दो करोड़ रुपए की कथित रिश्वत के मामले में अब तक कहानी का सबसे चर्चित हिस्सा ट्रैप की कार्रवाई रहा है। लेकिन एसीबी की एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम को शुरू से अंत तक पढ़ें तो असली कहानी 26 सितंबर को दो करोड़ रुपए पकड़े जाने से तीन दिन पहले शुरू होती है।
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एसीबी को शिकायत मिलते ही टीम ने न तो सीधे ट्रैप किया और न ही सिर्फ एक बातचीत के आधार पर कार्रवाई की। 23 से 25 सितंबर तक परिवादी और कथित दलाल के बीच हुई बातचीत को अलग-अलग चरणों में रिकॉर्ड कराया गया। हर बार रिकॉर्डिंग वापस लेने के बाद उसे सुना गया और फिर सुरक्षित रखा गया। इसके बाद ही 26 सितंबर के ट्रैप की तैयारी आगे बढ़ी। यानी एसीबी के पास ट्रैप से पहले सिर्फ शिकायत नहीं थी, बल्कि तीन दिन में तैयार हुआ बातचीत और संपर्क का एक क्रम था।
पहला कदम: एसीबी दफ्तर आने से डर रहा था परिवादी, इसलिए बाहर ही रिकॉर्डिंग कराई: 23 सितंबर को हेमलता कांकरिया ने एसीबी के डीएसपी डॉ. सोनू शेखावत को वाट्सएप कॉल कर शिकायत दी। आरोप था कि 272 भूखंड प्रकरण में राहत, दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने और गिरफ्तारी के दौरान घर से मिले दस्तावेज लौटाने के बदले दो करोड़ रुपए मांगे जा रहे हैं।
एफआईआर के मुताबिक हेमलता और उनके पति निरंजन मोगरा एसीबी कार्यालय आने को लेकर निगरानी के डर में थे। इसलिए एसीबी ने परिवादी को कार्यालय बुलाने के बजाय कार्यालय के बाहर एकांत स्थान पर लिखित रिपोर्ट लेने की व्यवस्था की। इसके बाद सहायक प्रशासनिक अधिकारी दलपतसिंह को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर और नया मेमोरी कार्ड दिया गया। उन्हें परिवादी से संपर्क कर बातचीत रिकॉर्ड करने के निर्देश दिए गए।
दलाल के घर तक गया परिवादी: पहली कार्रवाई का तरीका भी खास था। एफआईआर के अनुसार परिवादी को डिजिटल टेप रिकॉर्डर चालू कर सज्जनसिंह जैन के मकान की ओर भेजा गया। एसीबी का कर्मचारी उससे कुछ दूरी पर पीछे रहा। परिवादी कुछ देर बाद मकान से बाहर आया और स्कूटर से थोड़ी दूर जाकर रुका। उसने चालू रिकॉर्डर एसीबी कर्मचारी को सौंप दिया। इसके बाद रिकॉर्डिंग सुनी गई तो उसमें दो करोड़ रुपए की कथित मांग की पुष्टि होने की बात एफआईआर में दर्ज की गई।
रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड को फिर एसीबी कार्यालय की अलमारी में सुरक्षित रख दिया गया। इसके बाद टीम ने अगली बातचीत के लिए नया मेमोरी कार्ड इस्तेमाल करने का फैसला किया। यानी पहला सबूत ट्रैप वाली जगह पर नहीं, बल्कि उससे पहले कथित दलाल के घर की बातचीत से तैयार हुआ। अगले दिन 24 सितंबर को भी सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। परिवादी और सज्जनसिंह की मुलाकात और बातचीत रिकॉर्ड कराई गई। इस रिकॉर्डिंग को भी वापस लाकर एसीबी अधिकारियों ने सुना और परिवादी के बताए घटनाक्रम की पुष्टि होने की बात एफआईआर में लिखी।
25 सितंबर की रात : 25 सितंबर को रात करीब 8.10 बजे परिवादी ने एसीबी को वाट्सएप कॉल कर बताया कि सज्जनसिंह ने उसे अपने घर बुलाया है। एसीबी ने फिर वही तरीका अपनाया। सुरक्षित रखा गया डिजिटल रिकॉर्डर निकाला गया, उसमें नया मेमोरी कार्ड लगाया गया और दलपतसिंह को परिवादी से संपर्क कर आगे की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए भेजा गया।
इसी दिन की बातचीत में परिवादी ने एसीबी को बताया कि सज्जनसिंह के मोबाइल से दो-तीन बार बात हुई और उससे कहा गया कि मुकेश कुमार सोनी दो करोड़ रुपए जल्दी भिजवाने को कह रहे हैं। परिवादी ने कथित तौर पर कहा कि उसे विश्वास नहीं है और वह सज्जनसिंह को साथ लेकर खुद मुकेश सोनी से बात करना चाहता है।