बच्चों की परवरिश के दौरान लगभग हर माता-पिता को उनके जिद्दी रवैये (Stubborn Behavior) का सामना करना पड़ता है। कभी खिलौनों के लिए जमीन पर लेट जाना, कभी खाना खाने से इनकार करना तो कभी मोबाइल फोन न मिलने पर रोना-धोना। ऐसे हालात में अक्सर पेरेंट्स अपना आपा खो देते हैं और बच्चों पर चिल्लाने या हाथ उठाने जैसी गलतियां कर बैठते हैं। बाल मनोवैज्ञानिकों (Child Psychologists) के अनुसार, गुस्सा या मारपीट बच्चे की जिद को खत्म करने के बजाय उसे और अधिक विद्रोही और आक्रामक बना देती है।
यदि आप बिना गुस्सा किए और बिना तनाव लिए अपने बच्चे की इस अड़ियल आदत को बदलना चाहते हैं, तो ये 4 आसान और आजमाई हुई पेरेंटिंग ट्रिक्स आपके लिए बेहद मददगार साबित होंगी:
1. हुक्म (Order) देने के बजाय सीमित विकल्प (Limited Choices) दें
जिद्दी बच्चे अपनी मर्जी और नियंत्रण (Control) चाहते हैं। जब आप उन्हें सीधे आदेश देते हैं कि "चलो तुरंत दूध पियो" या "अभी के अभी पढ़ाई करो", तो उनका पहला स्वाभाविक रिएक्शन 'ना' कहना होता है।
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ट्रिक: बच्चे को ऑर्डर देने के बजाय हमेशा 2 सीमित विकल्प पेश करें। उदाहरण के लिए— "आप दूध पीले वाले कप में पियोगे या नीले वाले कप में?" या "आप पहले मैथ्स का होमवर्क करोगे या ड्राइंग बनाओगे?"।
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फायदा: इससे बच्चे को लगता है कि फैसला उसने खुद लिया है और वह बिना किसी बहस या जिद के आपकी बात मान लेता है।
2. बच्चे की बात को ध्यान से सुनें और 'कनेक्शन' बनाएं (Listen & Connect First)
बच्चे अक्सर तब ज्यादा जिद करते हैं जब उन्हें लगता है कि उनकी बात या भावनाओं को कोई समझ नहीं रहा है।
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ट्रिक: जब बच्चा किसी बात पर अड़ जाए, तो तुरंत उसे डांटने के बजाय उसके आई-लेवल (आंखों के स्तर) पर झुककर बैठें। शांत आवाज में कहें, "मैं समझ रहा हूं कि आपका यह खिलौना लेने का बहुत मन है, लेकिन आज हम इसे नहीं खरीद सकते"।
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फायदा: जब बच्चे को यह एहसास होता है कि उसके माता-पिता उसकी बात सुन रहे हैं और उसकी भावना की कद्र कर रहे हैं, तो उसका गुस्सा और डिफेंसिव रवैया अपने आप शांत हो जाता है।
3. 'रिएक्शन' देने के बजाय उस पल को नॉर्मल होने दें (Don't Fuel the Fire)
जिद्दी बच्चों को अक्सर यह समझ आ जाता है कि रोने या चिल्लाने से पेरेंट्स परेशान होकर उनकी मांग मान लेते हैं।
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ट्रिक: जब बच्चा जिद में टेंट्रम (Tantrum) थ्रो कर रहा हो, तो उस समय बहस करने, समझाने या गुस्सा दिखाने से बचें। बस एक शांत और तटस्थ चेहरा बनाकर पास खड़े रहें ताकि वह सुरक्षित महसूस करे। जब उसका रोना और गुस्सा पूरी तरह शांत हो जाए, तब प्यार से गले लगाकर उसे सही और गलत का अंतर समझाएं।
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फायदा: इससे बच्चे को यह स्पष्ट संदेश जाता है कि जिद या गुस्से के दम पर वह अपनी कोई भी अनुचित मांग पूरी नहीं करवा सकता।
4. सकारात्मक व्यवहार की तुरंत तारीफ करें (Positive Reinforcement)
अक्सर माता-पिता बच्चे की गलतियों और जिद पर तुरंत डांटते हैं, लेकिन जब वह कोई अच्छा काम करता है या बिना कहे बात मान लेता है, तो उस पर ध्यान नहीं देते।
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ट्रिक: जब भी बच्चा बिना जिद किए समय पर खाना खाए, खिलौने समेटे या आपकी बात माने, तो तुरंत उसकी खुलकर तारीफ करें। आप कह सकते हैं— "आज आपने बहुत समझदारी दिखाई, मुझे आप पर गर्व है"।
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फायदा: बच्चों को अपने माता-पिता से सकारात्मक ध्यान (Attention) पाना बहुत पसंद होता है। जब उन्हें अच्छे व्यवहार के लिए शाबाशी मिलती है, तो वे अनजाने में ही अपनी जिद छोड़कर अच्छी आदतें दोहराने लगते हैं।