September 23, 2026

आशीष ने भास्कर से साझा किए अनसुने अनुभव: 35 साल में ऐसे बना राम मंदिर - 3डी फाइल इतनी बड़ी कि अमेरिका में डिजिटल वीडियो बनवाना पड़ा था - Bhopal News

भोपाल26 मिनट पहलेलेखक: निधि सिंह

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अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद उसकी भव्यता दुनिया ने देखी, लेकिन इसके नक्शे से लेकर गर्भगृह में रामलला की स्थापना तक कई ऐसी कहानियां हैं, जो सामने नहीं आ सकीं। मंदिर का काम सोमपुरा परिवार को 1989-90 में मिला था। इसके बाद करीब 35 साल की इस यात्रा में कभी 3डी मॉडल ने तकनीकी चुनौती खड़ी की तो कभी गर्भगृह में रामलला की स्थापना के दौरान घंटों बारीकी से काम करना पड़ा।

राम मंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा विज्ञान मेले में शामिल होने मंगलवार को भोपाल आए। उन्होंने भास्कर से खास बातचीत में इस पूरी यात्रा के अनुभव साझा किए। मालूम हो आशीष और उनके पिता पद्मश्री आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा ने मिलकर राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया है।

जब रामलला विराजे, हम वहीं बैठ गए... लगा, 35 साल की मेहनत को अर्थ मिल गया

1989-90 में जब राम मंदिर का काम हमारे परिवार को मिला, तब अंदाजा नहीं था कि यह इतने बड़े ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व का केंद्र बनेगा। हमारा परिवार लंबे समय से मंदिर बनाता आया है, इसलिए शुरुआत में यह भी दूसरे मंदिरों जैसा काम था। पर आंदोलन बढ़ा, लोगों की आस्था सामने आई तो जिम्मेदारी भी बढ़ती गई। मन में था कि मंदिर ऐसा बने, जहां लोगों को लगे कि वे वास्तव में रामलला के घर आए हैं।

हमने राम मंदिर का 3डी मॉडल बनाया। इसके बाद ऐसा डिजिटल स्वरूप तैयार करना था, जिसमें मंदिर के भीतर घूमकर भी देखा जा सके। फाइल इतनी बड़ी थी कि हमारे सिस्टम पर यह काम मुश्किल हो गया। इसलिए इसे अमेरिका के लॉस एंजेलिस भेजकर वीडियो बनवाना पड़ा।

इससे समझ आया कि नई टेक्नोलॉजी के साथ सिस्टम की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। पत्थर चुनते समय मजबूती, नक्काशी और लंबे समय तक टिकने की क्षमता देखी। हम गांधीनगर के अक्षरधाम में भी ऐसे बलुआ पत्थर पर काम कर चुके थे। इसके महीन दानों पर नक्काशी अच्छी उभरती है। दूसरे विकल्प भी देखे।

संतों को नमूने दिखाए और उनकी सहमति के बाद पत्थर चुना। मेरे लिए सबसे भावुक क्षण रामलला की मूर्ति की स्थापना थी। गर्भगृह में उनकी दृष्टि, दिशा और ऊंचाई डिजाइन के मुताबिक तय करने में 3-4 घंटे लगे। जब सब कुछ वैसा हो गया, जैसा तय किया था, तो हम वहीं बैठ गए। उसी शाम एक महिला ने कहा- ‘भैया, आपने मेरे लल्ला को घर दे दिया।’ महसूस हुआ कि जिसे हम इतने वर्षों से आकार दे रहे थे, वह इमारत नहीं, रामलला का घर था।’ -आशीष सोमपुरा

राम मंदिर से आगे क्या?

ऑस्ट्रेलिया में 700, गुजरात में 425 फीट ऊंचा मंदिर बनेगा

सोमपुरा के मुताबिक, परिवार अब दूसरे बड़े मंदिरों पर काम कर रहा है। अहमदाबाद में 425 फीट ऊंचे मंदिर का प्रोजेक्ट है। ऑस्ट्रेलिया में करीब 700 फीट ऊंचे मंदिर की योजना पर भी काम चल रहा है। उनके मुताबिक एआई से मंदिर डिजाइन करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, पर मंदिर वास्तुकला की गणनाएं इतनी जटिल हैं कि सभी बारीकियों को एआई में शामिल करना आसान नहीं है।

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