September 23, 2026

30 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जा : तहसीलदार ने दिया 24 सितंबर तक जमीन खाली करने का आदेश, नहीं तो चलेगा बुलडोजर - Haribhoomi

तहसीलदार मंदिर हसौद ने खसरा नंबर 933 की भूमि से अनधिकृत कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं, जबकि खसरा नंबर 936 के मामले में संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

Order to remove encroachment from government land

सरकारी जमीन से कब्जा हटाने का आदेश

  • Published: 23 Sep 2026, 08:24 AM IST
  • Last Updated: 23 Sep 2026, 09:04 AM IST

डागेश यादव - आरंग। ग्राम पंचायत दरबा में शासकीय भूमि पर कथित कब्जे की शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। तहसीलदार मंदिर हसौद ने खसरा नंबर 933 की भूमि से अनधिकृत कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं, जबकि खसरा नंबर 936 के मामले में संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

सरपंच संजय टंडन, उपसरपंच नमित यादव,  पंच दिलीप ध्रुव, पंच प्रतिनिधि राजा निर्मलकर, सुदर्शन यादव, श्रवण साहू, गन्नू टंडन, बलदेव ढीढ़ी, आदि सैकड़ो ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार से कार्यवाही की मांग की थी। शिकायत में खसरा नंबर 933 और 936 की करीब 10 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप लगाते हुए इसकी कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये बताई गई थी।

तहसीलदार के आदेश के अनुसार ग्राम दरबा, पटवारी हल्का नंबर-14 स्थित खसरा नंबर 933 का कुल रकबा 12.630 हेक्टेयर है। राजस्व अभिलेख में यह भूमि घास (चराई) मद में दर्ज है। आदेश में इसके 0.92 हेक्टेयर हिस्से से मोहन पिता कन्हैया साहू और शिवकुमार पिता बिसराम पटेल को बेदखल करने का उल्लेख है।

24 सितंबर तक कब्जा खाली करने का निर्देश
संबंधित पक्षों को 24 सितंबर 2026 से पहले भूमि खाली कर तहसील कार्यालय को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि समय-सीमा में कब्जा नहीं हटाने पर बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में होने वाला खर्च संबंधित पक्षों से भू-राजस्व की तरह वसूल किए जाने का भी उल्लेख है।

खसरा नंबर 936 पर भी प्रशासन की कार्रवाई
खसरा नंबर 936 में कथित अतिक्रमण को लेकर सनत पटेल को नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 25 सितंबर को तहसीलदार न्यायालय में उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीणों ने कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि शासकीय भूमि सार्वजनिक संपत्ति है और उसका संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। हालांकि 30 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य और कब्जे से जुड़े अन्य दावे शिकायतकर्ताओं के हैं। भूमि का वास्तविक मूल्य और कब्जे की स्थिति सीमांकन, राजस्व अभिलेख और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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आबादी भूमि के रूप में संरक्षण की ग्राम पंचायत की पहल
इस बीच ग्राम पंचायत दरबा के सरपंच संजय टंडन ने कहा कि कार्रवाई से बचने के लिए कुछ लोगों द्वारा ग्रामीणों के बीच यह बात कही जा रही है कि शासकीय भूमि पर बने मकानों को भी तोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत का उद्देश्य आम ग्रामीणों के वैधानिक हितों की रक्षा करना है।
सरपंच के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा छोटे-छोटे भूखंडों पर लंबे समय से निर्मित मकानों और वहां निवासरत लोगों के संबंध में प्रचलित आबादी के तहत भूमि को आबादी घोषित कर अभिलेखों में दर्ज कराने तथा पात्र लोगों को संरक्षण देने के लिए पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जे के संबंध में प्रशासनिक कार्रवाई और आबादी क्षेत्र में निवासरत पात्र ग्रामीणों के अधिकारों का संरक्षण—दोनों विषयों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। ग्राम पंचायत का प्रयास है कि किसी भी पात्र ग्रामीण को अनावश्यक परेशानी न हो और वैधानिक प्रक्रिया के तहत उनके हितों का संरक्षण किया जाए।

अब 24 सितंबर के बाद की कार्रवाई पर नजर
ग्रामीणों की नजर अब 24 सितंबर की समय-सीमा और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर है। वहीं खसरा नंबर 936 को लेकर 25 सितंबर को तहसीलदार न्यायालय में होने वाली सुनवाई के बाद प्रशासन द्वारा क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर भी ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।

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अधिकारियों ने क्या कहा
तहसीलदार मंदिर हसौद विक्रांत सिंह राठौर ने बताया कि शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जे की शिकायत मिली थी। विधिवत प्रक्रिया के तहत कब्जा हटाने और अन्य कार्रवाई की जा रही है।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) आरंग 
अभिलाषा पैकरा ने बताया कि शासकीय भूमि पर बड़ी पैमाने पर अतिक्रमण किये जाने को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। जिस पर तहसीलदार मंदिर हसौद को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सरपंच संजय टंडन
सरपंच संजय टंडन ने कहा कि मुख्य मार्ग से लगी बेशकीमती शासकीय भूमि पर कथित कब्जे को लेकर ग्रामीणों में असंतोष था। इसी को लेकर ग्राम पंचायत ने शासन-प्रशासन के समक्ष मामला उठाया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत एक ओर शासकीय भूमि के संरक्षण की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे भूखंडों पर बने मकानों में निवासरत पात्र ग्रामीणों को आबादी घोषित कर वैधानिक रूप से संरक्षित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

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