विदिशा में राधाष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर प्राचीन राधारानी मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। करीब 338 साल पुरानी परंपरा के तहत मंदिर के पट साल में सिर्फ एक दिन राधाष्टमी पर आम भक्तों के लिए खोले जाते हैं। दोपहर में
.

सालभर गुप्त रूप से होती है राधारानी की पूजा
मंदिर की खास परंपरा के अनुसार सालभर राधारानी की छिपाकर पूजा की जाती है। आम भक्तों को साल में सिर्फ एक दिन राधाष्टमी पर ही दर्शन मिलते हैं। इसी वजह से राधाष्टमी पर विदिशा के अलावा आसपास के इलाकों और दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंदवाना पहुंचते हैं।
पुजारी के अनुसार यह परंपरा करीब 338 साल पुरानी है। वर्ष 1670 के आसपास औरंगजेब के शासनकाल में ब्रज के मंदिरों पर हमले हुए थे। उस समय राधारानी की मूर्ति को बचाने के लिए उनके पूर्वज मूर्ति लेकर वृंदावन से निकल गए थे। कई दिनों की कठिन यात्रा के बाद वे विदिशा पहुंचे।
यहां सुरक्षित स्थान देखकर उन्होंने मूर्ति की स्थापना की और छिपाकर पूजा शुरू की। उनके परिवार की आठवीं-नौवीं पीढ़ी आज भी मंदिर की सेवा और पूजा परंपरा से जुड़ी है। शुरुआत में मूर्ति खुले में स्थापित थी, बाद में उसे हवेली में रखा गया। समय के साथ यही हवेली मंदिर में बदल गई। हालांकि, साल में सिर्फ एक दिन आम भक्तों को दर्शन कराने की परंपरा आज भी जारी है।

50 हजार से एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
पुजारी ने बताया कि राधाष्टमी पर मंदिर में करीब 50 हजार से एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भक्तों की भीड़ दिखाई दी। पट खुलने के बाद श्रद्धालुओं ने राधारानी के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
नंदवाना क्षेत्र की एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से लगातार राधारानी के दर्शन के लिए मंदिर आती हैं। श्रद्धालुओं का कहना था कि साल में केवल एक बार दर्शन मिलने के कारण उन्हें राधाष्टमी का पूरे साल इंतजार रहता है।

अगले दिन पालना दर्शन, फिर पूरे साल बंद रहेंगे पट
मंदिर की परंपरा के अनुसार राधाष्टमी के अगले दिन पालना दर्शन होंगे। इसके बाद संगीत और राधारानी की बधाई गायन का आयोजन किया जाएगा। शयन आरती के बाद मंदिर के पट फिर पूरे साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
पुजारी ने बताया कि देश में बरसाना के बाद विदिशा का यह प्राचीन राधारानी मंदिर अपनी विशेष परंपरा के लिए जाना जाता है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। राधाष्टमी के मौके पर कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मंदिर पहुंचते हैं।