इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को हाथरस केस को लेकर यूपी सरकार पर सख्त टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा, पीड़िता के परिवार को तीन महीने के भीतर गाजियाबाद या नोएडा में बसाया जाए। उन्हें वहां रहने की सुविधाएं भी दी जाएं। साथ ही, जुलाई 2022 के आदेश के अनुसार प
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कोर्ट ने कहा, परिवार की मांग पर फैसला लेने में राज्य सरकार की ओर से ‘अडियल रवैया’ अपनाया गया।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की बेंच ने यूपी सरकार के 22 फरवरी 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में बसाने का विकल्प दिया गया था। कोर्ट ने कहा, इस फैसले में परिवार की गाजियाबाद या गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास की मांग का कोई जिक्र तक नहीं था, इसलिए इसे “कानून की नजर में कोई निर्णय नहीं” माना जा सकता।
आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव (गृह) को दी गई है। उन्हें अनुपालन का हलफनामा दाखिल करना होगा। आदेश का पालन नहीं होने पर अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।

हाथरस के पीड़ित परिवार को CRPF की सिक्योरिटी मिली हुई है।
परिवार ने गाजियाबाद या नोएडा में बसाने की मांग की थी
हाथरस मामले के बाद जुलाई 2022 में परिवार ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह खुद को हाथरस में सुरक्षित महसूस नहीं करता और नोएडा में बसना चाहता है। परिवार के एक सदस्य को नोएडा में सरकारी नौकरी देने की भी मांग की थी।
बाद में परिवार ने गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास के लिए आवेदन किया। 14 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने परिवार को जिलाधिकारी, हाथरस के सामने औपचारिक आवेदन देने का निर्देश दिया था। परिवार ने 2 दिसंबर 2024 को गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास के लिए आवेदन किया।
हालांकि, राज्य सरकार ने 22 फरवरी 2025 को केवल कासगंज, एटा और अलीगढ़ में पुनर्वास का विकल्प दिया।

यह पीड़िता का घर है। परिवार ने नोएडा या गाजियाबाद में बसाए जाने की मांग की थी।
पीड़िता का भाई बोला- आदेश का जल्द पालन करे सरकार
पीड़िता के भाई ने हाईकोर्ट के आदेश पर कहा, इससे परिवार को उम्मीद जगी है कि अब वे खुली हवा में सांस ले सकेंगे। उनका कहना है कि परिवार के 9 सदस्य अभी भी घुटन भरी जिंदगी जी रहे हैं।
सरकार जल्दी से जल्दी न्यायालय के फैसले का पालन करे। उनके परिवार को नोएडा या गाजियाबाद शिफ्ट करें। गांव और पूरे क्षेत्र का माहौल काफी खराब है। वह अब यहां रहना नहीं चाहते। वह यहां से बाहर जाना चाहते हैं।

ये CRPF का बंकर है, जिसमें हर वक्त हथियारों से लैस जवान तैनात रहते हैं। ये पीड़िता के घर के बाहर बना हुआ है।
तीन साल पहले बरी हुए थे तीन आरोपी, एक को उम्रकैद
हाथरस केस में एससी-एसटी कोर्ट ने 2 मार्च, 2023 को अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 4 आरोपियों में से सिर्फ एक संदीप सिसौदिया को दोषी माना। जबकि 3 आरोपियों लवकुश, रामू उर्फ रामकुमार और रवि उर्फ रविंद्र सिंह को बरी कर दिया था। अदालत ने संदीप को गैर इरादतन हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। चारों आरोपियों में से किसी पर भी गैंगरेप का आरोप सिद्ध नहीं हुआ था।

2 मार्च 2023 को कोर्ट ने संदीप को गैर इरादतन हत्या और SC/ST एक्ट में उम्रकैद की सजा सुनाई।
हाथरस कांड: 2020 से अब तक की पूरी कहानी
14 सितंबर 2020: हाथरस के चंदपा क्षेत्र के एक गांव में दलित युवती के साथ रेप का मामला सामने आया।
26 सितंबर 2020: पीड़िता के बयान के आधार पर तीन और आरोपियों लवकुश सिंह, रामू और रवि सिंह के नाम मुकदमे में जोड़े गए। चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
इलाज के लिए दिल्ली रेफर: गंभीर हालत में पीड़िता को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
29 सितंबर 2020: इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई। शव हाथरस लाया गया और उसी रात पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार उनकी अनुमति के बिना किया गया।
अक्टूबर 2020: अंतिम संस्कार के बाद मामले ने तूल पकड़ा और देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। यूपी सरकार ने तत्कालीन एसपी, सीओ समेत 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

हाथरस केस में पुलिस पर जबरन अंतिम संस्कार कराए जाने के आरोप लगे थे।
11 अक्टूबर 2020: प्रदेश सरकार की सिफारिश पर CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।
CBI जांच: जांच एजेंसी ने पीड़िता और आरोपियों के परिजनों समेत कई लोगों से पूछताछ की। घटनास्थल का निरीक्षण और क्राइम सीन का री-क्रिएशन भी किया गया।
18 दिसंबर 2020: CBI ने करीब 67 दिन की जांच के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें हत्या और गैंगरेप समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गईं।
CBI का दावा: जांच एजेंसी ने पीड़िता के मृत्यु से पहले दिए गए बयान को आधार बनाया और चार्जशीट में गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाया।
कोर्ट का फैसला: ट्रायल कोर्ट में गैंगरेप और हत्या के आरोप साबित नहीं हुए।
2022: पीड़ित परिवार ने सुरक्षा कारणों से हाथरस से बाहर, खासकर नोएडा में पुनर्वास की मांग की।
2024: हाईकोर्ट ने परिवार को जिलाधिकारी के सामने पुनर्वास के लिए औपचारिक आवेदन देने का निर्देश दिया। परिवार ने गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर में बसाने की मांग की।
22 फरवरी 2025: राज्य सरकार ने परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में बसाने का विकल्प दिया। परिवार की नोएडा/गाजियाबाद की मांग पर फैसला नहीं लिया गया।
25 अगस्त 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार का यह फैसला रद्द कर दिया और तीन महीने के भीतर परिवार को नोएडा या गाजियाबाद में पुनर्वासित करने का आदेश दिया।
कोर्ट की नाराजगी: हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये को “अनावश्यक प्रतिरोध” और “अड़ियल रवैया” बताया।
सरकारी नौकरी: कोर्ट ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के पुराने आदेश का भी पालन करने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।
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