
CEO की डेली रूटीन हुई वायरल Image Credit source: LinkedIn/Scott Kirby
यूनाइटेड एयरलाइंस के CEO स्कॉट किर्बी की रोजमर्रा की जिंदगी आम कॉर्पोरेट बॉस की सोच से काफी अलग है. एक बड़ी एयरलाइन की जिम्मेदारी संभालने और लगातार यात्रा करने के बावजूद उनका दावा है कि वह शायद सबसे कम तनाव लेने वाले लोगों में से एक हैं. उनकी दिनचर्या में भरपूर नींद, एक्सरसाइज, पढ़ने का लंबा समय और परिवार के साथ बिताए गए पल शामिल हैं.
59 साल के किर्बी अमेरिका के डलास में रहते हैं. उन्होंने Business Insider के साथ बातचीत में बताया कि वह आमतौर पर सुबह 5 से 5:30 बजे के बीच उठते हैं. खास बात यह है कि उन्हें अलार्म लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. वह करीब साढ़े आठ घंटे की नींद लेने के बाद खुद ही उठ जाते हैं. सुबह की शुरुआत वह अक्सर एक सेब या केला खाकर करते हैं. इसके बाद उनका वर्कआउट शुरू होता है. इसमें अपर-बॉडी वेट ट्रेनिंग, केटलबेल, रनिंग और कोर एक्सरसाइज शामिल हैं. हालांकि, सफर के दौरान कई बार उन्हें अपना वर्कआउट छोड़ना भी पड़ता है.
बिजी दिखने के बजाय सोचने पर जोर
एक दिलचस्प बात यह है कि किर्बी एक्सरसाइज के दौरान भी समय का इस्तेमाल करते हैं. सेट्स के बीच वह ईमेल चेक करते हैं और The Wall Street Journal तथा The New York Times पढ़ते हैं. करीब 7 बजे तक उनके बच्चे भी उठ जाते हैं. स्कूल के दिनों में वह उनके साथ नाश्ता करते हैं और कई बार खुद उन्हें स्कूल छोड़ने भी जाते हैं. उन्होंने बताया कि परिवार में बच्चों को गले लगाने और किस करने की एक परंपरा है, जिसे उनका सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला बेटा अब थोड़ा शर्मनाक मानता है, हालांकि उसे यह मजेदार भी लगता है.
किर्बी हफ्ते में एक-दो बार बिजनेस ब्रेकफास्ट भी करते हैं. टेक्सास में होने पर उनका काम आमतौर पर सुबह 8 बजे शुरू होता है. हालांकि, इंटरनेशनल कॉल्स के लिए वह इससे पहले भी उपलब्ध रहते हैं. उनकी मीटिंग्स को लेकर एक सख्त नियम है. वह दिन में चार घंटे से ज्यादा मीटिंग नहीं करते और उनके हिसाब से दो से ढाई घंटे काफी होते हैं. उन्हें ऐसी मीटिंग बिल्कुल पसंद नहीं, जिसमें लोग सिर्फ स्लाइड्स पढ़ते रहें. वह चाहते हैं कि मीटिंग में असली मुद्दों पर बातचीत और फैसले हों.
लंच को लेकर भी किर्बी ज्यादा सोच-विचार नहीं करते. उनके लिए खाना बस शरीर को चलाने के लिए जरूरी चीज है. वह कई बार पांच मिनट में ही लंच खत्म कर लेते हैं. उनकी दिनचर्या का सबसे खास हिस्सा पढ़ना है. वह रोज करीब तीन घंटे पढ़ते हैं और चलते हुए पढ़ने की आदत भी बना चुके हैं. पिछले चार साल से वह रोजाना औसतन 20,000 से ज्यादा कदम चल रहे हैं. उनका दावा है कि वह हफ्ते में करीब डेढ़ किताब पढ़ लेते हैं और साइंस फिक्शन उनकी पसंदीदा शैली है.
किर्बी का मानना है कि किताबें दुनिया को समझने का बेहतर तरीका देती हैं. महामारी के शुरुआती दौर में भी उन्हें कोविड-19 की गंभीरता जल्दी समझ आ गई थी, क्योंकि वह पहले से महामारियों के इतिहास के बारे में पढ़ चुके थे. शाम करीब 5 बजे वह काम खत्म करने की कोशिश करते हैं ताकि बच्चों के साथ समय बिता सकें. स्कूल के दिनों में वह उन्हें उनकी प्रैक्टिस और दूसरी गतिविधियों में ले जाते हैं. परिवार साथ में करीब 6 बजे डिनर करता है. इसके बाद बच्चों के साथ लुका-छिपी और भाग-दौड़ जैसे खेल होते हैं और फिर पढ़ने का समय आता है.
रात करीब 9 बजे वह सोने चले जाते हैं ताकि अगले दिन भी साढ़े आठ घंटे की नींद पूरी हो सके. किर्बी कहते हैं कि उन्हें जल्दी सोना पसंद है और उनका शेड्यूल लोगों की कल्पना से काफी कम व्यस्त है. उनका मानना है कि बहुत से बड़े अधिकारी खुद को इस बात से आंकते हैं कि वे कितने व्यस्त हैं, जबकि मीटिंग्स में बैठे रहने का मतलब हमेशा काम करना नहीं होता. उनके मुताबिक, CEO का असली काम ज्यादा घंटे काम करना नहीं, बल्कि बेहतर तरीके से सोचना है.
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हालांकि, यात्रा की वजह से उनकी दिनचर्या बदलती रहती है. वह हफ्ते में करीब तीन उड़ानें लेते हैं, साल में लगभग पांच विदेशी यात्राएं करते हैं और शिकागो व वॉशिंगटन डीसी में भी काफी समय बिताते हैं. कभी-कभी वह दूसरी एयरलाइंस से भी सफर करते हैं ताकि उनकी सर्विस और टेक्नोलॉजी को खुद अनुभव कर सकें. टिकट पहले बुक करने पर वह आमतौर पर फर्स्ट क्लास चुनते हैं, लेकिन अचानक बदलते शेड्यूल के कारण कई बार इकोनॉमी में भी सफर करना पड़ता है. उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है कि फ्लाइट का समय सुविधाजनक हो.

आयुष कुमार
आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.
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