बालोतरा जिले के मिठौड़ा गांव में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और पुलिस ने एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी। पुलिस ने एक सरकारी डॉक्टर सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया और मौके से 3.764 किलो कच्ची एमडी, ड्रग्स बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले केमिकल,
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पूरा नेटवर्क डॉक्टरी पेशे की आड़ में चलाया जा रहा था। मुख्य आरोपी सुरेश कुमार विश्नोई ने कई कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी की, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं लगी। इसके बाद बेंगलुरु गया, जहां दवा सप्लाई का काम करने लगा। नौकरी में ज्यादा रुपए नहीं मिले तो गांव लौटकर एमडी ड्रग्स बनाने का फैसला किया।
सुरेश ने यूट्यूब वीडियो देखकर एमडी ड्रग्स बनाने की पूरी प्रोसेस सीखी और घर में ही फैक्ट्री लगाई। फिर जालोर जिला हॉस्पिटल में पोस्टेड सरकारी डॉक्टर मुकेश विश्नोई और उत्कर्ष के साथ तैयार ड्रग्स की बालोतरा, जालोर सहित आसपास के इलाकों में सप्लाई करने लगा।

आरोपियों को पकड़ने के बाद फैक्ट्री में रखे केमिकल की जांच करते हुए पुलिस।
घर में ड्रग्स फैक्ट्री चलाने की मिली थी सूचना
आईजी विकास कुमार ने बताया- ANTF को सूचना मिली थी कि मिठौड़ा निवासी सुरेश कुमार विश्नोई अपने घर के पास एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री चला रहा है। इस पर ANTF ने पुलिस के साथ मिलकर सुरेश के घर पर दबिश दी। इस दौरान घर के बाहर बने छप्पर में बैठे 3 युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया।
तीनों युवक की पहचान मिठौड़ा निवासी सुरेश कुमार विश्नोई, जालोर के मोदरान निवासी डॉ. मुकेश विश्नोई और उत्कर्ष के रूप में हुई। मकान और परिसर की तलाशी लेने पर 3.764 किलो कच्ची एमडी, 888 ग्राम '2-ब्रोमो 4-मैथापेलारिफिन' पाउडर और 800 ग्राम अन्य केमिकल मिला।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक बिलौना मशीन, इंडक्शन चूल्हा, बड़ा कांच का जार और थर्मामीटर भी मिला। आरोपियों के पास से 3 लाख 41 हजार 700 रुपए नकद भी बरामद किए गए। आरोपियों से 1 कार भी जब्त की।

पुलिस ने फैक्ट्री में से इलेक्ट्रिक बिलौना मशीन, इंडक्शन चूल्हा, बड़ा कांच का जार और थर्मामीटर भी बरामद किया है।
यूट्यूब से सीखी प्रोसेस, दवा कारोबार से मिला केमिकल
IG ने बताया- पूछताछ में सामने आया कि सुरेश कुमार ग्रेजुएट है। उसने पटवारी, ग्राम सेवक, पुलिस कॉन्स्टेबल, वनरक्षक और एसआई समेत कई कॉम्पिटिशन एग्जाम दिए, लेकिन सफलता नहीं मिली। साल 2022 में वह बेंगलुरु गया और दोस्त के साथ दवा सप्लाई का काम करने लगा।
2024 में गांव लौटने के बाद वह तस्करों के संपर्क में आया और अधिक मुनाफा कमाने के लालच में एमडी तस्करी से जुड़ गया। यूट्यूब वीडियो देखकर एमडी ड्रग्स बनाने की पूरी प्रोसेस सीखी और दवा सप्लाई के अनुभव और नेटवर्क का फायदा उठाकर उसने केमिकल्स का इंतजाम किया।
आरोपी सुरेश कुमार एमडी की तैयार खेप बेचने के लिए अपने परिचित डॉ. मुकेश और उत्कर्ष को अपने घर बुलाता था। डॉक्टर होने के कारण किसी को शक नहीं होता था, जिससे वह कार में आसानी से ड्रग्स ले जाकर जालोर, सिवाना और आसपास के इलाकों में सप्लाई करता था।
आईजी ने बताया- कार्रवाई के समय भी दोनों आरोपी एमडी ड्रग्स की खेप खरीदने सुरेश के घर आए हुए थे। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, जिससे नेटवर्क में शामिल अन्य तस्करों और केमिकल्स सप्लाई करने वालों को भी पकड़ा जा सके।

घर में बनी फैक्ट्री की जांच करते हुए पुलिस टीम।