भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और आईटी, फार्मा तथा मेटल शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए। दो दिन की कमजोरी के बाद रक्षाबंधन पर बाजार की इस वापसी ने निवेशकों को कुछ राहत दी।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी तेजी आई?
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 330.92 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ। इससे पहले यह 76,933.59 पर बंद हुआ था और शुक्रवार को 77,128.05 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 424.38 अंक तक चढ़कर 77,357.97 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। हालांकि, एक समय यह 76,988.22 तक भी फिसला। एनएसई निफ्टी 50 भी 84.80 अंक यानी 0.35 प्रतिशत बढ़कर 24,175.65 पर बंद हुआ।
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आईटी शेयरों ने बाजार को कैसे संभाला?
शुक्रवार की तेजी में आईटी शेयर सबसे आगे रहे। निफ्टी आईटी में 3.51 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की गई। टीसीएस, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक और विप्रो निफ्टी 50 के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल, हेल्थकेयर, फार्मा, मीडिया और पीएसयू बैंक में भी तेजी रही। दूसरी ओर निफ्टी केमिकल्स, सीमेंट, एफएमसीजी, फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटो में गिरावट दर्ज की गई।
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किन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल रही?
दिन के कारोबार में टीसीएस, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक और विप्रो के शेयरों ने निवेशकों का ध्यान खींचा और ये प्रमुख बढ़ने वाले शेयर रहे। इसके उलट आईसीआईसीआई बैंक, श्रीराम फाइनेंस, आईटीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.05 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.20 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही। यानी तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, लेकिन व्यापक बाजार में इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही।
क्या बाजार की यह तेजी आगे भी टिकेगी?
बाजार में शुक्रवार की रिकवरी से राहत जरूर मिली, लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं मानी जा रही है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के भाषण से पहले उसकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बाजार पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा गुरुवार को मासिक एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सत्र में हुई तेज उठापटक ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। आगे वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमत और संस्थागत निवेशकों का पैसा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।