गुरुग्राम से अलवर के बीच सफर को आसान बनाने वाली बहुप्रतीक्षित चार लेन हाईवे परियोजना एक बार फिर देरी में फंस गई है। सरकार से मंजूरी और बजट मिलने के बावजूद नूंह से राजस्थान बॉर्डर तक गुरुग्राम-अलवर नेशनल हाईवे-248A को चार लेन करने का काम जमीन पर शुरू नहीं हो पाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह हाईवे के दोनों तरफ मौजूद करीब 10 हजार पेड़ों की कटाई की अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया है।
440 करोड़ रुपये की परियोजना
नूंह से राजस्थान सीमा तक करीब 48-49 किलोमीटर हिस्से को चार लेन करने की योजना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने करीब 440 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसमें करीब 310 करोड़ रुपये मुख्य हाईवे को चार लेन करने और बाकी रकम प्रस्तावित बाईपास के निर्माण पर खर्च की जानी है। सरकारी ई-टेंडर रिकॉर्ड में इस परियोजना की टेंडर वैल्यू करीब 310.44 करोड़ रुपये और निर्माण अवधि 730 दिन दर्ज है।
10 हजार पेड़ बने सबसे बड़ी अड़चन
हाईवे के चौड़ीकरण के रास्ते में सबसे बड़ी परेशानी सड़क के दोनों ओर खड़े करीब 10 हजार पेड़ हैं। इनमें सफेदा के पेड़ों की संख्या अधिक बताई गई है। सड़क को चौड़ा करने के लिए इन पेड़ों को हटाना जरूरी है, लेकिन वन विभाग से जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण निर्माण की रफ्तार अटक गई है।
वन विभाग की मंजूरी और पेड़ काटने की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। हरियाणा वन विभाग के अनुसार वन भूमि के गैर-वन उपयोग और पेड़ों की कटाई से जुड़े मामलों में संबंधित स्वीकृतियां लेना आवश्यक होता है।
टेंडर और वर्क ऑर्डर के बाद भी इंतजार
इस परियोजना के लिए पिछले साल टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद 27 मार्च 2026 को वर्क ऑर्डर जारी होने की जानकारी सामने आई, लेकिन पेड़ों को हटाने की अनुमति लंबित रहने से काम शुरू नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरी करने के लिए दो साल का समय दिया गया है।
PWD ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
वन विभाग से अनुमति में देरी के बाद लोक निर्माण विभाग ने इस मामले को लेकर अदालत का रुख किया है। नूंह PWD के कार्यकारी अभियंता के मुताबिक, पेड़ों की कटाई की अनुमति के लिए विभाग की ओर से पत्राचार किया गया है और अब अदालत में भी अर्जी लगाई गई है।
लोगों को क्यों है इस हाईवे का इंतजार?
नूंह से राजस्थान सीमा तक मौजूदा सड़क लंबे समय से दो लेन की है। इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने और हादसों के कारण स्थानीय लोग लंबे समय से इसे चार लेन करने की मांग करते रहे हैं। चार लेन बनने के बाद नूंह, फिरोजपुर झिरका और राजस्थान के अलवर की ओर आने-जाने वाले वाहनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
परियोजना पूरी होने से दिल्ली-NCR, गुरुग्राम और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है। फिलहाल नजर इस बात पर है कि पेड़ों की कटाई की मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं कब पूरी होती हैं, ताकि वर्षों से अटकी इस परियोजना का काम वास्तव में जमीन पर शुरू हो सके।