उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा ने भारत के पहले पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण किया है। यह उड़ने वाली कार 40 किलोमीटर का सफर मात्र 12 मिनट में तय करने में सक्षम है।
अल्मोड़ा, 7 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में एक युवा इनोवेटर ने बड़ा कारनामा कर दिखाया है। रवि टम्टा ने पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल यानी ‘उड़ने वाली कार’ का निर्माण किया है। अल्मोड़ा के एक खुले मैदान में इस कार का शुरुआती परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है। इसे देश का पहला ऐसा आविष्कार माना जा रहा है।
इस प्रोटोटाइप को HAPIDA SKYNeX नाम दिया गया है। रवि और उनकी टीम ने सीमित संसाधनों के बीच इस तकनीक को हकीकत में बदला है। यह प्रयोग सफल रहा तो देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भारी बदलाव आना तय है।
साल 2016 में रवि ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। दस साल का लंबा वक्त लगा। कई चुनौतियां सामने आईं। आज उनकी मेहनत रंग लाई है। रवि का सीधा दावा है कि यह भारत का पहला पर्सनल स्काई मोबिलिटी व्हीकल है जो उड़ान भरने में सक्षम है।
इस फ्लाइंग कार की स्पीड और समय बचाने की क्षमता चौंकाने वाली है। अल्मोड़ा के जिस मैदान में इसका परीक्षण हुआ, वहां से रवि के घर की दूरी 40 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में आमतौर पर डेढ़ घंटे का समय लग जाता है।
हवा में यह सफर बहुत छोटा हो जाता है। रवि के बनाए इस फ्लाइंग व्हीकल से 40 किलोमीटर की यह दूरी मात्र 12 मिनट में पूरी की जा सकती है। पहाड़ी रास्तों पर समय बचाने के मामले में यह तकनीक किसी चमत्कार से कम नहीं है।
सुरक्षा और परमिशन को लेकर अभी कई कदम उठाए जाने बाकी हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों से औपचारिक अनुमति मिलने का इंतजार है। बिना परमिशन के इसे लंबी दूरी तक नहीं उड़ाया जा सकता है। हवा में सफर करना सड़क यात्रा के मुकाबले तकनीकी रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
इस इनोवेशन का मुख्य उद्देश्य केवल नई तकनीक खोजना नहीं है। मेडिकल इमरजेंसी के वक्त यह मशीन जान बचाने का काम करेगी। पहाड़ों में खराब रास्तों की वजह से मरीजों को अस्पताल पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने में भी यह कार एक सीधा समाधान दे सकती है।
रवि टम्टा भविष्य की परिवहन व्यवस्था को लेकर बेहद स्पष्ट राय रखते हैं। उनका मानना है कि आने वाले 8 से 10 सालों में पर्सनल फ्लाइंग कारें आम बात हो जाएंगी। उनकी टीम का अगला लक्ष्य इस तकनीक को सस्ता बनाना और हर आम घर तक पहुंचाना है।