July 13, 2026

सदर अस्पताल में 35 के बजाय 16 डॉक्टर ही कार्यरत, रोज 700 मरीजों का होता है इलाज - Gumla News

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जिला अस्पताल का दर्जा प्राप्त सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था डॉक्टरों की भारी कमी के कारण चरमरा गई है। अस्पताल में स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से भी कम डॉक्टर कार्यरत हैं। जिससे विभिन्न विभागों में आने वाले मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस अस्पताल पर शहर की सिर्फ 60 हजार आबादी ही नहीं बल्कि जिले के सभी 12 प्रखंडों के मरीज आश्रित है। अस्पताल में रोजाना 600 से 700 मरीज इलाज के लिए आते है। लेकिन नियमित और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। सदर अस्पताल में विभिन्न विभागों को मिलाकर कुल 35 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। हालांकि इसके मुकाबले वर्तमान में केवल 16 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। जबकि 19 पद पूरी तरह से रिक्त पड़े हैं। इसका सीधा मतलब है कि अस्पताल 50 फीसदी से भी कम क्षमता के साथ काम कर रहा है। शिशु रोग व मनोचिकित्सक तक नहीं है। जिससे मरीज परेशान है।

सदर अस्पताल में कई महत्वपूर्ण विभागों में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। जिससे आपातकालीन और विशेषज्ञ सेवाएं ठप पड़ी हैं। यहां महिला चिकित्सा पदाधिकारी का एक पद है, जो रिक्त है। एनेस्थेटिस्ट का दो पद है। यह भी खाली है। मनोचिकित्सक से जुड़ा एक स्वीकृत पद रिक्त है। रेडियोलॉजिस्ट के लिए स्वीकृत एक पद खाली है। इसी प्रकार शिशु रोग विशेषज्ञ के लिए दो पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में एक भी डॉक्टर कार्यरत नहीं है। चिकित्सा पदाधिकारी के लिए 11 पद स्वीकृत हैं। लेकिन केवल 4 डॉक्टर ही कार्यरत हैं और 7 पद खाली हैं। फिजिशियन, सर्जन, पैथोलॉजिस्ट, नेत्र सर्जन और ऑर्थोपेडिक सर्जन में दो-दो पद स्वीकृत हैं। लेकिन सभी में केवल एक-एक डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं। जिससे मरीजों की लंबी कतार लगती हैं। अस्पताल अनुबंध और प्रतिनियुक्ति वाले डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। अनुबंध पर मानसिक विभाग में डॉ. शारिख अहमद और बर्न इकाई में डॉ. दीपक कुमार कार्यरत हैं। डॉ. राहुल देव उरांव शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ. रोशन खलखो व डॉ. रैना सोनाली भेंगरा चिकित्सा पदाधिकारी और डॉ. सौरभ कुमार दंत चिकित्सक के रूप में यहां सेवा दे रहे हैं। ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों को सदर अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण बैरंग लौटना पड़ रहा है। विशेषकर शिशुओं के इलाज, प्रसव से जुड़ी समस्याओं और बड़े ऑपरेशनों के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है या फिर रिम्स रांची रेफर होना पड़ रहा है। समाजसेवी हरजीत सिंह, बबलू वर्मा, विनोद विश्वकर्मा उर्फ मुन्ना, शैल मिश्रा व ललिता गुप्ता आदि ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने की मांग की है ताकि मरीजों को समुचित इलाज का लाभ मिल सके। डीएस डॉक्टर अनूपम किशोर ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। समस्या से विभाग को कई बार अवगत कराया गया है। पत्राचार किया जा चुका है। लेकिन अब तक डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति नहीं हुई है। फिलहाल उपलब्ध चिकित्सकों व संसाधनों की बदौलत बेहतर सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है।