October 6, 2026

भारतीय वायु सेना के नए प्रमुख बने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित: 31 अक्टूबर को संभालेंगे कार्यभार, चार दशकों का है शानदार सैन्य करियर - Up18 News

नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना (IAF) के नए नेतृत्व को लेकर मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला सामने आया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया गया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, वह आगामी 31 अक्टूबर, 2026 की दोपहर से एयर चीफ मार्शल के पद पर आधिकारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे। वायुसेना प्रमुख के रूप में उनका यह कार्यकाल 31 दिसंबर, 2028 तक प्रभावी रहेगा।

इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है, “मुझे भारत के राष्ट्रपति की तरफ से एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 31 अक्टूबर, 2026 की दोपहर से एयर चीफ मार्शल के पद पर अगले वायुसेना प्रमुख के रूप में नियुक्त किए जाने की स्वीकृति के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया गया है।”

​विमान उड़ाने का है व्यापक और अनूठा अनुभव

मीडिया रिपोर्ट्स और सैन्य विवरणों के अनुसार, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल कई प्रमुख और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को उड़ाने का बेहद व्यापक अनुभव प्राप्त है। उन्हें मिराज-2000, मिग (MiG) फाइटर जेट के विभिन्न वेरिएंट्स के अलावा एचपीटी-32, एएन-32, एवरो, किरण, जगुआर, आईएल-78, हॉक और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस समेत कई विमानों को उड़ाने में महारत हासिल है। इसके अलावा, वह एक कुशल एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (QFI) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

​प्रमुख सैन्य ऑपरेशंस में निभाई सक्रिय भूमिका

लगभग चार दशकों लंबे अपने शानदार और गौरवशाली सर्विस करियर के दौरान एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने देश के कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सैन्य ऑपरेशंस में बढ़-चढ़कर सक्रिय भूमिका निभाई है। इनमें कारगिल युद्ध के दौरान चलाया गया ‘ऑपरेशन सफेद सागर’, ‘ऑपरेशन रक्षक’, ‘कोप इंडिया’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे प्रमुख सैन्य अभ्यास तथा अभियान शामिल हैं।

​स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं से रहे हैं बेहद करीब से जुड़े

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित देश के महत्वाकांक्षी स्वदेशी एलसीए (LCA) तेजस और अन्य कई घरेलू रक्षा व विमान परियोजनाओं के विकास तथा उन्हें भारतीय वायु सेना में शामिल करने की पूरी प्रक्रिया से बेहद करीब से जुड़े रहे हैं। ऐसे में रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि उनके वायुसेना प्रमुख बनने से भारत के रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशीकरण की सरकारी पहल को और अधिक मजबूती तथा तीव्र गति मिलेगी।