September 15, 2026

पन्ना में नदी में हीरे तलाशने पहुंच रहे ग्रामीण: किनारे पर 4 से 5 हजार लोग डेरा डाले, वन विभाग खाली करा रहा जमीन - Panna News

पन्ना जिले की विश्रामगंज रेंज के रुंझ डैम के डूब इलाके से गुजरने वाली रुंझ नदी में सैकड़ों लोग हीरे की तलाश में पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि नदी के उफान के साथ बहकर आने वाली चाल में हीरे की उम्मीद में लगभग 4 से 5 हजार लोग यहां डेरा डाले हुए थे।

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हालांकि, वन विभाग की सख्ती और लगातार कार्रवाई के बाद अब मौके पर सिर्फ 100-150 लोग ही बचे हैं।

इस हीरे के लिए मशहूर नदी की पहचान सिर्फ पन्ना तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के बांदा, बिहार, छतरपुर, अमानगंज, चंदला, लोंडी, बमीठा और मुंबई तक से लोग यहां खिंचे चले आ रहे हैं।

लोगों ने क्या बताया?

चंदनगर से आए रिंकू कुशवाहा ने बताया कि उन्हें हाल ही में अपने फल-सब्जी के व्यापार में भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद वे अपनी किस्मत आजमाने पन्ना की इस नदी पर पहुंचे।

रिंकू के अनुसार, उन्हें करीब 35,000 रुपए कीमत का एक हीरा मिला भी है, जिसे खरीदने के लिए स्थानीय खरीदारों से बात चल रही है।

रिंकू का कहना है, “हीरा मिलना किस्मत और मेहनत दोनों का खेल है। यहां लोगों को छोटे-छोटे टुकड़ों से लेकर लाखों और करोड़ों रुपए तक के हीरे मिलते रहे हैं।”

महिलाएं भी पहुंची नदी के किनारे

वहीं, पन्ना के बेनीसागर मोहल्ले से आई बुजुर्ग श्यामबाई पिछले 3-4 सालों से लगातार यहां आ रही हैं। उनका कहना है कि वे सुबह 10 बजे आकर पूरे दिन मेहनत करती हैं। उन्हें छोटे-मोटे टुकड़े मिले हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा हीरा हाथ नहीं आया।

पन्ना के पुराने पावर हाउस क्षेत्र की रहने वाली पार्वती कोंदर पिछले तीन सालों से यहां अपनी किस्मत तलाश रही हैं। उन्होंने बताया कि अब तक उनके 3 से 4 लाख रुपए केवल आने-जाने और रहने-खाने में खर्च हो चुके हैं। फिर भी वे दीपावली तक यहां खुदाई करती रहेंगी।

पार्वती कहती हैं, “गरीब लोगों के लिए यह नदी एक उम्मीद है। मोबाइल में खबरे देख और लोगों से सुनकर हम भी आए थे, उम्मीद है कि एक दिन किस्मत जरूर चमकेगी।”

खुदाई और छनाई का कठिन तरीका

​नदी किनारे काम करने वाले लोगों का कहना है कि हीरा खोजना आसान काम नहीं है। सबसे पहले नदी के बहाव वाले क्षेत्रों से चाल (कंकड़-पत्थर वाली मिट्टी) की खुदाई की जाती है। इसके बाद उस मिट्टी को नदी के बहते पानी में तसले (टोकरी) की मदद से छाना जाता है। छनाई के बाद बचे पत्थरों में से बारीक नजरों से हीरों को बीना (चुना) जाता है।

​वन विभाग की सख्त कार्रवाई, टपरी और सामान जब्त

यह क्षेत्र विश्रामगंज रेंज के अंतर्गत आता है और वन भूमि का हिस्सा है, इसलिए अवैध खनन रोकने के लिए वन विभाग ने अपना पहरा कड़ा कर दिया है। ​स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि वन विभाग की टीम लगातार मौके पर पहुंचकर लोगों की टपरियों (झोपड़ियों) को हटा रही है, चाल छानने वाले तसले और कुदाल जब्त कर रही है।

टीम लोगों को क्षेत्र छोड़ने के लिए खदेड़ रही है। वन विभाग की इस सख्ती के कारण हजारों की संख्या में मौजूद भीड़ अब धीरे-धीरे कम होने लगी है, हालांकि कई लोग छिप-छिपाकर अभी भी अपनी किस्मत की तलाश में जुटे हुए हैं।