July 24, 2026

3 करोड़ यूजर्स... करोड़ों का कारोबार और ED का शिकंजा, RummyCulture केस में बड़ा एक्शन

3 करोड़ यूजर्स... करोड़ों का कारोबार और ED का शिकंजा, RummyCulture केस में बड़ा एक्शन

ED का RummyCulture केस में एक्शनImage Credit source: TV9

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन रियल मनी रमी गेमिंग से जुड़े ‘RummyCulture’ ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED ने लगभग ₹1,906 करोड़ की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया है. यह कार्रवाई ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के तहत Gameskraft Technologies Private Limited, उसके शेयरधारकों और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ की गई है.

ED के अनुसार, जांच में पता चला कि कंपनियों ने कथित तौर पर ऑनलाइन असली पैसे वाले रम्मी गेम के खिलाड़ियों के साथ धोखाधड़ी करके गैर-कानूनी कमाई की. इसके बाद में अलग-अलग निवेश और संपत्तियों के ज़रिए इस पैसे को वैध बनाने की कोशिश की.जब्त की गई संपत्तियों में बैंक अकाउंट बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयर, एक फार्महाउस और कई रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टीज शामिल हैं. इनमें से कई संपत्तियां कंपनी के शेयरधारकों, उनके परिवार के सदस्यों, फैमिली ट्रस्ट और जुड़ी हुई संस्थाओं के नाम पर हैं.

तेलंगाना में दर्ज कई FIR, 3 करोड़ यूजर थे जुड़े

ED ने तेलंगाना में दर्ज कई FIR के आधार पर यह जांच शुरू की थी. जांच के दौरान, मई और जून 2026 में कंपनी के ऑफिस और उसके डायरेक्टरों के घरों पर छापेमारी की गई, जिससे अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले. जांच में पता चला कि Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies, RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे ऐप्स के जरिए ऑनलाइन असली पैसे वाले रम्मी गेम और टूर्नामेंट चला रही थीं.

इन प्लेटफॉर्म्स के देश भर में लगभग 3 करोड़ यूजर थे. इनमें से बड़ी संख्या में यूजर उन राज्यों से थे जहां ऑनलाइन असली पैसे वाले गेमिंग पर रोक है, जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु.

10 से 15 प्रतिशत कमीशन लेकर कमा रही थीं मुनाफा

ED का आरोप है कि कंपनियां खिलाड़ियों द्वारा लगाई गई दांव की रकम पर 10 से 15 प्रतिशत कमीशन लेकर भारी मुनाफा कमा रही थीं. जांच में यह भी दावा किया गया है कि जहां कंपनियां खिलाड़ियों को पूरी तरह से निष्पक्ष गेम का भरोसा देती थीं, वहीं उनकी जानकारी के बिना उनके खिलाफ बॉट्स (ऑटोमेटेड प्रोग्राम) का इस्तेमाल किया जाता था. इसके परिणामस्वरूप खिलाड़ियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनियों को गैर-कानूनी कमाई करने में मदद मिली.

नए और पुराने खिलाड़ियों को दिए जाते थे ऑफर

एजेंसी के अनुसार, नए खिलाड़ियों और मौजूदा खिलाड़ियों को फिर से जोड़ने के लिए बोनस, रेफरल ऑफर, फ्री टूर्नामेंट, कैश रिवॉर्ड, SMS अलर्ट, फोन कॉल और अन्य प्रमोशनल कैंपेन जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया गया. इन गतिविधियों पर लगभग ₹1,035 करोड़ खर्च किए गए. इसके अलावा, कुछ मामलों में 5% से 10% तक विड्रॉल फीस लगाई गई और खिलाड़ियों को अपने निकाले जा सकने वाले बैलेंस को ‘गेम कैश’ में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

₹2,401 करोड़ की संपत्तियां अटैच

ED का कहना है कि इस गैर-कानूनी कमाई को बाद में डिविडेंड, शेयर बायबैक, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, इक्विटी और महंगी अचल संपत्तियों में निवेश करके लॉन्डर किया गया. जांच के शुरुआती दौर में, लगभग ₹495 करोड़ की चल संपत्तियों को फ्रीज किया गया था. इसके अलावा, ₹11 लाख नकद और लगभग 2.30 किलोग्राम सोने-हीरे के गहने और बुलियन जब्त किए गए. अब तक, इस मामले से जुड़ी लगभग ₹2,401 करोड़ की संपत्तियों को अटैच, फ्रीज या जब्त किया जा चुका है. ED ने कहा है कि इस मामले की जांच जारी है.

जितेन्द्र कुमार शर्मा

जितेन्द्र कुमार शर्मा

साल 2002 से क्राइम और इन्वेस्टिगेशन रिपोर्टिंग का अनुभव। नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, शाह टाइम्स के अलावा टीवी मीडिया में BAG Films के नामी शो सनसनी और रेड अलर्ट में काम किया। उसके बाद न्यूज 24, इंडिया टीवी में सेवाए दी और टीवी 9 भारतवर्ष के साथ सफर जारी है।

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