मध्यप्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने के मामले की जांच अब डबरा से भोपाल तक पहुंच गई है।
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STF का दावा है कि भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ के एक ही पते का इस्तेमाल करीब 40 पासपोर्ट बनवाने में हुआ। अब जांच एजेंसी यह पता कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन किस तरह हुआ।
STF के इसी दावे की पड़ताल करने दैनिक भास्कर की टीम अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंची। यहां भास्कर की मुलाकात भंते कश्यप आनंद से हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें मठ के पते से फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक अब तक न STF की टीम जांच के लिए मठ पहुंची और न ही किसी जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले में पूछताछ की है।
सबसे पहले देखिए मठ से तस्वीरें…

अन्ना नगर से सटा हुआ रास्ता है जो सीधे मठ के अंदर जाता है।

मठ का गेट दूर से ही नजर आता है।

मठ के अंदर इस तरह की व्यवस्थाएं हैं।




अशोका बुद्ध विहार की बाउंड्री।
भंते बोले- दो दिन पहले ही मठ में आया हूं
भंते कश्यप आनंद ने बताया कि वे मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और करीब दो दिन पहले ही मठ में आए हैं। उनका कहना है कि उनके आने के बाद न STF की टीम यहां पहुंची और न किसी अन्य जांच एजेंसी ने फर्जी पासपोर्ट मामले को लेकर उनसे संपर्क किया।
उन्होंने कहा कि मठ के पते से किसी व्यक्ति का पासपोर्ट बना है या नहीं, इसकी जानकारी भी उनके पास नहीं है। STF की ओर से की गई किसी कार्रवाई के बारे में भी उन्हें जानकारी नहीं मिली है।

बौद्ध मठ के भंते कश्यप आनंद।
‘पुलिस वेरिफिकेशन के लिए कोई आया हो, याद नहीं’
भंते कश्यप आनंद के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति ने मठ का पता देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया होगा तो नियमानुसार पते का पुलिस सत्यापन होना चाहिए। लेकिन उनकी जानकारी में पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए पुलिस कभी मठ पर नहीं आई।
उन्होंने यह भी कहा कि वे कई बार भोजन के लिए मठ से बाहर जाते हैं। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी में कोई टीम आई हो, इसकी संभावना से वे पूरी तरह इनकार नहीं कर सकते। हालांकि मठ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने भी उन्हें पुलिस या STF के आने की जानकारी नहीं दी।
‘किसी जांच एजेंसी ने कोई जानकारी नहीं दी’
भंते ने कहा कि फर्जी पासपोर्ट मामले में अब तक किसी जांच एजेंसी ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी है। उन्हें यह भी पता नहीं है कि STF की जांच में मठ का पता किस आधार पर सामने आया।
यहीं मामले का सबसे अहम सवाल सामने आता है- यदि STF के दावे के मुताबिक एक ही पते से 40 से अधिक पासपोर्ट बने, तो इन आवेदनों की जांच और सत्यापन किस स्तर पर हुआ?

चूक का पता लगाने में जुटी STF
STF पहले ही कह चुकी है कि मामले में पुलिस वेरिफिकेशन की भूमिका की भी जांच की जाएगी। एजेंसी यह पता लगा रही है कि एक ही पते से इतनी संख्या में पासपोर्ट बनने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया में कोई चूक हुई या जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई।

डबरा से खुला नेटवर्क, भोपाल तक पहुंची जांच
STF की जांच डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के पते से शुरू हुई। यहां एक ही पते से 20 से 22 पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आई।
जांच आगे बढ़ी तो मध्यप्रदेश के अलग-अलग पतों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई। STF के अनुसार इनमें 22 की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बाकी की जांच जारी है।
जांच में फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण-पत्र, 10वीं की अंकसूची सहित अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।
STF ने कुछ पासपोर्ट धारकों द्वारा बौद्ध पहचान अपनाकर भारतीय नागरिक के तौर पर दस्तावेज तैयार कराने की दिशा में भी जांच की है।
दो आरोपी गिरफ्तार, दूसरे राज्यों से भी कनेक्शन
मामले में STF ने रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। STF के मुताबिक रियाल कई पासपोर्ट में गवाह बना था। उसके नाम से चार पासपोर्ट मिलने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
दोनों आरोपियों के कनेक्शन असम सहित अन्य राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं। STF संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में भी जांच कर रही है।

अब जांच की कड़ी ऐसे जुड़ेगी
भोपाल के अशोक बुद्ध विहार मठ के पते से 40 से अधिक पासपोर्ट बनाए जाने के STF के दावे और मठ के वर्तमान भंते के बयान में फिलहाल अंतर दिखाई देता है।
एक तरफ STF इतने पासपोर्ट को जांच के दायरे में बता रही है, दूसरी तरफ भंते का कहना है कि उन्हें न फर्जी पासपोर्ट की जानकारी है और न ही उनके सामने पुलिस या STF वेरिफिकेशन के लिए पहुंची।
अब जांच में पासपोर्ट आवेदन से लेकर पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी कड़ी खंगाली जाएगी।
इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मठ का पता किसने दिया, दस्तावेज किसने तैयार किए, आवेदकों का सत्यापन किसने किया और एक ही पते से इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया में कहीं कोई चूक हुई या नहीं।
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भोपाल में मठ के पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट जारी

भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित अन्ना नगर के एक मठ के पते से करीब 40 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी होने का खुलासा हुआ है। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि फर्जी पासपोर्ट बनाने वाला गिरोह बांग्लादेश से भारत आए लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिक के रूप में तैयार करता था। इसके बाद आधार, पैन और जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर भारतीय पासपोर्ट हासिल कराए जाते थे।पूरी खबर पढ़ें