भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत की। सेंसेक्स 300 से अधिक अंक उछला, जबकि निफ्टी 24000 के स्तर से ऊपर कारोबार करता दिखा। भारतीय रुपये ने भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने का उच्चतम स्तर छू लिया।
तीन दिनों की गिरावट के बाद गुरुवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखी। बैंक शेयरों में खरीदारी और वैश्विक बाजारों के मजबूत रुख से बाजार को सहारा मिला। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 334.16 अंक या 0.44 फीसदी चढ़कर 76,904.51 पर पहुंच गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 95.45 अंक बढ़कर 24,009.90 पर कारोबार करता दिखा।
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प्रमुख लाभ पाने वाले शेयरों में टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, एटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, भारती एयरटेल और अल्ट्राटेक सीमेंट शामिल थे। वहीं, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, टाइटन, इंडिगो, सन फार्मास्युटिकल्स और आईटीसी में गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों ने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में कमी और विदेशी मुद्रा तरलता मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के विशेष कार्यक्रम के तहत रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा जमा प्रवाह से बाजार की धारणा को समर्थन मिला।
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बाजार में उछाल क्यों आया?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में थोड़ी कमी से बाजार की धारणा में सुधार की संभावना है। रुपये के नजरिए से एक बड़ा सकारात्मक पहलू रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत 136 अरब अमेरिकी डॉलर का बड़ा संग्रह है। एफसीएनआर (बी) योजना के तहत जुटाए गए 127 अरब अमेरिकी डॉलर आम अनुमानों से कहीं अधिक हैं। इसका बाजार के लिए यह अर्थ है कि रुपया स्थिर होगा, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों को विश्वास मिलेगा।
आरबीआई का विशेष कार्यक्रम क्या था?
भारत ने देश की विदेशी मुद्रा तरलता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष केंद्रीय बैंक कार्यक्रम के तहत विदेशी मुद्रा जमा के माध्यम से रिकॉर्ड 127.23 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए। यह बाजार के तनाव की अवधि के दौरान प्रवासी भारतीयों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को बताया कि 31 अगस्त तक विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक), या एफसीएनआर (बी) जमा से 127.226 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रवाह हुआ।
शेयरों की खरीद-बिक्री किसने की?
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफएफआई) ने बुधवार को 6,688.37 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 2,812.98 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विजयकुमार ने बताया कि बुधवार को निफ्टी में 141 अंकों की गिरावट 9,500 करोड़ रुपये की संस्थागत खरीदारी के बावजूद हुई। इसमें एफएफआई की खरीद 6,688 करोड़ रुपये और डीआईआई की खरीद 2,812 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि खुदरा निवेशकों, प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और मंदड़ियों ने बाजार की कमजोरी का फायदा उठाकर शेयरों को नीचे गिराया। गुरुवार को इसमें बदलाव आने की संभावना है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल 0.17 फीसदी गिरकर 95.47 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का एसएसई कंपोजिट इंडेक्स और जापान का निक्केई 225 इंडेक्स बढ़त पर रहे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट पर रहा। अमेरिकी बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए।
वैश्विक बाजारों का क्या हाल है?
टोक्यो समय अनुसार दोपहर 12:03 बजे तक S&P 500 वायदा में मामूली बदलाव देखा गया। जापान का Topix सूचकांक 1 फीसदी चढ़ा, जो निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत था। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 सूचकांक 0.5 फीसदी की वृद्धि के साथ बंद हुआ। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी 0.3 फीसदी ऊपर रहा। शंघाई कंपोजिट में भी 0.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि यूरो स्टॉक्स 50 वायदा में कोई खास बदलाव नहीं आया।
बाजार पर दबाव क्यों बना हुआ है?
इंडिया वीआईएक्स में पांच फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बाजार में बढ़ती अस्थिरता का स्पष्ट संकेत है। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार पर दबाव जारी रहने की संभावना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इसका एक प्रमुख कारण हैं। बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर सूचकांक में बढ़ोतरी भी निवेशकों की धारणा को कमजोर कर रही है। इन सभी कारकों के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।