August 5, 2026

4,200 करोड़ की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के 20 दिन के भीतर सड़क धंसने की पांच घटनाएं, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल - Up18 News

लखनऊ: करीब 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार होकर हाल ही में जनता को समर्पित किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अपने उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर लगातार सामने आ रही गंभीर तकनीकी खामियों की वजह से सुर्खियों और चर्चाओं में आ गया है। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद महज 20 दिनों के ही भीतर अलग-अलग स्थानों पर सड़क की ऊपरी सतह धंसने और क्षतिग्रस्त होने की कुल पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद अब इसकी निर्माण गुणवत्ता और मॉनिटरिंग सिस्टम को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं, जिसके चलते भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस पूरे मामले की कड़ाई से समीक्षा शुरू कर दी है।

उद्घाटन के बाद से ही इस एक्सप्रेसवे पर लगातार तकनीकी खामियां देखने को मिल रही हैं। महज 20 दिनों के छोटे से अंतराल में उन्नाव जिले के कोरारी, बेगमखेड़ा, तूरी, जगेथा और किलोमीटर-64 के पास सड़क धंसने या सतह बैठने की कुल पांच अलग-अलग घटनाएं आधिकारिक तौर पर दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं के बाद इसकी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं और एनएचएआई ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

खासकर बरसात के मौसम के दौरान कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और सतह के बैठने की खबरें सामने आईं। हालांकि, हर बार संबंधित हिस्से की तत्काल मरम्मत करके यातायात को दोबारा बहाल कर दिया गया, लेकिन बार-बार सामने आ रही इन तकनीकी खामियों ने इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर एक बहुत बड़ी बहस छेड़ दी है।

​विशेषज्ञों की टीम करेगी तकनीकी निरीक्षण, कार्रवाई के संकेत

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक, अब एनएचएआई पूरे एक्सप्रेसवे का एक बार फिर से गहन तकनीकी निरीक्षण कराने की तैयारी में जुट गया है। जिन-जिन स्थानों पर बार-बार इस प्रकार की समस्याएं सामने आई हैं, वहां विशेष रूप से विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम भेजकर विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि इस जांच के दौरान निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की मौजूदा गति सीमा (स्पीड लिमिट) की भी नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। तकनीकी जांच पूरी होने तक कुछ संवेदनशील हिस्सों में वाहनों की स्पीड लिमिट को कम करने समेत अन्य सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके और यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके।

एनएचएआई का पक्ष और परियोजना के मुख्य आंकड़े

​दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर एनएचएआई का अपना स्पष्टीकरण सामने आया है। प्राधिकरण का कहना है कि जिन स्थानों पर नुकसान की खबरें आईं, वहां सड़क पूरी तरह से नीचे नहीं धंसी थी, बल्कि केवल सड़क की ऊपरी ‘वियरिंग कोट’ (सुरक्षात्मक परत) ही प्रभावित हुई थी। प्राधिकरण के दावों के अनुसार, प्रभावित हिस्सों की युद्धस्तर पर मरम्मत महज कुछ ही घंटों के भीतर पूरी कर ली गई थी और फिलहाल इस एक्सप्रेसवे पर आवागमन पूरी तरह से सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।

​आपको बता दें कि लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस छह-लेन एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन गत 13 जुलाई को किया गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में प्रति किलोमीटर लगभग 66 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू हो जाने से लखनऊ और कानपुर के बीच की दूरी तय करने में लगने वाला यात्रा का समय घटकर मात्र 35 से 45 मिनट के आसपास रह गया है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन शुरुआती कुछ ही दिनों के भीतर सामने आई इन घटनाओं ने इसकी निर्माण गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।