October 2, 2026

उत्तर प्रदेश: गन्ना किसानों के लिए अधिक पैदावार वाली 4 नई किस्में जारी, जानिए खासियत

02 अक्टूबर 2026, भोपाल: उत्तर प्रदेश: गन्ना किसानों के लिए अधिक पैदावार वाली 4 नई किस्में जारी, जानिए खासियत – उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को अब खेती के लिए चार नई गन्ना किस्मों का विकल्प मिलेगा। ‘उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति’ ने उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की विकसित तीन किस्मों को.शा.23232, को.शा.19235 और को.शा.18232 तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की विकसित को.लख.21201 को खेती के लिए अनुमोदित किया है।

गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में 29 सितंबर को हुई समिति की बैठक में इन किस्मों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने प्रस्तावित किस्मों की उपज, पोल प्रतिशत और अन्य विशेषताओं की जानकारी समिति के सामने रखी।

को.शा.23232 की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की अगेती किस्म को.शा.23232 की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। यह मानक किस्म को.0238 की तुलना में 9.44 प्रतिशत अधिक है। इस किस्म में नवंबर, जनवरी और मार्च में पोल प्रतिशत केन क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 प्रतिशत पाया गया। ये आंकड़े मानक किस्म को.0238 से क्रमशः 0.09, 0.24 और 0.12 प्रतिशत अधिक हैं। को.शा.23232 की पेड़ी की उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 से 3.16 प्रतिशत अधिक है। प्रेस नोट के अनुसार यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और इसकी पेड़ी क्षमता भी अच्छी है।

को.लख.21201 की उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की अगेती किस्म को.लख.21201 को भी खेती के लिए मंजूरी दी गई है। इसकी औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म को.0238 के लगभग समान है।इसमें पोल इन केन 13.94 प्रतिशत पाया गया, जबकि को.0238 में यह 13.71 प्रतिशत था। प्रेस नोट के मुताबिक को.लख.21201 में लाल सड़न रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता है और पेड़ी की क्षमता भी अच्छी है। इसे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अनुमोदित किया गया है।

को.शा.19235 ने मानक किस्म से 11.81% ज्यादा उपज दी

मध्य और देर से पकने वाली किस्म को.शा.19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। यह मानक किस्म को.शा.767 की 77.20 टन प्रति हेक्टेयर औसत उपज से 11.81 प्रतिशत अधिक है। नवंबर, जनवरी और मार्च में इसका पोल प्रतिशत केन क्रमशः 11.89, 13.07 और 13.74 प्रतिशत रहा। मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में ये आंकड़े क्रमशः 0.88, 0.58 और 0.38 प्रतिशत अधिक हैं। इस किस्म की पेड़ी उपज 73.90 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म से 11.36 प्रतिशत अधिक है। को.शा.19235 को भी पूरे उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुमोदित किया गया है।

को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर

मध्य और देर से पकने वाली किस्म को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही। यह मानक किस्म को.शा.767 की तुलना में 26.51 प्रतिशत अधिक है। नवंबर, जनवरी और मार्च में इसका पोल प्रतिशत केन क्रमशः 11.57, 12.87 और 14.05 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं इसकी पेड़ी की औसत उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.शा.767 के मुकाबले 23.70 प्रतिशत अधिक है।

8 नोटिफाइड किस्में भी प्रदेश में खेती के लिए अपनाई गईं

समिति ने भारत सरकार द्वारा नोटिफाइड 8 गन्ना किस्मों को भी उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अंगीकृत किया है। इनमें को.16030, को.17018, को.पी.18122, को.पी.11438, को.लख.16466, को.पी.17215, को.पी.18109 और को.पी.18213 शामिल हैं। इनमें अगेती के साथ मध्य और देर से पकने वाली किस्में भी शामिल हैं। प्रेस नोट के अनुसार को.पी.16437, को.पी.11438 और को.लख.16466 अगेती किस्में हैं। को.पी.16437 और को.पी.11438 को पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अपनाया गया है, जबकि अन्य नोटिफाइड किस्मों में कुछ को पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए निर्धारित किया गया है।

6 पुरानी किस्में अगले दो साल में होंगी चरणबद्ध बाहर

बैठक में पुरानी और कम लोकप्रिय गन्ना किस्मों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का फैसला भी किया गया। को.शा.95255, को.शा.97264, को.शा.96275, को.शा.97261, को.से.96436 और को.शा.98231 को अनुपयुक्त घोषित करते हुए अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा को.शा.96246 और को.शा.98231 को अस्वीकृत करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

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