August 28, 2026

धारा 370 पर JKNC में घमासान, सांसद आगा रूहुल्लाह ने नेतृत्व से पूछे सवाल

धारा 370 पर JKNC में घमासान, सांसद आगा रूहुल्लाह ने नेतृत्व से पूछे सवाल

सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी और उमर अब्दुल्ला.

श्रीनगर के लोकसभा के सांसद और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) केनेता आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने धारा 370 को फिर से लागू करने पर पार्टी नेतृत्व के स्टैंड पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सिर्फ राज्य के हक में संवैधानिक गारंटी को फिर से लागू करने की मांग को नहीं छोड़ा जा सकता. पार्टी नेतृत्व को लिखे एक पत्र में, मेहदी ने 25 अगस्त को एक प्रेस बयान में की गई बातों का जिक्र किया, जिसमें नेतृत्व ने सवाल किया था कि लोग कब तक गुलाम रहेंगे और उनसे अपने पैरों पर खड़े होने की अपील की थी.

मेहदी ने कहा कि ये बातें जम्मू-कश्मीर में कई लोगों की निराशा को दिखाती है. खासकर इस सोच को लेकर कि इस इलाके की मांगों को केंद्र में बीजेपी की नेतृत्व वाली सरकार के सामने गिड़गिड़ाकर पूरा किया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि जब उन्होंने ऐसे ही मुद्दे उठाए तो उसी राजनीतिक स्थिति की बुराई क्यों की जा रही थी.

मेहदी ने पत्र में कहा, मैं यह मानने से इनकार करता हूं कि आपका बयान सिर्फ पब्लिक कंजम्पशन के लिए खोखला दिखावा है, जबकि आपकी पॉलिटिक्स कुछ और ही दिखाती है, और कहा कि ऐसी स्थिति उनके लिए पर्सनली निराशाजनक होगी.

धारा 370 पर भीख मांगने वाली टिप्पणी पर सवाल

उन्होंने कहा कि आप 370 चाहते हैं, लेकिन दिल्ली से भीख मांगते हैं. इस बयान का जिक्र करते हुए मेहदी ने कहा कि धारा 370 को बहाल करने की मांग कोई गलत राजनीतिक स्थिति नहीं थी.

Rest assured, the resignation will come. It would have come even without you asking but before that must come accountability.

I have written a letter to my party President, Janab Dr. Farooq Abdullah in response to his public demand for my resignation. Awaiting his response to pic.twitter.com/R9V1DUFUL9

— Aga Syed Ruhullah Mehdi (@RuhullahMehdi) August 28, 2026

उन्होंने बताया कि धारा 370 को बहाल करना भाजपा के 2024 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी शामिल था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान से जुड़े संवैधानिक इतिहास को मान्यता दी थी. मेहदी के अनुसार, इसलिए JKNC की स्थिति को उस स्थिति से बिल्कुल अलग नहीं माना जाना चाहिए जो उसने खुद पहले ली थी.

उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर की पॉलिटिकल उम्मीदों की बाहरी सीमा के तौर पर राज्य का दर्जा मानना, अगस्त 2019 में किए गए संवैधानिक बदलावों को सही ठहराने और नॉर्मल बनाने जैसा हो सकता है.

धारा 370 पर नेशनल कॉन्फ्रेंस में घमासान

मेहदी ने कहा कि पार्टी आर्टिकल 370 और 35A को फिर से लागू करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन अब वह राज्य के दर्जे को मुख्य पॉलिटिकल मकसद के तौर पर पेश कर रही है. उन्होंने इस तर्क का जिक्र किया कि जिस सरकार ने आर्टिकल 370 को हटाया, वही इसे कभी वापस नहीं लाएगी, और सवाल किया कि क्या इस तरह का तर्क बड़ी मांग को छोड़ने के लिए काफी है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ पॉलिटिकल पोजीशनिंग का नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की इज्ज़त, संवैधानिक गारंटी और अधिकारों से जुड़ा है.

मेहदी ने रोज़गार के मौकों, जमीन, प्राकृतिक संसाधनों, धार्मिक अधिकारों, परंपराओं, भाषा और पर्यावरण सुरक्षा पर भी बड़ी चिंताएं उठाईं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवा है और रोजगार और मौकों को लेकर अनिश्चितता एक बड़ी चिंता बनती जा रही है. मेहदी ने कहा, चुने हुए प्रतिनिधियों के तौर पर हमारा काम इस लगातार गिरावट और अमानवीयता से लड़ना है — न कि अपनी उम्मीदों को BJP जो मानने को तैयार है, उसके हिसाब से बदलना.

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मेहराज अहमद

मेहराज अहमद

पत्रकारिता में 12 से अधिक साल से कार्यरत. शुरुआत रिजिनल चैनल के बाद इंडिया न्यूज, टीवी9 नेटवर्क, न्यूज़18 आईबीएन खबर, अमर उजाला, ईटीवी भारत वर्तमान में tv9 Bharatvatsh (tv9 hindi.com) का हिस्सा हूं. मानवाधिकार, आतंकवाद-रोधी जैसे मुद्दों पर रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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