोटेकोशी क्षेत्र में पिछले साल भी अचानक बाढ़ आई थी, जिसमें 9 लोगों की मौत और 18 लोग लापता हुए थे। बाद में इस बाढ़ का संबंध तिब्बत में मौजूद एक सुप्राग्लेशियल झील से जोड़ा गया था। उस घटना में नेपाल-चीन सीमा का फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था। इस बार विशेषज्ञों को बाढ़ की ताकत और पानी की मात्रा को देखते हुए स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर होने की आशंका है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा खतरा

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे ग्लेशियल झीलों में पानी का स्तर बढ़ रहा है और उनके अचानक टूटने का खतरा भी बढ़ रहा है। हिमस्खलन, भूस्खलन और ग्लेशियरों पर बारिश इस खतरे को और बढ़ा सकती है। ऐसे में नेपाल के लिए समय पर अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बेहद जरूरी है। अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि क्या समय पर सूचना साझा की गई थी और 45 मिनट की कथित देरी क्यों हुई?