October 3, 2026

357 साल बाद एक हुए बिछड़े खानदान के लोग: ब्राह्मण पर‍िवार में कुछ हो चुके थे मुस्‍ल‍िम, जौनपुर में नौशाद अहमद दुबे के घर हुआ भोज - Jaunpur News

अंकित श्रीवास्तव | जौनपुर4 घंटे पहले

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जौनपुर में 357 साल बाद एक ही कुल के बिछड़े परिवारों का मिलन हुआ। काशी और जौनपुर से पहुंचे ब्राह्मण परिवार के लोगों ने नौशाद अहमद दुबे के घर भोजभात किया। उन्हें अपने कुल का बड़ा मानकर सम्मानित किया।

परिवार के मुताबिक 1669 में मुगल शासक औरंगजेब के दौर में परिस्थितियों के चलते उनके पूर्वज अलग हो गए थे। नौशाद अहमद दुबे ने बताया कि उनसे आठ पीढ़ी पहले के पूर्वज लाल बहादुर दुबे आजमगढ़ के रानी की सराय के रहने वाले थे। लंबे समय बाद परिवार की बिछड़ी कड़ियां जुड़ने पर मिलन का माहौल भावुक हो गया।

शनिवार को दोपहर 2 बजे नौशाद अहमद दूबे ने भोज का आयोजन किया, जिसमें परिवार के लोगों ने एक साथ बैठकर खाना खाया। फिर कभी न बिछड़ने का संकल्प लिया। मामला केराकत क्षेत्र के डेहरी गांव का है।

नौशाद ने कहा- समाज के एकत्र के बिना देश का विकास नहीं हो सकता है।

नौशाद ने कहा- समाज के एकत्र के बिना देश का विकास नहीं हो सकता है।

पढ़िए पूरा मामला…

बेटी की शादी के कार्ड से शुरू हुई रिश्तों की तलाश

जौनपुर जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर डेहरी गांव है। यहां की आबादी 10 हजार है। जिसमें 50-50 प्रतिशत हिंदू और मुस्लिम परिवार हैं। इसी गांव में नौद अहमद दूबे का भी परिवार रहता है।

परिवार के अनुसार, नौशाद अहमद दूबे के आठ पीढ़ी पहले के पूर्वज लाल बहादुर दूबे आजमगढ़ के रानी की सराय में रहते थे। 1669 में उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया और बाद में जौनपुर के डेहरी गांव में आकर बस गए। परिवार के बाकी भाई और रिश्तेदार रानी की सराय छोड़कर जौनपुर और पूर्वांचल के दूसरे जिलों में फैल गए।

357 साल बाद नौशाद अहमद दूबे ने अपनी बेटी की शादी के कार्ड पर ‘दूबे’ उपनाम लिखा। इसके बाद बिखरे परिवार के लोगों ने अपने पूर्वजों की तलाश शुरू की। लाल बहादुर दूबे का नाम सामने आने पर कई हिंदू ब्राह्मण परिवारों का नौशाद अहमद दूबे से रिश्ता जुड़ गया।

शनिवार को 357 साल बाद खानदान के बिछड़े हुए लोग एक-दूसरे से मिले।

शनिवार को 357 साल बाद खानदान के बिछड़े हुए लोग एक-दूसरे से मिले।

4 साल की खोज के बाद मिले रिश्तेदार

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी तथा उनकी रिसर्च टीम ने परिवार के इतिहास और रिश्तेदारों की तलाश में अहम भूमिका निभाई। चार साल की मेहनत के बाद पूर्वांचल के कई परिवारों से रिश्तों की कड़ियां जुड़ीं।

जौनपुर के शैलेंद्र शुक्ल ने बताया कि नौशाद अहमद दूबे उनकी बुआ की तरफ से रिश्तेदार हैं। वहीं, वाराणसी के विवेक मिश्रा ने कहा कि नौशाद अहमद दूबे उनके ननिहाल पक्ष से हैं और उनके मामा लगेंगे।

एक पंक्ति में बैठे रिश्तेदार, मुस्लिम परिवार ने परोसा भोजन

पूर्वांचल में बिछड़े रिश्तों को जोड़ने के लिए भोजभात की परंपरा है। इसी परंपरा के तहत नौशाद अहमद दूबे ने अपने बिछड़े रिश्तेदारों को भोज पर आमंत्रित किया। कार्यक्रम में ब्राह्मण समुदाय के लोग एक पंक्ति में बैठे और मुस्लिम परिवार के सदस्यों ने उन्हें भोजन परोसा। भोजन के बाद परिवार के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और भविष्य में संपर्क बनाए रखने तथा फिर न बिछड़ने का संकल्प लिया।

बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत प्रभु रामदास ने कहा कि परिवार के सभी लोग खून, खानदान और रिश्ते से एक हैं। कोई भी पूजा पद्धति खून के रिश्ते को अलग नहीं कर सकती। उन्होंने नौशाद अहमद दूबे को परिवार का बड़ा बताते हुए उनके प्रति आदर-सम्मान बनाए रखने की बात कही।

जौनपुर से पहुंचे ब्राह्मण रिश्तेदारों का नौशाद अहमद दूबे ने स्वागत किया गया।

जौनपुर से पहुंचे ब्राह्मण रिश्तेदारों का नौशाद अहमद दूबे ने स्वागत किया गया।

विजय शर्मा ने गौशाला का उद्घाटन किया

इस पारिवारिक मिलन के साक्षी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक एवं केंद्रीय अधिकारी विजय शर्मा भी बने। नौशाद अहमद दूबे के आमंत्रण पर पहुंचे विजय शर्मा ने उनके गोत्र के नाम पर स्थापित श्री वत्स गौशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने नौशाद अहमद दूबे के पूर्वज लाल बहादुर दूबे के नाम पर बने मार्ग का भी अवलोकन किया।

अपनी जड़ों से जुड़ने पर जोर

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि बिछड़े खानदान के लोगों का यह मिलन नौशाद अहमद दूबे के प्रयासों से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने पर बिछड़े रिश्तेदारों को खोजा जा सकता है और ऐसे प्रयास सामाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं।

कुटुंब प्रबोधन के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. शुकदेव त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास की घटनाओं ने परिवार को अलग कर दिया था, लेकिन सभी एक ही पूर्वजों की संतान हैं और उनकी परंपराएं भी साझा हैं।

पंक्ति में बैठाकर रिश्तेदारों को नौशाद ने परिवार को भोजन कराया।

पंक्ति में बैठाकर रिश्तेदारों को नौशाद ने परिवार को भोजन कराया।

महंत प्रभु रामदास ने कहा कि परिवार के लोग एक मां की संतान हैं। उनके मुताबिक, इस मिलन ने धार्मिक पहचान से आगे बढ़कर पारिवारिक रिश्तों को महत्व देने का संदेश दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना भारतवंशी ने किया। अंत में नौशाद अहमद दूबे ने सभी अतिथियों और रिश्तेदारों का आभार जताया।

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