September 21, 2026

दिल्ली के 33 लाख वोटरों को क्यों मिला चुनाव आयोग का नोटिस? क्या अब कट जाएगा नाम, हर एक डिटेल जानें

Time Updated: Monday, September 21, 2026, 11:18 [IST]

Delhi SIR Voter List Notice: दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के पहले दौर के बाद 31 अगस्त को जब चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की, तो इसमें बहुत बड़ा खुलासा हुआ। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के डेटा से पता चलता है कि ड्राफ्ट रोल में मौजूद करीब 33.1 लाख वोटरों को गड़बड़ियों की वजह से नोटिस भेजे गए हैं। इनमें सबसे बड़ी वजह पुरानी वोटर लिस्ट से डेटा का मैच न होना है। इसके अलावा नाम की गलतियों और उम्र के अजीबोगरीब अंतर भी सामने आए हैं।

हर विधानसभा क्षेत्र में नोटिस पाने वाले वोटरों का अनुपात एक जैसा नहीं है। मटिया महल में यह हिस्सा करीब 22.7 फीसदी है, जबकि बदरपुर में करीब 44.2 फीसदी वोटर नोटिस सूची में हैं। यानी दोनों क्षेत्रों के बीच काफी अंतर है।

Delhi SIR 33 lakh voters notice

नोटिस मिलने की सबसे बड़ी वजह: पिछले डेटा से मैपिंग न होना

चुनाव आयोग की तरफ से जारी आंकड़ों को देखें तो कुल नोटिसों में से 42% मामले (लगभग 13.8 लाख वोटर) सिर्फ इसलिए फंसे हैं क्योंकि उनका रिकॉर्ड पुरानी SIR लिस्ट से मैच ही नहीं हुआ। जिन 31.1 लाख वोटरों को सिर्फ एक सिंगल वजह से नोटिस मिला है, उनमें यह सबसे बड़ा कारण है।

मतलब यह नहीं है कि इन लोगों का नाम गलत या फर्जी साबित हो गया। रिकॉर्ड का पुराने डेटा से लिंक नहीं होना जांच का आधार बना है। चुनाव अधिकारियों ने भी साफ किया है कि नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटने का फैसला नहीं है। संबंधित व्यक्ति को जवाब और दस्तावेज देने का मौका मिलेगा। इसके अलावा करीब 59,791 नोटिस ऐसे भी हैं जिनके सामने कोई वजह ही नहीं लिखी गई है। बाकी 4% लोगों को दो या उससे ज्यादा गड़बड़ियों के चलते नोटिस भेजे गए हैं।

Delhi SIR 33 lakh voters notice

नाम और उम्र का अजीब चक्कर: 41% मामलों में नाम का स्पेलिंग मैच नहीं

नोटिस का दूसरा बड़ा कारण नाम की गलती है, जो कुल मामलों का 41% हिस्सा है। इसमें माता-पिता के नाम में गड़बड़ी के 24% और खुद के नाम में फर्क के 17% मामले शामिल हैं। एसआईआर में परिवार के सदस्यों की उम्र का अंतर भी जांच का हिस्सा बना। करीब 16 फीसदी नोटिस उम्र से जुड़े अंतर की वजह से हैं। इनमें बच्चे के जन्म के बीच 9 महीने से कम का अंतर, माता-पिता और बच्चे की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा का अंतर, और दादा-दादी तथा पोते-पोतियों की उम्र के बीच असामान्य अंतर जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

अकेले 9 महीने से कम के जन्म अंतर वाले मामले करीब 6.4 फीसदी, माता-पिता की उम्र के 15 साल से कम अंतर वाले मामले 5 फीसदी, 50 साल से ज्यादा के अंतर वाले मामले 2.5 फीसदी और दादा-दादी से जुड़े 40 साल से कम उम्र अंतर वाले मामले करीब 2.3 फीसदी हैं। करीब 1.4 लाख लोग ऐसे भी हैं, जिनके रिकॉर्ड में छह या उससे ज्यादा बच्चों से जुड़ी जानकारी चिन्हित हुई। वहीं 182 लोगों के रिकॉर्ड में पिछले एसआईआर के दौरान माता-पिता की पात्रता से जुड़ी आपत्ति दर्ज है।

125 साल के बुजुर्ग को भी नोटिस, जानिए उम्र और इलाके का पूरा गणित

डेटा विश्लेषण दिखाता है कि नोटिस पाने वाले वोटरों की औसत (मीडियन) उम्र 40 साल है। इनमें 20% वोटर 54 साल या उससे ऊपर के हैं और 10% लोग 62 साल या उससे बड़े हैं। सबसे दिलचस्प मामला सदर बाजार विधानसभा सीट के श्याम मुखीजा का है, जो 125 साल के हैं और उन्हें नाम के फर्क के लिए नोटिस भेजा गया है। अगर इलाकों की बात करें तो मटिया महल विधानसभा सीट में सबसे कम (22.7%) वोटरों को नोटिस मिला, जबकि बदरपुर विधानसभा में सबसे ज्यादा (44.2%) वोटरों को नोटिस थमाया गया है।

महिलाओं और पुरुषों में किसे मिले ज्यादा नोटिस?

लिंग के आधार पर देखें तो ड्राफ्ट रोल में मौजूद 34.5% पुरुष वोटरों को नोटिस मिला है, जबकि महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 33.4% है। वहीं ट्रांसजेंडर कैटेगरी में दर्ज 447 वोटरों में से आधे लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। राजधानी के कुल 14,947 पोलिंग बूथों में से केवल 4 बूथ ऐसे रहे जहां 20 सितंबर की शाम तक किसी को नोटिस नहीं मिला था। हालांकि आयोग की इस पूरी कवायद का मकसद दिल्ली की वोटर लिस्ट को एकदम साफ-सुथरा और फर्जीवाड़े से मुक्त बनाना है।

क्या हर नोटिस का मतलब वोटर लिस्ट से नाम काटना है?

नहीं, चुनाव आयोग ने साफ किया है कि नोटिस जारी होना नाम हटाने का अंतिम फैसला नहीं है। मतदाता संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या बूथ स्तर के अधिकारी के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज दे सकता है। इसके बाद मामले की अलग-अलग जांच होगी। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नोटिस के मामलों का निपटारा 29 अक्टूबर तक होना है और दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होनी है।

14,947 बूथों में चार की सूची अभी बाकी

दिल्ली में कुल 14,947 मतदान केंद्र हैं। 20 सितंबर शाम 6 बजे तक इनमें से चार बूथों की नोटिस सूची अपलोड नहीं हुई थी। संबंधित पीडीएफ में लिखा था कि उस बूथ के लिए कोई नोटिस तैयार नहीं हुआ। 19 सितंबर को वेबसाइट पर सूची अपलोड होने के समय करीब 400 बूथों की पीडीएफ में भी यही संदेश था। बाद में इनमें से ज्यादातर में 20 सितंबर तक मतदाताओं की जानकारी वाली तालिका अपलोड कर दी गई। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों से बड़े रुझान पर असर पड़ने की संभावना नहीं बताई गई है।

सीधी बात यह है कि दिल्ली के 33 लाख से ज्यादा वोटरों को नोटिस किसी एक तरह की गलती के चलते नहीं मिला। पुराने रिकॉर्ड से लिंक न होना सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद नाम का अंतर और परिवार के सदस्यों की उम्र से जुड़े आंकड़े हैं। लेकिन नोटिस का मतलब नाम काटना नहीं है। अंतिम फैसला जवाब, दस्तावेज और जांच के बाद होगा।