जब भी रेगिस्तान का नाम आता है तो आमतौर पर राजस्थान के गर्म और रेतीले इलाकों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन भारत में एक ऐसा भी रेगिस्तानी इलाका है, जहां गर्मी के बजाय कड़ाके की ठंड पड़ती है। इसे भारत के प्रमुख ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में गिना जाता है और सर्दियों में यहां तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की जानकारी मिलती है।
कहां मौजूद है भारत का ठंडा रेगिस्तान?
भारत का सबसे ऊंचा ठंडा रेगिस्तान लद्दाख के लेह जिले में स्थित माना जाता है। यह इलाका समुद्र तल से करीब 3,000 से 3,500 मीटर यानी 10,000 से 11,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर फैला है। ऊंचाई, बेहद कम बारिश और शुष्क जलवायु के कारण यहां का भूगोल देश के गर्म रेगिस्तानी इलाकों से बिल्कुल अलग नजर आता है।
माइनस 35 डिग्री तक पहुंच जाता है तापमान
लेह के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान तापमान काफी नीचे चला जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कई परिस्थितियों में तापमान माइनस 20 से माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। बेहद कम नमी और ऊंचाई के कारण सर्दियों का मौसम यहां काफी कठोर रहता है।
बारिश इतनी कम क्यों होती है?
लेह और लद्दाख का बड़ा हिस्सा हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के पीछे स्थित है। मानसूनी हवाओं को ऊंचे पहाड़ों के कारण यहां पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बारिश बहुत कम होती है। कम वर्षा और बेहद कम तापमान के कारण यहां प्राकृतिक वनस्पति भी सीमित दिखाई देती है।
रेगिस्तान में रेत के टीले भी
लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान की खासियत यह है कि यहां बर्फीले पहाड़ों के बीच रेतीले इलाके भी दिखाई देते हैं। नुब्रा घाटी में रेत के टीलों के साथ दो-कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट भी देखने को मिलते हैं। यही विरोधाभासी प्राकृतिक दृश्य इस क्षेत्र को खास बनाते हैं।
लद्दाख के प्रमुख पर्यटन स्थल
लेह और आसपास के इलाके प्राकृतिक सुंदरता के साथ ऐतिहासिक और बौद्ध संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध हैं। पेंगोंग त्सो, लेह पैलेस, हेमिस मठ, थिकसे मठ और डिस्किट मठ यहां के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। ऊंचे पहाड़, सूखी घाटियां, बर्फ और रेतीले क्षेत्र मिलकर इस इलाके को एक अलग ही रूप देते हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि भारत में ठंडे रेगिस्तान केवल लद्दाख तक सीमित नहीं हैं। हिमाचल प्रदेश का लाहौल-स्पीति और किन्नौर भी ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों के रूप में जाने जाते हैं। इसलिए माइनस 35 डिग्री वाला आंकड़ा पूरे भारत के हर ठंडे रेगिस्तान का स्थायी तापमान नहीं है, बल्कि अत्यधिक सर्द परिस्थितियों में दर्ज होने वाले तापमान को दर्शाता है।