September 19, 2026

आतंकियों को फंडिंग करने वाला बताकर 3दिन डिजिटल अरेस्ट रखा: फर्जी ATS अधिकारी ने कुवैत से आए व्यवसायी काे ठगा; 55 लाख जमा करवाए - Ratlam News

रतलाम में कुवैत से आए 66 वर्षीय मोटर पार्ट्स व्यवसायी को साइबरों ठगों ने तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। फर्जी एटीएस पुलिस अधिकारी बन व्यवसायी को कहा कि

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आपका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से संपर्क है। आपने टेरर (आंतकवादी) फंडिंग की है। आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निकला है। हमारे पास सबूत है।

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कार्रवाई नहीं करने के नाम पर सायबरों ठगों ने दो बार में व्यवसायी से 55 लाख रुपए ठग लिए।

मामला माणकचौक क्षेत्र के अमृत सागर तालाब क्षेत्र का है। सायबर ठगों ने यहां रहने वाले आशिक हुसैन को 16 से 18 सितंबर तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा था।

व्यवसायी का कुवैत में मोटर पार्ट्स का बिजनेस है। वह पिछले पांच से 6 माह से रतलाम में है।

15 सितंबर को इनके मोबाइल पर साइबर ठगों ने स्वयं को पुलिस एवं एटीएस अधिकारी बताकर फर्जी आपराधिक प्रकरण में फंसाने का डर दिखाया।

महाराष्ट्र का पुलिस अधिकारी बताया व्यवसायी को 15 सितंबर को अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को महाराष्ट्र के कोलाबा का पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए व्यवसायी के मोबाइल नंबर, व्यवसाय एवं भारत में रहने संबंधी जानकारी पूछी।

इसके बाद साइबर ठगों ने एक अन्य मोबाइल नंबर के संबंध में पूछताछ कर दावा किया कि वह नंबर पीड़ित (व्यवसायी) के नाम पर जारी हुआ है।

उस नंबर से तुमने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एजेंट से संपर्क किया है। तुमने आतंकवादियों को टेरर फडिंग की है। गंभीर आपराधिक मामले में फंसने का डर बनाया।

घटनाक्रम शहर के माणकचौक थाना क्षेत्र का है।

घटनाक्रम शहर के माणकचौक थाना क्षेत्र का है।

वीडियो कॉल कर जानकारी ली इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन एवं वाट्सएप वीडियो कॉल कर सायबर ठगों ने स्वयं को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं एटीएस अधिकारी बताया।

ठगों द्वारा पीड़ित से आधार कार्ड एवं पैन कार्ड समेत अन्य व्यक्तिगत जानकारी भी हासिल की। फिर व्यवसायी को कहा कि तुम्हारे खिलाफ एफआईआर दर्ज है।

पुलिस यूनिफॉर्म में दिखे ठग साइबर ठगों ने वाट्सएप के जरिए पीड़ित को पुलिस यूनिफॉर्म में दिखाई दे रहे व्यक्तियों के वीडियो कॉल किए। स्वयं को एटीएस अधिकारी बताया।

इसके अलावा हथियारों से संबंधित फोटो एवं अन्य दस्तावेज भेजकर उनमें व्यक्तियों की पहचान करने के लिए कहा।

ठगों ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज भी पीड़ित को भेजे। व्यवसायी को उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने की बात कही।

गिरफ्तारी से बचने के लिए मांगे रुपए ठगों ने व्यवसायी को इतना डरा दिया कि किसी को कुछ भी बताने से मना कर दिया। व्यवसायी तीन दिन तक घर के अंदर ही रहा। यहां तक घर पर काम करने आने वाले नौकरों को भी आने से मना कर दिया।

ठगों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए व्यवसायी से रुपए की डिमांड की। अलग-अलग बैंक खातों में रुपए जमा कराने को कहा।

दो दिनों में 55 लाख रुपये कराए ट्रांसफर ठगों के दबाव एवं डर के चलते व्यवसायी ने 17 सितंबर 2026 को अपने आईसीआईसी बैंक एकाउंट से 35 लाख रुपए व 18 सितंबर को पंजाब नेशनल बैंक से 20 लाख रुपए, कुल 55 लाख रुपयए साइबर ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। पीड़ित को यह भी विश्वास था कि सत्यापन के बाद यह राशि उसे वापस कर दी जाएगी।

पत्नी ने कॉल किया तो रिसीव नहीं किया व्यवसायी की पत्नी रतलाम में नहीं थी। तीन दिन से वह कॉल कर रही थी। लेकिन व्यवसायी कॉल रिसीव नहीं कर रहा था। यहां तक बाद में मोबाइल भी बंद आने लगा। व्यवसायी के बेटा नहीं है। बेटिया है जो कुवैत में रहती है। एक बेटी रतलाम में है।

पत्नी ने रतलाम में अपने अन्य परिजनों को सूचना दी। घर जाकर देखने को कहा। तब व्यवसायी के दामाद व एक मित्र शनिवार सुबह घर पहुंचे तो वह घर के अंदर घबराए हुए मिले।

वह रुपए जमा कराने की हड़बड़ी में थे। तब उनसे पूछा तो सारा घटनाक्रम बताया। फिर दामाद व मित्र उन्हें लेकर सायबर सेल पहुंचे। तब पूरी घटना व्यवसायी ने बताई।

15 लाख रुपए फ्रीज कराए थाना माणकचौक प्रभारी विक्रम सिंह चौहान, साइबर सेल प्रभारी जीवन बारिया एवं साइबर सेल की टीम द्वारा तत्काल तकनीकी कार्रवाई शुरू की।

NCRP पोर्टल के माध्यम से ठगी की राशि में से 15 लाख रुपए फ्रीज करवाए। इसके पहले पीड़ित द्वारा ठगों के कहने पर अतिरिक्त 20 लाख रुपए ओर ट्रांसफर करने की तैयारी की थी।

वह इतना डर गए थे कि राशि जमा कराने की जिद पर अड़ गए थे। फिर साइबर सेल के हेड कॉन्स्टेबल लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी एवं परिजनों द्वारा पीड़ित को समझाइश देकर अतिरिक्त राशि ट्रांसफर करने से रोका।

थाने पर की काउंसलिंग इसके बाद साइबर सेल एवं थाना माणकचौक प्रभारी विक्रमसिंह चौहान, सब इंस्पेक्टर शांतिलाल चौहान द्वारा पीड़ित की काउंसलिंग की।

उन्हें समझाया गया कि वह साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आ गए है। मामले में पुलिस ने E-FIR दर्ज की है।

ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी एवं शेष राशि की रिकवरी के लिए पुलिस टीम गठित की है। आगे की विवेचना एवं तकनीकी जांच की जा रही है।

रतलाम पुलिस की अपील रतलाम पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कोई भी पुलिस अधिकारी, CBI, ED, NCB, TRAI, ATS अथवा सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फोन या वीडियो कॉल कर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं कर सकता।

यदि कोई व्यक्ति फोन/वीडियो कॉल पर स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, एफआईआर, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, सिम कार्ड अथवा किसी अन्य आपराधिक मामले का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने को कहता है, तो यह साइबर ठगी का संकेत है।

ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें। तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। नजदीकी पुलिस/साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क करें।

एएसपी राकेश पंद्रों ने बताया पाकिस्तान की एजेंसी का डर दिखाकर व्यवसायी को डिजिटल अरेस्ट रखा गया। नकली पुलिस अधिकारी बन कर दो बार में अलग-अलग रुपए जमा कराए है। सारे तथ्यों को ध्यान में रख आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।