July 21, 2026

महज 42 दिनों में देश में आए 17 अरब डॉलर, RBI की स्कीम हुई सुपरहिट, ऐसे मजबूत हुआ देश का फॉरेक्स रिजर्व

नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (NRIs) ने एक नई डिपॉजिट इंसेंटिव स्कीम के तहत फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट के जरिए भारतीय बैंकों में 17.41 बिलियन डॉलर जमा किए हैं. यह डॉलर को आकर्षित करने और रुपए को मजबूत करने के कैंपेन की एक अच्छी शुरुआत है. 5 जून को घोषित और तीन दिन बाद शुरू की गई यह स्कीम NRIs को लेवरेज्ड डिपॉजिट करने की सुविधा देती है और सितंबर के आखिर तक चलेगी. इसमें सेंट्रल बैंक हेजिंग का रिस्क उठाता है, जिससे विदेशी निवेशकों को अपने पैसे पर 14 फीसदी तक रिटर्न कमाने का मौका मिलता है.

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अनुसार उसकी डॉलर स्वैप सुविधा को 17 जुलाई तक कुल 20.72 बिलियन डॉलर मिले, जिसमें FCNR-B डिपॉजिट का हिस्सा सबसे ज्यादा था. FCNR(B) डिपॉजिट के अलावा, स्वैप विंडो को फॉरेक्स में 1.97 बिलियन डॉलर की उधारी और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के जरिए 1.34 बिलियन डॉलर भी मिले. कमर्शियल बैंक स्वैप विंडो पर गारंटीड दरों पर डॉलर के बदले रुपए का एक्सचेंज करते हैं. RBI ने डेटा के साथ जारी एक प्रेस रिलीज में कहा कि स्वैप सुविधा में काफी दिलचस्पी देखी गई है और 8 जून, 2026 से विदेशी मुद्रा का लगातार प्रवाह (इनफ्लो) हुआ है. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

ये एक ‘अच्छी शुरुआत’ है

IDFC फर्स्ट बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता ने इसे कैपिटल इनफ्लो स्कीम की “बहुत अच्छी शुरुआत” बताया. उन्होंने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि जिस रफ़्तार से यह हो रहा है, उसे देखते हुए इस स्कीम की वजह से कुल FCNR-B इनफ्लो के 50 बिलियन डॉलर के हमारे अनुमान से ज्यादा इनफ्लो हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगस्त और सितंबर में बड़े पैमाने पर इनफ्लो की उम्मीद है. सेनगुप्ता ने कहा कि ECB के लिए, हम 20 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त इनफ्लो का अनुमान बनाए हुए हैं.

उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2027 में BoP सरप्लस के 25 बिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है, और इससे रुपए की गिरावट की रफ़्तार को कम करने में मदद मिलेगी. सेंट्रल बैंक ने ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच कैपिटल इनफ्लो को बढ़ावा देने और भारत के बैलेंस ऑफ़ पेमेंट को मजबूत करने के लिए FCNR डिपॉजिट स्कीम की शुरुआत की गई थी. इस सुविधा के तहत, बैंक नए FCNR-B डिपॉजिट जुटा सकते हैं और डॉलर को RBI के साथ रियायती दर पर स्वैप कर सकते हैं. FCNR-B विंडो 30 सितंबर तक खुली रहेगी, जबकि OFCB और ECB के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर तक उपलब्ध है.

अनुमान से ज्यादा निवेश

पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्ज़ीक्यूटिव अशोक चंद्रा ने मीडिया रिपोर्ट में का कि यह इस बात का बेहतरीन संकेत है कि इस स्कीम के तहत किस तरह का फंड आ सकता है. चंद्रा ने कहा कि ऐसी उम्मीद थी कि 15 अगस्त के बाद इनफ्लो बढ़ेगा और स्कीम के खत्म होने तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि आज RBI के खुलासों से पता चलता है कि शुरुआती अनुमानों से भी ज़्यादा इनफ्लो हो सकता है. सरकारी बैंक का लक्ष्य 2.5 बिलियन डॉलर का FCNR डिपॉज़िट जुटाना है और अब तक उसे 425 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं. 16 जुलाई को मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि स्कीम शुरू होने के बाद से बैंकिंग सिस्टम में 12-15 बिलियन डॉलर का FCNR-B इनफ्लो हो सकता है.

सामने आईं कई चुनौतियां

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विदेशी फंडिंग की लागत बढ़ने के कारण बैंक NRI से 1 मिलियन डॉलर से ज्यादा के FCNR-B डिपॉजिट को चुन-चुनकर ले रहे हैं. छोटे लेवरेज्ड डिपॉजिट अब फायदेमंद नहीं रह गए हैं, जिससे 30-40 बिलियन डॉलर का इनफ्लो आकर्षित करने का भारत का लक्ष्य कमजोर पड़ सकता है. शुरुआत में बैंकर्स को US और UK जैसे मार्केट में NRI के बीच टैक्स से जुड़ी चिंताओं, इनफ्लो के असल सोर्स को लेकर अनिश्चितता और ऑपरेशनल स्पष्टीकरण (जो जून में बाद में आए) जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके चलते RBI और सरकार को जुलाई के मध्य में बैंकों के साथ अलग-अलग बैठकें करनी पड़ीं ताकि तेज़ी से फंड जुटाने को बढ़ावा दिया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार घरेलू बैंकों को US से बड़े पैमाने पर FCNR-B डिपॉज़िट इनफ्लो की उम्मीद नहीं है क्योंकि वहां कई NRI 2013 के प्रोग्राम के बाद सख्त टैक्स जांच और कंप्लायंस चुनौतियों के कारण सतर्क हैं.

बार्कलेज की रिपोर्ट

सेंट्रल बैंक और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इंसेंटिव वाली FCNR स्कीम को लेकर बैंकों के टॉप एग्ज़ीक्यूटिव्स के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं. बार्कलेज ने 16 जुलाई को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि उसे अगले कुछ महीनों में 25-30 बिलियन डॉलर के संभावित FCNR इनफ्लो (पैसे आने) की उम्मीद थी – जिसमें बढ़ोतरी की गुंजाइश थी – लेकिन उसे 2013 जैसा भारी इनफ्लो दोबारा होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक इसे अपनाने की रफ़्तार, बाज़ार की लगभग 40-50 बिलियन डॉनर की बड़ी उम्मीदों (और कुछ लोगों की 70 बिलियन डॉलर तक के इनफ्लो की उम्मीद) के मुकाबले कम रही है.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

15 साल से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

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