August 12, 2026

अत्याचार झेलने वाले दलित-आदिवासियों का मुआवजा 40% बढ़ाने पर विचार, क्या है वजह?

अत्याचार झेलने वाले दलित-आदिवासियों का मुआवजा 40% बढ़ाने पर विचार, क्या है वजह?

एससी-एसटी को मिलने वाले मुआवजे में होगी बढ़ोतरी

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक मदद बढ़ सकती है. केंद्र सरकार मुआवजे की मौजूदा राशि में 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.यह बदलाव करीब एक दशक बाद प्रस्तावित किया गया है. मौजूदा दरों को 2016 में संशोधित किया गया था.

इस समय अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर एससी-एसटी वर्ग के पीड़ितों को 85,000 से लेकर 8.25 लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाता है. अगर केंद्र सरकार मुआवजे में बढ़ोतरी की राशि के प्रस्ताव को मंजूर कर लेती है तो एससी-एसटी वर्ग के पीड़ितों को न्यूनतम मुआवजा बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है, जो अधिकतम 12 लाख रुपये तक हो सकता है.

क्यों मुआवजे की राशि को बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई?

SC/ST अत्याचार निवारण कानून का मकसद सिर्फ अपराध करने वालों को सजा दिलाना नहीं है, बल्कि पीड़ित और उसके परिवार को तत्काल राहत और पुनर्वास देना भी है. 1989 में बना यह कानून विशेष अदालतों के साथ पीड़ितों को राहत और पुनर्वास देने का भी प्रावधान भी देता है. सरकार का कहना है कि समय के साथ महंगाई और जीवन-यापन की लागत बढ़ी है. ऐसे में करीब 10 साल पहले तय की गई मुआवजे की राशि को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से संशोधित करने की जरूरत है.सरकार के प्रस्ताव में मुआवजे को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI में बढ़ोतरी से जोड़कर संशोधित करने की बात सामने आई है.

अभी एससी-एसटी को अत्याचार के मामले में कितना मिलता है मुआवजा?

  • SC/ST (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोटिसिटी) नियमों के तहत अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर मुआवजा 85 हजार रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक है.
  • 2016 में नियमों में संशोधन करके राहत की राशि बढ़ाई गई थी और अपराधों की संख्या भी बढ़ाई गई थी, जिनमें पीड़ितों को राहत मिल सकती है.
  • रेप के मामले में 5 लाख रुपये और गैंगरेप के मामले में 8.25 लाख रुपये तक की राहत का प्रावधान किया गया था.
  • एसिड अटैक जैसे मामलों में चोट की गंभीरता के हिसाब से अलग-अलग राशि तय है.
  • अब प्रस्तावित बदलाव में न्यूनतम मुआवजा करीब 1 लाख रुपये और अधिकतम करीब 12 लाख रुपये करने की बात है.
  • हालांकि यह फिलहाल प्रस्ताव है, अंतिम मंजूरी के बाद ही नई दरें लागू होंगी.

Sc St

अलग-अलग चरणों में क्यों दी जाती है मुआवजे की राशि?

पीड़ित को पूरी राशि एक साथ नहीं दी जाती. राहत राशि को मामले की कानूनी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से जोड़ा गया है.पहला चरण FIR दर्ज होने के बाद 25 फीसदी राशि.दूसरा चरण पुलिस की ओर से चार्जशीट अदालत में दाखिल होने के बाद 50 फीसदी राशि. तीसरा चरण आरोपी के दोषी ठहराए जाने पर बाकी 25 फीसदी राशि.इसका मकसद यह है कि पीड़ित को केस की शुरुआत में ही आर्थिक मदद मिल जाए और उसे न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के दौरान भी सहायता मिलती रहे.

सिर्फ मुआवजा बढ़ाना ही काफी क्यों नहीं?

सरकार सिर्फ पीड़ितों को ज्यादा पैसे देने पर ही नहीं, बल्कि कानून लागू करने वाली व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है.सरकार ने राज्यों को SC/ST अत्याचार के मामलों के लिए स्पेशल पुलिस स्टेशन और विशेष अदालतों की व्यवस्था मजबूत करने में आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों को ऐसे विशेष पुलिस स्टेशनों की स्थापना के लिए एकमुश्त 5 लाख रुपये की मदद देने का प्रस्ताव है. इन थानों में आगे जो खर्च आएगा वह राज्य सरकार की तरफ से वहन किया जाएगा.

दरअसल, देश में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए संस्थागत व्यवस्था हर राज्य में समान नहीं है. उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 181 विशेष पुलिस स्टेशन फिलहाल काम कर रहे हैं, लेकिन ये सिर्फ सात राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में हैं. इससे यह सवाल उठता है कि जिन राज्यों में SC/ST के खिलाफ अत्याचार के मामले ज्यादा हैं, वहां विशेष जांच और पुलिस व्यवस्था कितनी मजबूत है. ऐसे में सरकार की तरफ SC/ST अत्याचार के मामलों के लिए स्पेशल पुलिस स्टेशन और विशेष अदालतों की व्यवस्था को मजबूत करने की पहल बहुत जरूरी

सरकार के सामने SC-ST से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

  • SC/ST अत्याचार के मामलों में पीड़ित के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है.
  • कई मामलों में परिवार को सामाजिक दबाव, धमकी, रोजगार और संपत्ति से जुड़े नुकसान जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है.
  • यही वजह है कि कानून में पीड़ित और गवाहों के अधिकारों को भी महत्व दिया गया है.
  • SC/ST Act में सरकार पर कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी भी डाली गई है.
  • इसलिए अगर मुआवजा बढ़ता है तो उसके साथ यह भी जरूरी है कि FIR से लेकर जांच, चार्जशीट और ट्रायल तक की प्रक्रिया समय से हो
  • वरना कागज पर बढ़ी हुई राहत राशि पीड़ित के लिए वास्तविक राहत में तब्दील नहीं हो पाएगी.

सरकार की तरफ से अब तक कितना पैसा जारी हुआ, कितने पीड़ितों को राहत मिली?

सरकार के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में SC/ST अत्याचार के पीड़ितों को राहत देने के लिए राज्यों को लगातार राशि जारी की गई है.2019-20 में 141.36 करोड़ रुपये जारी किए गए और इससे 23,866 पीड़ितों को लाभ मिला. 2020-21 में 113.03 करोड़ रुपये से 23,592 पीड़ितों को, 2021-22 में 126.72 करोड़ रुपये से 20,278 पीड़ितों को और 2022-23 में 91.54 करोड़ रुपये से 23,828 पीड़ितों को राहत दी गई.इसके बाद 2023-24 में 97.95 करोड़ रुपये से 19,240 पीड़ितों को और 2024-25 में 89.49 करोड़ रुपये से 20,074 पीड़ितों को राहत दी गई. 2025-26 में 87.08 करोड़ रुपये जारी हुए और अब तक 12,665 पीड़ितों को राहत दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी है.

सचिन धर दुबे

सचिन धर दुबे

सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.

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