September 24, 2026

"300 करोड़ की डील से लेकर भगोड़े के वकील तक"- उत्तराखंड कांग्रेस ने खोल दी 'पुरानी सभी फाइलें'! - Doon Horizon

उत्तराखंड भाजपा के नए प्रभारी राम माधव और सह-प्रभारी बांसुरी स्वराज की तैनाती पर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। गरिमा दसौनी ने दोनों नेताओं के पुराने विवादों को कुरेदते हुए तीखा हमला बोला।

दून हॉराइज़न, देहरादून (24 सितंबर) : भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उत्तराखंड में नई संगठनात्मक नियुक्तियां करते ही राज्य का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। कांग्रेस ने इस फेरबदल को सीधे अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ते हुए दावा किया है कि भारी फजीहत से बचने के लिए पूर्व प्रभारी दुष्यंत गौतम को चुपचाप किनारे कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने गुरुवार को राजधानी में प्रेस के सामने पार्टी की कमान संभाल रहे नए चेहरों की पृष्ठभूमि पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।

दुष्यंत गौतम की रवानगी और अंकिता हत्याकांड का साया

अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले को लेकर उत्तराखंड में लंबे समय से जनाक्रोश देखने को मिला है। विपक्ष लगातार इस मामले में शामिल तथाकथित ‘वीआईपी’ (VIP) के नाम को सार्वजनिक करने की मांग करता रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, दुष्यंत गौतम पर इस मामले के तार जुड़ने के गंभीर आरोप लग रहे थे, जिसके चलते पार्टी हाईकमान ने उन्हें हटाना ही बेहतर समझा। दसौनी का सीधा आरोप है कि यह फेरबदल किसी सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि आरोपों से घिरी पार्टी की मजबूरी का नतीजा है।

राम माधव और बांसुरी स्वराज की नियुक्ति पर तीखे बोल

भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेता राम माधव (Ram Madhav) को प्रदेश प्रभारी और नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज (Bansuri Swaraj) को सह-प्रभारी बनाए जाने पर कांग्रेस ने तीखा ऐतराज जताया।

गरिमा दसौनी ने दोनों नेताओं के पुराने विवादों का ब्योरा सामने रखा:

  • राम माधव पर आरोप: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के उस चर्चित बयान को दोहराया गया, जिसमें उन्होंने एक जलविद्युत व बीमा परियोजना से जुड़े 300 करोड़ रुपये के कथित प्रस्ताव में राम माधव का नाम घसीटा था।
  • बांसुरी स्वराज पर आक्षेप: आईपीएल के पूर्व कमिश्नर और देश से फरार ललित मोदी के अदालती मामलों में उनकी वकालत का हवाला देते हुए दसौनी ने कहा कि खुद ललित मोदी ने सार्वजनिक रूप से उनकी कानूनी सेवाएं लेने की बात स्वीकारी थी।

दसौनी ने सवाल दागा कि क्या भाजपा के पास उत्तराखंड भेजने के लिए ऐसे ही विवादित पृष्ठभूमि वाले चेहरे बचे हैं?

संगठन के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड पर कांग्रेस का हमला

हमला सिर्फ नए चेहरों तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने राज्य भाजपा संगठन के पुराने पदाधिकारियों के कार्यकाल को भी कठघरे में खड़ा किया। पार्टी प्रवक्ता ने पूर्व संगठन मंत्री संजय कुमार और अजय कुमार के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में भाजपा के कई पूर्व प्रभारियों व संगठन मंत्रियों का इतिहास बेहद विवादित रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कई नेताओं पर अतीत में महिलाओं से जुड़े गंभीर दुराचार और उत्पीड़न के आरोप लगे, जिसके चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। दसौनी ने कहा कि देवभूमि की जनता को ऐसे नेताओं से पूरी तरह सचेत रहने की जरूरत है।

सत्तारूढ़ दल ने अभी तक कांग्रेस के इन तीखे व्यक्तिगत और राजनीतिक हमलों पर कोई औपचारिक विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।