July 28, 2026

पीएम सूर्य घर योजना के तहत 39.7 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित, 48 लाख से ज्यादा परिवारों को मिला लाभ: सरकार

पीएम सूर्य घर योजना के तहत 39.7 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित, 48 लाख से ज्यादा परिवारों को मिला लाभ: सरकार

पीएम सूर्य घर योजना के तहत 39.7 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित, 48 लाख से ज्यादा परिवारों को मिला लाभ: सरकार

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IANS

28 Jul 2026

19:30 IST

New Update

Over 39.7 lakh rooftop solar systems installed under PM Surya Ghar scheme: Minister

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक देश भर में 39,72,447 रूफटॉप सोलर (आरटीएस) सिस्टम लगाए जा चुके हैं। योजना की शुरुआत फरवरी 2024 से अब तक 48,02,717 परिवारों को इसका लाभ मिला है, जिनमें ग्रामीण परिवार भी शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही 18.71 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए गए, जिससे 6.7 गीगावाट (जीडब्ल्यू) की अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ी। इस अवधि में 22.71 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिला।

राज्यसभा में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने बताया कि योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है।

देश भर के डिस्कॉम की रिपोर्ट के अनुसार 18.93 लाख से अधिक लाभार्थियों, जिनमें ग्रामीण परिवार भी शामिल हैं, को कम से कम एक बिलिंग अवधि के दौरान शून्य बिजली बिल प्राप्त हुआ।

उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना एक डिमांड-ड्रिवन योजना है, जिसके तहत देश का कोई भी आवासीय उपभोक्ता, जिसके पास स्थानीय डिस्कॉम का ग्रिड से जुड़ा बिजली कनेक्शन है, योजना का लाभ उठा सकता है। योजना के तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए आवेदन राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है।

मंत्री ने बताया कि यह योजना केवल आवासीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसके तहत सरकारी भवनों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य संस्थानों में भी रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का प्रावधान है। हालांकि, इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) नहीं दी जाती, क्योंकि इनके लिए रूफटॉप सोलर परियोजनाएं बिना सरकारी सहायता के भी आर्थिक रूप से व्यवहार्य मानी जाती हैं।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत में बिजली की अतिरिक्त मांग का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होने की संभावना है। वहीं, लगभग 25 प्रतिशत अतिरिक्त मांग पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे अन्य कम-कार्बन स्रोतों से पूरी होने का अनुमान है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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