Jul 28, 2026 07:47 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- इस मल्टीबैगर स्टॉक में मंगलवार को 3.82% गिरावट आई और भाव 377.95 रुपये पर आ गया
- अगर बड़े स्तर पर देखें तो अपोलो माइक्रोसिस्टम्स के शेयर ने पिछले तीन सालों में 594% और पांच सालों में 3200% का रिटर्न दिया है

सुस्त पड़ा है अपोलो माइक्रोसिस्टम्स का शेयर
Apollo micro systems share: वैसे तो मल्टीबैगर डिफेंस स्टॉक अपोलो माइक्रोसिस्टम्स के शेयर में मंगलवार को बिकवाली वाला माहौल था लेकिन कंपनी को लेकर एक पॉजिटिव खबर आई है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसे भारतीय वायुसेना (IAF) ने 'प्राइम डेवलपमेंट एजेंसी' (DA) के तौर पर शॉर्टलिस्ट और एम्पैनल किया है। आसान भाषा में समझें तो यह भारतीय वायु सेना द्वारा कंपनी की उस क्षमता की औपचारिक मान्यता है जिसके तहत वह पूरी तरह से भारत में ही वर्ल्ड-क्लास प्रिसिजन-गाइडेड वेपन सिस्टम को डिजाइन, डेवलप और डिलीवर कर सकती है।
क्या है शेयर का हाल?
लॉन्ग टर्म में इस कंपनी के शेयर ने निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। हालांकि, वर्तमान में शेयर बिकवाली मोड में चल रहा है। माइक्रोसिस्टम्स के शेयर की कीमत में हाल के समय में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इस मल्टीबैगर स्टॉक में मंगलवार को 3.82% गिरावट आई और भाव 377.95 रुपये पर आ गया। इस डिफेंस स्टॉक ने साल की शुरुआत से अब तक (YTD) 38% और एक साल में 110% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। अगर बड़े स्तर पर देखें तो अपोलो माइक्रोसिस्टम्स के शेयर ने पिछले तीन सालों में 594% और पांच सालों में 3200% का रिटर्न दिया है।
कंपनी ने कारोबार पर क्या दिया अपडेट?
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार अपोलो माइक्रोसिस्टम्स ने बताया कि उसे भारत की डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 (DAP-2020) की मेक-II (इंडस्ट्री फंडेड) कैटेगरी के तहत इंडिजिनस प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट (IPREK) प्रोग्राम के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस एम्पैनलमेंट के साथ AMS भारत के प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन (PGM) सेगमेंट में एंट्री कर रही है। यह भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग मार्केट के सबसे ज्यादा वैल्यू और सबसे अधिक एंट्री-बैरियर वाले सेगमेंट में से एक है।
इंडिजिनस प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट के बारे में
अगर इंडिजिनस प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट की बात करें तो यह एक प्रिसिजन गाइडेंस और रेंज बढ़ाने वाली किट है। इस किट को भारत के मौजूदा 500 किलो जनरल पर्पस (GP) अनगाइडेड बमों को लंबी दूरी के प्रिसिजन ग्लाइड हथियारों में अपग्रेड करने के लिए डेवलप किया गया है।
एक बार किट से लैस होने के बाद, बम को 80-100 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी से लॉन्च किया जा सकता है और यह तय टारगेट के 3 मीटर के दायरे में सटीक निशाना लगा सकता है, जिससे एयरक्राफ्ट एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज से बाहर रह सकता है। मौजूदा बम इन्वेंट्री को प्रिसिजन स्टैंडऑफ हथियारों में बदलकर, IPREK नए इम्पोर्टेड प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों को खरीदने का एक किफायती विकल्प देता है।
