September 27, 2026

रम्मीकल्चर ऐप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 442.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क | RummyCulture BOT Allegation ED Probe Telangana FIR

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म रम्मीकल्चर और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 442.35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 25 सितंबर 2026 को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किया। कुर्क की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि, व्यावसायिक दुकानें, एक विला और कई आवासीय संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, निजी फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के नाम पर हैं।

ईडी ने यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की है। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत धोखाधड़ी के अपराध दर्ज किए गए हैं, जो पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध हैं।

जांच के दौरान ईडी ने 7 से 14 मई 2026 और 20 से 21 जून 2026 के बीच गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यालयों तथा उसके निदेशकों और प्रमुख कर्मचारियों के आवासों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।

ईडी की जांच में सामने आया कि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड रम्मीकल्चर, रम्मीप्राइम, प्लेशिप और रम्मीटाइम जैसे ब्रांडों के जरिए ऑनलाइन रियल मनी रम्मी गेम और टूर्नामेंट संचालित कर रही थीं। इन प्लेटफॉर्म्स के देशभर में करीब तीन करोड़ उपयोगकर्ता थे।

जांच में यह भी पता चला कि बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता उन राज्यों से थे, जहां ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है। इनमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। कंपनियां खिलाड़ियों द्वारा जमा की गई दांव राशि पर 10 से 15 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म कमीशन वसूलकर भारी राजस्व अर्जित कर रही थीं।

ईडी के अनुसार, कंपनियां उपयोगकर्ताओं को यह भरोसा दिलाती थीं कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पूरी तरह पारदर्शी हैं और इनमें किसी तरह के बॉट का इस्तेमाल नहीं होता। हालांकि जांच में सामने आया कि कंपनियों ने उपयोगकर्ताओं की जानकारी या सहमति के बिना ऑटोमेटेड बॉट्स का इस्तेमाल किया, जिससे खिलाड़ियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनियों ने कथित रूप से अपराध से अर्जित आय हासिल की।

जांच एजेंसी ने दावा किया कि कंपनियों ने नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और उन्हें लगातार खेलते रहने के लिए भ्रामक और लत बढ़ाने वाली रणनीतियां अपनाईं। नए खिलाड़ियों को बोनस, रेफरल इंसेंटिव, मुफ्त टूर्नामेंट एंट्री और अन्य प्रमोशनल ऑफर देकर अधिक जमा राशि लगाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए कंपनियों ने करीब 1,035 करोड़ रुपये विज्ञापन और प्रचार अभियानों पर खर्च किए।

ईडी के अनुसार, कंपनियों ने निकासी पर 5 से 10 प्रतिशत तक शुल्क लगाया और 'सुपर बूस्टर' जैसे ऑफर देकर उपयोगकर्ताओं की निकासी योग्य राशि को गैर-निकासी योग्य 'गेम कैश' में बदलने के लिए प्रेरित किया। भारी नुकसान के बाद खेल छोड़ चुके उपयोगकर्ताओं को भी कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, पुश नोटिफिकेशन, एसएमएस और टेलीमार्केटिंग कॉल के जरिए दोबारा गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि कथित अपराध से अर्जित धन को लाभांश और शेयर बायबैक के जरिए शेयरधारकों तक पहुंचाया गया और बाद में उसे म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयरों तथा महंगी चल-अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

ईडी ने बताया कि इससे पहले तलाशी के दौरान लगभग 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां फ्रीज की गई थीं। इसके अलावा 11 लाख रुपये नकद और करीब 2.30 किलोग्राम सोना, हीरे के आभूषण और बुलियन भी जब्त किए गए थे। एजेंसी पहले ही करीब 1,906 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है।

ईडी के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल 2,843 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित संपत्तियां कुर्क, फ्रीज या जब्त की जा चुकी हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।